“टूटी सड़कें, जलभराव, सीवर, बिजली, पार्क और सुरक्षा जैसी मूलभूत समस्याओं से त्रस्त लोगों ने कहा—अब सिर्फ आश्वासन नहीं, समाधान चाहिए”
देश के सबसे आधुनिक और योजनाबद्ध शहरों में शुमार नोएडा की चमक-दमक के पीछे कुछ ऐसे इलाके भी हैं, जहां विकास के दावे आज भी धरातल पर उतरते नजर नहीं आते। ऐसा ही एक इलाका है सेक्टर-49 करीब 30 वर्ष पहले बसे इस सेक्टर के निवासी आज भी सड़क, सीवर, जल निकासी, बिजली, पार्क, सुरक्षा और बाजार जैसी बुनियादी सुविधाओं के लिए संघर्ष कर रहे हैं।
हाल ही में सेक्टर के निवासियों के बीच आयोजित एक जनसंवाद में लोगों का वर्षों का दर्द खुलकर सामने आया। निवासियों ने स्पष्ट कहा कि शिकायतों, ज्ञापनों और अधिकारियों के आश्वासनों का दौर अब बहुत लंबा चल चुका है। यदि जल्द ठोस कार्रवाई नहीं हुई तो सेक्टर के लोग शांतिपूर्ण आंदोलन और धरना-प्रदर्शन का रास्ता अपनाने के लिए मजबूर होंगे।
तीन दशक बाद भी नहीं बदली तस्वीर
निवासियों का कहना है कि सेक्टर-49 किसी नई कॉलोनी की तरह नहीं, बल्कि तीन दशक पुराना विकसित आवासीय क्षेत्र है। इसके बावजूद यहां आज भी मूलभूत सुविधाओं का अभाव है। हर वर्ष विकास योजनाओं और करोड़ों रुपये के बजट की घोषणाएं होती हैं, लेकिन सेक्टर की समस्याएं जस की तस बनी रहती हैं।
लोगों का आरोप है कि संबंधित विभागों से लेकर जनप्रतिनिधियों तक कई बार शिकायतें की गईं, लेकिन हर बार केवल आश्वासन मिला। अब लोगों का भरोसा कमजोर पड़ता जा रहा है।
बारिश बनी सबसे बड़ी परीक्षा
बरसात का मौसम आते ही सेक्टर-49 की सबसे बड़ी परेशानी जलभराव बन जाती है। हल्की बारिश में ही कई सड़कें तालाब जैसी दिखाई देने लगती हैं। नालों और सीवर की समय पर सफाई नहीं होने के कारण गंदा पानी सड़कों पर भर जाता है।
इसका असर केवल आवागमन तक सीमित नहीं रहता, बल्कि संक्रमण और मच्छरों के बढ़ते खतरे से लोगों की सेहत भी प्रभावित होती है। स्कूल जाने वाले बच्चों, नौकरीपेशा लोगों और बुजुर्गों को सबसे अधिक परेशानी उठानी पड़ती है।
जर्जर सड़कें बढ़ा रही हैं हादसों का खतरा
बैठक में सड़कों की बदहाली सबसे प्रमुख मुद्दों में रही। लोगों ने बताया कि कई मार्ग वर्षों से टूटी हालत में पड़े हैं। जगह-जगह गड्ढों के कारण वाहन चालकों को रोज दुर्घटना का डर बना रहता है।
नीतू मिश्रा ने कहा कि बाहरी गेट नंबर-3 से गेट नंबर-11 तक की सड़क पूरी तरह जर्जर हो चुकी है। इस मार्ग पर केवल पैचवर्क से काम नहीं चलेगा, बल्कि पूरी सड़क का पुनर्निर्माण किया जाना चाहिए।
‘चुनाव खत्म होते ही कोई नहीं पूछता हाल’

प्रशांत त्यागी ने कहा कि चुनाव के समय सभी जनप्रतिनिधि विकास के बड़े-बड़े वादे करते हैं और वोट मांगने घर-घर पहुंचते हैं, लेकिन चुनाव खत्म होने के बाद अगले पांच वर्षों तक सेक्टर की समस्याओं की कोई सुध नहीं ली जाती।
उन्होंने कहा कि जनता अब केवल भाषण नहीं, बल्कि जवाबदेही और परिणाम चाहती है।
छोटी जरूरत के लिए भी जाना पड़ता है दूसरे सेक्टर
पवन कुमार ने बताया कि सेक्टर-49 में ऐसा कोई बड़ा बाजार नहीं है जहां लोग रोजमर्रा का सामान आसानी से खरीद सकें। छोटी-छोटी आवश्यकताओं के लिए भी दूसरे सेक्टरों का रुख करना पड़ता है।
बुजुर्गों, महिलाओं और बिना निजी वाहन वाले परिवारों को इससे सबसे अधिक परेशानी होती है।
‘नो पावर कट जोन’ के दावों पर सवाल

नरेश थपलियाल ने बिजली व्यवस्था को लेकर नाराजगी जताते हुए कहा कि शहर को नो-पावर कट जोन कहा जाता है, लेकिन सेक्टर-49 में कई बार 8 से 9 घंटे तक बिजली आपूर्ति बाधित रहती है।
उन्होंने कहा कि लगातार शिकायतों के बावजूद कोई स्थायी समाधान नहीं निकाला गया है। बिजली कटौती का सीधा असर विद्यार्थियों, नौकरीपेशा लोगों और छोटे कारोबारियों पर पड़ता है।
पार्कों की बदहाली ने छीनी रौनक
अरुणा कश्यप ने सेक्टर के पार्कों की स्थिति पर चिंता जताते हुए कहा कि ओपन जिम के उपकरण लंबे समय से खराब पड़े हैं। बच्चों के खेलने के उपकरण भी टूट चुके हैं और नियमित रखरखाव का अभाव साफ दिखाई देता है।
उन्होंने कहा कि पार्क केवल हरियाली के लिए नहीं, बल्कि सामाजिक जीवन और स्वास्थ्य के लिए भी महत्वपूर्ण हैं। इनके रखरखाव पर विशेष ध्यान दिया जाना चाहिए।
अब आर-पार की लड़ाई का मूड
बैठक में मौजूद अधिकांश लोगों ने एक स्वर में कहा कि वे किसी नई सुविधा की मांग नहीं कर रहे हैं। उनकी मांग केवल इतनी है कि उन्हें अच्छी सड़कें, बेहतर जल निकासी, नियमित बिजली, सुरक्षित सार्वजनिक स्थान, साफ पार्क और बेहतर रखरखाव जैसी बुनियादी सुविधाएं मिलें।
निवासियों ने स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि जल्द ही समस्याओं के समाधान की दिशा में प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो सेक्टर-49 के लोग लोकतांत्रिक और शांतिपूर्ण तरीके से आंदोलन शुरू करेंगे, जिसकी पूरी जिम्मेदारी संबंधित विभागों की होगी।
पर्दाफाश सवाल
तीन दशक पुराने सेक्टर में यदि आज भी लोग बुनियादी सुविधाओं के लिए संघर्ष कर रहे हैं, तो विकास के दावों की वास्तविकता क्या है? अब निगाहें प्रशासन और संबंधित विभागों पर हैं कि वे इस जनआक्रोश को गंभीरता से लेते हैं या फिर सेक्टर-49 की आवाज एक बड़े जनआंदोलन का रूप लेती है।














