Tuesday, July 14, 2026
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एक हफ्ते में उखड़ीं नई इंटरलॉकिंग टाइलें! करोड़ों के विकास कार्यों पर उठे सवाल, वेदवन पार्क के सामने गुणवत्ता को लेकर शिकायत

“चूहों के बिल से धंस रही सड़कें, घटिया निर्माण से बढ़ रही परेशानी’; नोएडा प्राधिकरण से तकनीकी सुधार और जवाबदेही की मांग”

नोएडा: नोएडा के 7X सेक्टरों में वेदवन पार्क के सामने स्थित ग्रुप हाउसिंग सोसाइटियों—अंतरिक्ष गोल्फ व्यू-1, अंतरिक्ष गोल्फ व्यू-2, असोटेक विंडसर कोर्ट और द हाइड पार्क—के आसपास चल रहे इंटरलॉकिंग टाइलों के निर्माण एवं प्रतिस्थापन कार्यों की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। स्थानीय निवासियों ने आरोप लगाया है कि हाल ही में बिछाई गई कई इंटरलॉकिंग टाइलें महज एक सप्ताह के भीतर ही क्षतिग्रस्त और धंसने लगी हैं, जिससे निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर प्रश्नचिह्न लग गया है।

निवासियों का कहना है कि उन्होंने इस संबंध में संबंधित अधिकारियों से कई बार शिकायत और अनुवर्ती (फॉलो-अप) किया, लेकिन अब तक कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई। उनका आरोप है कि यदि वर्तमान कार्यों में गुणवत्ता सुनिश्चित नहीं की गई तो आने वाले समय में इन्हीं सड़कों की दोबारा मरम्मत करनी पड़ेगी, जिससे सार्वजनिक धन का अनावश्यक व्यय होगा।


चूहों के बिल बन रहे बड़ी समस्या, कमजोर हो रही सब-बेस

स्थानीय लोगों के अनुसार इंटरलॉकिंग टाइलों के नीचे चूहों द्वारा लगातार बिल बनाए जाने से टाइलों की सब-बेस कमजोर हो जाती है। इसके कारण टाइलें धंस जाती हैं, सतह असमान हो जाती है और कुछ ही समय बाद मरम्मत की आवश्यकता पड़ने लगती है।

निवासियों का कहना है कि यदि निर्माण के दौरान इस समस्या का स्थायी समाधान नहीं किया गया तो हर वर्ष इसी प्रकार मरम्मत पर सरकारी धन खर्च होता रहेगा। उनका मानना है कि केवल नई टाइलें बिछा देना समाधान नहीं है, बल्कि टाइलों के नीचे की संरचना को भी मजबूत बनाना उतना ही आवश्यक है।


एक सप्ताह में खराब हुई नई टाइलें, गुणवत्ता पर उठे गंभीर सवाल

क्षेत्रवासियों का दावा है कि हाल ही में जिन स्थानों पर नई इंटरलॉकिंग टाइलें लगाई गई थीं, वहां कई जगहों पर टाइलें टूटने, धंसने और उखड़ने लगी हैं। लोगों का कहना है कि इतनी जल्दी निर्माण कार्य का खराब होना इस बात का संकेत है कि या तो निर्माण सामग्री की गुणवत्ता मानकों के अनुरूप नहीं है अथवा कार्य निष्पादन में आवश्यक सावधानी नहीं बरती गई।

स्थानीय नागरिकों का कहना है कि पूर्व में भी संबंधित अधिकारियों को गुणवत्ता बनाए रखने के लिए अवगत कराया गया था, लेकिन अपेक्षित सुधार नहीं हुआ। अब लोगों ने प्राधिकरण से पूरे कार्य की तकनीकी जांच कराने तथा दोषी पाए जाने पर संबंधित एजेंसी की जवाबदेही तय करने की मांग की है।


संबंधित अधिकारियों से कई बार किया गया संपर्क

शिकायतकर्ताओं का कहना है कि उन्होंने कार्य की गुणवत्ता को लेकर WC-6 के संबंधित सिविल जूनियर इंजीनियर और प्रबंधकीय अधिकारियों से कई बार संपर्क किया, लेकिन अब तक कोई संतोषजनक प्रतिक्रिया नहीं मिली। उनका कहना है कि संभव है अधिकारी अन्य महत्वपूर्ण कार्यों में व्यस्त हों, लेकिन निर्माण कार्य की गुणवत्ता से समझौता नहीं होना चाहिए क्योंकि इसका सीधा प्रभाव हजारों नागरिकों की सुविधा और सरकारी संसाधनों पर पड़ता है।


बार-बार मरम्मत से बढ़ रहा सार्वजनिक धन का बोझ

स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि शुरुआत में ही तकनीकी मानकों के अनुरूप गुणवत्तापूर्ण निर्माण कराया जाए तो इंटरलॉकिंग टाइलें कई वर्षों तक बिना किसी बड़ी मरम्मत के चल सकती हैं। लेकिन घटिया निर्माण के कारण बार-बार रिपेयर और पुनर्निर्माण करना पड़ता है, जिससे करोड़ों रुपये का अतिरिक्त वित्तीय भार पड़ता है।

नागरिकों का कहना है कि करदाताओं के धन का उपयोग स्थायी और टिकाऊ निर्माण पर होना चाहिए, न कि हर कुछ महीनों बाद एक ही कार्य को दोहराने पर।


आधुनिक तकनीक अपनाने का दिया सुझाव

निवासियों ने प्राधिकरण को सुझाव दिया है कि भविष्य में इंटरलॉकिंग टाइलों के सभी कार्यों में आधुनिक और पर्यावरण अनुकूल तकनीकों को अनिवार्य किया जाए। उनका कहना है कि परमिएबल (Permeable) इंटरलॉकिंग पेवमेंट का उपयोग किया जाए, जिससे वर्षा जल का बेहतर भूजल पुनर्भरण हो सके।

इसके साथ ही अच्छी तरह संपीडित (Compacted) सब-बेस, जियोटेक्सटाइल अथवा जियोसेल तकनीक, चूहों की रोकथाम के लिए उपयुक्त रोडेंट बैरियर, प्रभावी जल निकासी प्रणाली तथा नियमित रोडेंट कंट्रोल और ठोस अपशिष्ट प्रबंधन को भी निर्माण प्रक्रिया का हिस्सा बनाया जाए।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इन उपायों को अपनाया जाए तो इंटरलॉकिंग टाइलों की गुणवत्ता, मजबूती और सेवा अवधि में उल्लेखनीय वृद्धि हो सकती है। साथ ही बार-बार होने वाली मरम्मत की आवश्यकता भी काफी हद तक कम हो जाएगी।


जनहित में त्वरित कार्रवाई की मांग

स्थानीय नागरिकों ने नोएडा प्राधिकरण से आग्रह किया है कि वर्तमान में चल रहे निर्माण कार्यों की स्वतंत्र तकनीकी जांच कराई जाए तथा संबंधित ठेकेदार को निर्धारित गुणवत्ता मानकों के अनुरूप कार्य करने के स्पष्ट निर्देश दिए जाएं। उनका कहना है कि यदि अभी सुधार नहीं किया गया तो भविष्य में पुनः नए वर्क ऑर्डर जारी करने पड़ेंगे, जो सरकारी धन के अनावश्यक दुरुपयोग का कारण बनेंगे।

क्षेत्रवासियों ने उम्मीद जताई है कि जनहित, निर्माण गुणवत्ता और दीर्घकालिक टिकाऊ विकास को ध्यान में रखते हुए प्राधिकरण इस शिकायत को गंभीरता से लेते हुए आवश्यक कार्रवाई करेगा, ताकि नागरिकों को सुरक्षित, मजबूत और लंबे समय तक टिकने वाला आधारभूत ढांचा उपलब्ध हो सके।

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VIKAS TRIPATHI
VIKAS TRIPATHIhttp://www.pardaphaas.com
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