नोएडा/गौतमबुद्ध नगर: गौतमबुद्ध नगर पुलिस कमिश्नरेट ने दिव्यांग बच्चों की सुरक्षा, संरक्षण और उनके अधिकारों की रक्षा को प्राथमिकता देते हुए “ऑपरेशन अपराजेय” नामक विशेष अभियान शुरू किया है। इस अभियान का उद्देश्य विशेष आवश्यकता वाले बच्चों को सुरक्षा प्रदान करना, उनके परिवारों तक सहायता पहुंचाना और किसी भी प्रकार की आपात स्थिति में त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित करना है।
पुलिस अधिकारियों के अनुसार यह अभियान अपर पुलिस आयुक्त (कानून एवं व्यवस्था) डॉ. राजीव नारायण मिश्र के पर्यवेक्षण में संचालित किया जा रहा है। अभियान के माध्यम से दिव्यांग बच्चों की सुरक्षा, स्वास्थ्य सहायता और सामाजिक संरक्षण को मजबूत बनाने का प्रयास किया जाएगा।
1645 बच्चों की होगी निगरानी
पुलिस कमिश्नर लक्ष्मी सिंह ने अभियान की जानकारी देते हुए बताया कि कमिश्नरेट क्षेत्र में चिन्हित 1645 विशेष आवश्यकता वाले बच्चों की नियमित निगरानी की जाएगी। प्रत्येक थाना क्षेत्र के मिशन शक्ति केंद्रों के माध्यम से बच्चों और उनके अभिभावकों का विस्तृत रिकॉर्ड तैयार किया जाएगा।
इसके साथ ही बच्चों की देखभाल करने वाले केयर टेकरों का भी पूरा विवरण संकलित किया जाएगा तथा समय-समय पर उनका सत्यापन कराया जाएगा। अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे नियमित अंतराल पर बच्चों और उनके परिवारों से संपर्क बनाए रखें।
हेल्पलाइन के माध्यम से मिलेगी सहायता
अभियान के अंतर्गत बच्चों और उनके परिजनों को 112 आपातकालीन सेवा तथा 1098 चाइल्ड हेल्पलाइन की जानकारी उपलब्ध कराई जाएगी। इसके अतिरिक्त सहायता, शिकायत और परामर्श के लिए विशेष हेल्पलाइन नंबर 8595902539 जारी किया गया है।
पुलिस का कहना है कि बच्चों और परिवारों से संबंधित सभी रिकॉर्ड गोपनीय रखे जाएंगे, ताकि उनकी निजता और सुरक्षा बनी रहे।
तैयार होगा नेबरहुड सिक्योरिटी प्लान
अभियान के तहत केवल निगरानी ही नहीं बल्कि एक व्यापक “नेबरहुड सिक्योरिटी प्लान” भी तैयार किया जाएगा। इस योजना के माध्यम से विभिन्न विभागों, स्वास्थ्य संस्थानों और सामाजिक संगठनों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने का प्रयास किया जाएगा।
योजना के अंतर्गत पुलिसकर्मियों को दिव्यांग बच्चों से जुड़े मामलों को संवेदनशीलता और व्यावहारिक दृष्टिकोण से संभालने के लिए विशेष प्रशिक्षण भी दिया जाएगा। आवश्यकता पड़ने पर बच्चों को स्वास्थ्य केंद्रों और विशेषज्ञ अस्पतालों के माध्यम से चिकित्सीय सहायता उपलब्ध कराने की व्यवस्था भी सुनिश्चित की जाएगी।
पर्दाफाश का विश्लेषण
दिव्यांग बच्चों की सुरक्षा को लेकर शुरू किया गया यह अभियान निश्चित रूप से एक सकारात्मक पहल माना जा सकता है। हालांकि इसकी सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि घोषित योजनाएं कितनी प्रभावी ढंग से धरातल पर लागू होती हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि केवल डेटा संकलन या निगरानी से आगे बढ़कर बच्चों की वास्तविक समस्याओं के समाधान, त्वरित सहायता और परिवारों के विश्वास को मजबूत करना भी उतना ही आवश्यक है। यदि पुलिस, स्वास्थ्य विभाग और सामाजिक संस्थाओं के बीच बेहतर तालमेल स्थापित होता है तो यह पहल जिले में दिव्यांग बच्चों की सुरक्षा के लिए एक मजबूत मॉडल बन सकती है।
“ऑपरेशन अपराजेय” का उद्देश्य दिव्यांग बच्चों को सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराना और उनके परिवारों को सहायता तंत्र से जोड़ना है। आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि यह अभियान कितनी प्रभावशीलता के साथ लागू होता है और वास्तव में जरूरतमंद बच्चों तक इसका लाभ कितनी तेजी से पहुंचता है।














