लखनऊ से एक ऐसा संदेश सामने आया है जो सिर्फ सरकारी अपील नहीं, बल्कि डिजिटल दौर में भटकती युवा पीढ़ी के लिए गंभीर चेतावनी बनकर उभरा है। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री Yogi Adityanath ने “योगी की पाती” के माध्यम से प्रदेश के बच्चों, युवाओं और अभिभावकों को संबोधित करते हुए सोशल मीडिया की अंधी दौड़, रील बनाने के जुनून और लाइक्स-व्यूज़ के लिए जान जोखिम में डालने की प्रवृत्ति पर गहरी चिंता जताई है। हालिया हादसों, सेल्फी के दौरान मौतों और खतरनाक स्टंट वीडियो की बढ़ती घटनाओं से विचलित मुख्यमंत्री ने साफ कहा—“रील और रियल लाइफ का फर्क समझिए, कुछ सेकंड की वायरलिटी जिंदगी से बड़ी नहीं हो सकती।”
डिजिटल क्रांति को बताया वरदान, लेकिन संयम के बिना अभिशाप
अपने विस्तृत संदेश में मुख्यमंत्री ने माना कि सोशल मीडिया आज सूचना, संवाद और अभिव्यक्ति का सबसे शक्तिशाली मंच है। इसने आम नागरिक को आवाज दी है, प्रतिभाओं को मंच दिया है और लोकतांत्रिक संवाद को मजबूती दी है। लेकिन उन्होंने चेताया कि यही माध्यम तब खतरनाक बन जाता है जब इसका इस्तेमाल विवेक के बजाय दिखावे और सनसनी के लिए होने लगे। योगी ने लिखा कि मोबाइल स्क्रीन पर मिलने वाली तात्कालिक लोकप्रियता युवाओं को यह भ्रम दे रही है कि कुछ सेकंड का जोखिम उन्हें रातोंरात स्टार बना देगा, जबकि सच्चाई यह है कि ऐसे वीडियो कई बार मौत का निमंत्रण बन जाते हैं।
स्टंट, सेल्फी, ट्रेन, टंकी, एक्सप्रेसवे… हर जगह मौत से खेल रहे युवा
मुख्यमंत्री ने विशेष रूप से उन ट्रेंड्स का उल्लेख किया जिनमें युवा तेज रफ्तार बाइक और कारों पर स्टंट करते हैं, रेलवे ट्रैक या ट्रेन के दरवाजों पर वीडियो शूट करते हैं, ऊंची इमारतों और पुलों पर खतरनाक सेल्फी लेते हैं, पानी की टंकियों, नदी किनारों और एक्सप्रेसवे पर रील बनाते हैं। उन्होंने कहा कि यह कंटेंट क्रिएशन नहीं बल्कि ‘जानलेवा लापरवाही’ है। हाल ही में उत्तर प्रदेश में सेल्फी और सोशल मीडिया वीडियो के दौरान हुई कई दुर्घटनाओं ने इस चिंता को और बढ़ा दिया है। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट कहा कि एक लाइक या एक व्यू कभी भी एक परिवार के बेटे-बेटी की जिंदगी की कीमत नहीं हो सकता।
कुछ सेकंड का वीडियो, कई घरों का मातम
पत्र में योगी आदित्यनाथ ने उन परिवारों के दर्द का उल्लेख किया जिनके बच्चे सोशल मीडिया के खतरनाक ट्रेंड्स का हिस्सा बनते हुए अपनी जान गंवा बैठे। उन्होंने लिखा कि दुर्घटना केवल एक व्यक्ति को नहीं ले जाती, बल्कि माता-पिता की उम्मीद, भाई-बहनों का सहारा और पूरे परिवार की मुस्कान छीन लेती है। मुख्यमंत्री की यह भावुक अपील हालिया हादसों की पृष्ठभूमि में आई है, जहां सेल्फी लेते समय नदी में डूबने और ऊंचाई से गिरने जैसी घटनाओं ने प्रशासन को भी झकझोर दिया।
सोशल मीडिया का मनोवैज्ञानिक दबाव: तुलना, ट्रेंड और त्वरित प्रसिद्धि
“योगी की पाती” केवल दुर्घटनाओं का उल्लेख नहीं करती, बल्कि उसके पीछे छिपे मानसिक कारणों को भी सामने लाती है। मुख्यमंत्री ने कहा कि आज का युवा लगातार comparison culture में जी रहा है—किसके ज्यादा followers, किसकी reel viral, किसे ज्यादा comments। इस डिजिटल प्रतिस्पर्धा ने एक अदृश्य दबाव पैदा कर दिया है। जल्दी प्रसिद्धि पाने की लालसा, ऑनलाइन गेमिंग की लत, स्क्रीन टाइम का असंतुलन और लगातार validation पाने की चाह युवाओं को अस्वस्थ मानसिकता की ओर धकेल रही है। यही दबाव उन्हें जोखिम लेने के लिए उकसाता है।
मेरे प्यारे बच्चों,
आज अनेक युवा लाइक, व्यूज और फॉलोअर्स के मोहजाल में पड़कर घरों के अंदर और सड़क पर स्टंट, तेज रफ्तार बाइक एवं कार पर करतब दिखाने, रेलवे ट्रैक पर और ट्रेन के दरवाजों से लटककर वीडियो बनाने, ऊंची इमारतों, पहाड़ों, नदियों, पुलों, एक्सप्रेसवे और यहां तक कि पानी की… pic.twitter.com/FTbzIOmRYv
— Yogi Adityanath (@myogiadityanath) May 4, 2026
CM योगी का युवाओं से सीधा संवाद: ‘आप सिर्फ अपने नहीं, परिवार और राष्ट्र के भी हैं’
मुख्यमंत्री ने युवाओं से बेहद स्पष्ट शब्दों में कहा कि वे अपनी ऊर्जा को शिक्षा, कौशल, नवाचार, फिटनेस और सकारात्मक रचनात्मकता में लगाएं। उन्होंने कहा कि वायरल होने की चाह में जिंदगी दांव पर लगाना समझदारी नहीं, बल्कि भविष्य से खिलवाड़ है। युवाओं को प्रेरक, सांस्कृतिक, सामाजिक और ज्ञानवर्धक कंटेंट बनाने की सलाह देते हुए योगी ने कहा कि सोशल मीडिया का इस्तेमाल अपनी प्रतिभा दिखाने और समाज को जोड़ने के लिए हो, न कि मौत से खेलने के लिए।
अभिभावकों को भी दी बड़ी जिम्मेदारी
इस संदेश में मुख्यमंत्री ने माता-पिता को भी उतना ही जिम्मेदार माना। उन्होंने कहा कि बच्चों के हाथ में सिर्फ मोबाइल थमा देना पालन-पोषण नहीं है। अभिभावकों को उनके डिजिटल व्यवहार पर नजर रखनी होगी, समय प्रबंधन सिखाना होगा, सही-गलत कंटेंट का फर्क समझाना होगा और सबसे जरूरी—उनसे संवाद बनाए रखना होगा। योगी ने पहले भी सार्वजनिक मंचों से छोटे बच्चों को अनियंत्रित स्मार्टफोन देने को ‘गलती’ बताया था और अब इस चिट्ठी में डिजिटल लिटरेसी को पारिवारिक अनुशासन का हिस्सा बनाने की बात दोहराई है।
सरकार का संदेश: युवाओं के लिए अवसर मौजूद, बस दिशा सही चुनें
मुख्यमंत्री ने यह भी याद दिलाया कि उत्तर प्रदेश सरकार युवाओं के लिए कौशल विकास, रोजगार, स्वरोजगार और नवाचार से जुड़ी कई योजनाएं चला रही है। CM युवा हेल्प डेस्क, कौशल दिशा पोर्टल, सरकारी भर्तियां और प्रशिक्षण कार्यक्रम युवाओं को सकारात्मक भविष्य की ओर मोड़ने के प्रयास हैं। उनका कहना था कि अगर युवा अपनी रचनात्मक शक्ति सही दिशा में लगाएं तो वही मोबाइल फोन सीखने, कमाने और आगे बढ़ने का सबसे बड़ा हथियार बन सकता है।
‘रील’ बनाम ‘रियल’—यही है पूरी चिट्ठी का सार
मुख्यमंत्री के इस पत्र का सबसे असरदार संदेश यही है कि सोशल मीडिया की रील दुनिया अक्सर भ्रम पैदा करती है। स्क्रीन पर दिखने वाला रोमांच, बहादुरी या ग्लैमर वास्तविक जीवन में वैसा नहीं होता। कई बार जो वीडियो दूसरों को ‘कूल’ लगते हैं, उनके पीछे टूटी हड्डियां, बर्बाद करियर और रोते परिवार होते हैं। इसलिए ‘रील’ और ‘रियल’ का अंतर समझना ही आज की सबसे बड़ी डिजिटल शिक्षा है।
जिम्मेदारी ही असली वायरल संदेश
“योगी की पाती” दरअसल एक प्रशासनिक दस्तावेज से ज्यादा सामाजिक चेतावनी है। यह कहती है कि तकनीक से भागना नहीं है, बल्कि उसे समझदारी से इस्तेमाल करना है। अगर युवा संयमित होंगे, अभिभावक सजग होंगे और समाज डिजिटल दिखावे के बजाय वास्तविक उपलब्धि को महत्व देगा, तभी यह पीढ़ी सुरक्षित भी रहेगी और सफल भी। मुख्यमंत्री ने अंत में विश्वास जताया कि उत्तर प्रदेश का युवा वर्ग अपनी जिम्मेदारी समझेगा और ‘वायरल’ नहीं, ‘वैल्यूएबल’ बनने की दिशा चुनेगा।














