लखनऊ। उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष अजय राय की तबीयत अचानक बिगड़ने से शुक्रवार को कांग्रेस खेमे में हलचल मच गई। लखनऊ स्थित कांग्रेस मुख्यालय में आयोजित प्रदेश स्तरीय शिक्षक एवं चिकित्सक सम्मेलन के दौरान अजय राय को अस्वस्थता महसूस हुई, जिसके बाद उन्हें तत्काल Medanta Hospital में भर्ती कराया गया, जहां विशेषज्ञ डॉक्टरों की निगरानी में उनका इलाज जारी है। मेदांता लखनऊ उत्तर प्रदेश के बड़े मल्टीस्पेशियलिटी अस्पतालों में गिना जाता है, जहां गंभीर मरीजों के लिए उन्नत आपात चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध हैं।
कांग्रेस सूत्रों के मुताबिक, अजय राय कार्यक्रम में सक्रिय रूप से शामिल थे और मंच से शिक्षकों तथा चिकित्सकों की भूमिका को लेकर पार्टी की प्राथमिकताओं पर चर्चा कर रहे थे। इसी बीच उनकी तबीयत अचानक बिगड़ गई, जिससे कार्यक्रम स्थल पर मौजूद नेताओं और कार्यकर्ताओं में चिंता फैल गई। आनन-फानन में उन्हें अस्पताल ले जाया गया। फिलहाल डॉक्टरों की टीम उनकी विभिन्न जांचें कर रही है और स्वास्थ्य पर लगातार नजर रखी जा रही है। पार्टी की ओर से फिलहाल विस्तृत मेडिकल बुलेटिन जारी नहीं किया गया है, लेकिन करीबी सूत्रों का कहना है कि स्थिति नियंत्रण में है।
कार्यक्रम से पहले साझा किया था राजनीतिक संकल्प
कार्यक्रम शुरू होने से पहले अजय राय ने बुद्ध पूर्णिमा और मजदूर दिवस के अवसर पर आयोजित इस सम्मेलन को लेकर सोशल मीडिया पर संदेश साझा किया था। उन्होंने लिखा था कि उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी द्वारा गांधी भवन, लखनऊ में आयोजित ‘प्रदेश स्तरीय शिक्षक एवं चिकित्सक सम्मेलन’ राष्ट्र के निर्माता शिक्षकों और जीवन रक्षक चिकित्सकों के साथ न्यायप्रिय और समृद्ध प्रदेश के संकल्प को दोहराने का अवसर है। उन्होंने कहा था कि प्रदेश के भविष्य की नींव इन्हीं मजबूत स्तंभों पर टिकी है। लेकिन इसी कार्यक्रम के दौरान उनकी अचानक तबीयत खराब हो जाने से पूरा आयोजन स्वास्थ्य चिंता के साये में आ गया।
वाराणसी की धरती से उभरा मजबूत राजनीतिक चेहरा
Ajay Rai का राजनीतिक सफर उत्तर प्रदेश की राजनीति में काफी दिलचस्प माना जाता है। वाराणसी में जन्मे और छात्र राजनीति से निकले अजय राय ने स्थानीय स्तर पर अपनी अलग पहचान बनाई। पूर्वांचल खासकर वाराणसी क्षेत्र में उनकी जमीनी पकड़ मजबूत मानी जाती है। शुरुआती दौर में उन्होंने अपना राजनीतिक सफर Bharatiya Janata Party से शुरू किया और 90 के दशक में विधायक के रूप में उभरे। उस समय वे भाजपा के प्रभावशाली स्थानीय नेताओं में गिने जाते थे।
बीजेपी से सपा, बसपा होते हुए कांग्रेस तक का सफर
राजनीतिक परिस्थितियों के बदलने के साथ अजय राय ने भाजपा छोड़कर समाजवादी धारा की ओर रुख किया, लेकिन वहां ज्यादा समय तक नहीं टिके। इसके बाद उन्होंने बहुजन समाज पार्टी में भी काम किया। अंततः वर्ष 2012 में उन्होंने कांग्रेस का दामन थामा और तब से लगातार पार्टी के प्रमुख ब्राह्मण-पूर्वांचली चेहरे के रूप में सक्रिय रहे। कांग्रेस ने उनकी संगठनात्मक सक्रियता और पूर्वांचल में पकड़ को देखते हुए वर्ष 2023 में उन्हें उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी का अध्यक्ष बनाया।
2014 में नरेंद्र मोदी के खिलाफ लड़ चुके हैं चुनाव
अजय राय राष्ट्रीय स्तर पर उस समय ज्यादा चर्चित हुए जब उन्होंने वर्ष 2014 का लोकसभा चुनाव वाराणसी सीट से लड़ा। इस चुनाव में उनके सामने Narendra Modi जैसे राष्ट्रीय कद के नेता थे। मुकाबला बेहद हाई प्रोफाइल था, हालांकि अजय राय को इस चुनाव में करारी हार का सामना करना पड़ा। इसके बावजूद वाराणसी और पूर्वांचल में उनका स्थानीय प्रभाव बना रहा और कांग्रेस ने उन्हें लगातार एक जुझारू क्षेत्रीय चेहरे के तौर पर आगे बढ़ाया।
स्वास्थ्य बिगड़ने से कांग्रेस कार्यकर्ताओं में चिंता
अजय Rai की तबीयत खराब होने की खबर मिलते ही लखनऊ से लेकर वाराणसी तक कांग्रेस कार्यकर्ताओं में चिंता का माहौल बन गया। कई वरिष्ठ नेताओं ने अस्पताल पहुंचकर उनका हालचाल जाना, जबकि पार्टी कार्यकर्ता सोशल मीडिया पर उनके जल्द स्वस्थ होने की कामना कर रहे हैं। चूंकि हाल के महीनों में अजय राय उत्तर प्रदेश में संगठन विस्तार, जनसभाओं और विपक्षी हमलों को लेकर लगातार सक्रिय दिखाई दे रहे थे, ऐसे में अचानक आई यह स्वास्थ्य समस्या कांग्रेस के लिए चिंता का विषय मानी जा रही है।
डॉक्टरों की निगरानी में इलाज जारी
सूत्रों के अनुसार, फिलहाल अजय राय की हालत स्थिर बताई जा रही है और डॉक्टरों की निगरानी में उनका उपचार जारी है। अस्पताल प्रशासन की ओर से आवश्यक जांचें की जा रही हैं ताकि अस्वस्थता के वास्तविक कारणों का पता लगाया जा सके। उत्तर प्रदेश कांग्रेस के कई नेताओं ने समर्थकों से अफवाहों पर ध्यान न देने और आधिकारिक स्वास्थ्य अपडेट का इंतजार करने की अपील की है।














