भारत और अमेरिका के रिश्तों में जम्मू-कश्मीर को लेकर एक अहम बदलाव के संकेत मिले हैं। अमेरिका के भारत में राजदूत सर्जियो गोर ने पहली बार श्रीनगर का दौरा किया और मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला से मुलाकात की। दौरे के बाद गोर ने कश्मीर की खूबसूरती की तारीफ करते हुए कहा कि जम्मू-कश्मीर भारत का अहम हिस्सा है।
30 साल में अमेरिकी राजदूतों के कश्मीर दौरे क्यों रहे चर्चा में?
श्रीनगर में किसी अमेरिकी राजदूत का दौरा हमेशा कूटनीतिक नजरिए से महत्वपूर्ण माना जाता रहा है। इसकी वजह भारत-पाकिस्तान संबंधों के साथ-साथ कश्मीर की सुरक्षा और अलगाववादी राजनीति से जुड़ी संवेदनशीलता है।
1995 में अमेरिकी राजदूत फ्रैंक विस्नर ने श्रीनगर का दौरा किया था। उन्होंने सरकारी अधिकारियों और मुख्यधारा के नेताओं के साथ-साथ अलगाववादी नेताओं, छात्रों, पत्रकारों और अन्य प्रतिनिधियों से भी मुलाकात की थी। उस समय उनका दौरा काफी विवादित रहा था।
इसके बाद अमेरिकी नीति में धीरे-धीरे बदलाव देखने को मिला।
9/11 के बाद बदली अमेरिकी प्राथमिकता
2001 के 9/11 आतंकी हमलों के बाद अमेरिका की विदेश और सुरक्षा नीति में आतंकवाद का मुद्दा बेहद महत्वपूर्ण हो गया। 2002 में अमेरिकी राजदूत रॉबर्ट ब्लैकविल ने जम्मू-कश्मीर का दौरा किया। उन्होंने सुरक्षा स्थिति का जायजा लिया, लेकिन अलगाववादी नेताओं से मुलाकात नहीं की।
इसके बाद टिमोथी रोमर ने 2011 में जम्मू-कश्मीर का दौरा किया और तत्कालीन मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला से मुलाकात की।
2019 में अनुच्छेद 370 से जुड़े संवैधानिक बदलावों के बाद जनवरी 2020 में अमेरिकी राजदूत केनेथ जस्टर भी विदेशी राजनयिकों के प्रतिनिधिमंडल के साथ जम्मू-कश्मीर पहुंचे थे।
सर्जियो गोर के बयान ने खींचा ध्यान
सर्जियो गोर का मौजूदा दौरा इसलिए खास है क्योंकि उन्होंने श्रीनगर में कश्मीर की स्थिति पर किसी मध्यस्थता या भारत-पाकिस्तान विवाद के समाधान की पेशकश नहीं की। इसके बजाय उन्होंने जम्मू-कश्मीर को भारत का अहम हिस्सा बताया और भारत-अमेरिका संबंधों को आगे बढ़ाने की बात कही।
गोर ने कहा कि श्रीनगर बेहद खूबसूरत है और वह पहली बार यहां आकर उत्साहित हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला के साथ हुई बैठक को भी सकारात्मक बताया।
पाकिस्तान को क्यों हुई आपत्ति?
अमेरिकी राजदूत के बयान के बाद पाकिस्तान की ओर से नाराजगी सामने आई। कश्मीर को लेकर पाकिस्तान लंबे समय से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी अलग स्थिति रखता रहा है।
ऐसे में श्रीनगर में अमेरिकी राजदूत का भारत के साथ कश्मीर के संबंध को लेकर स्पष्ट बयान इस्लामाबाद के लिए कूटनीतिक झटका माना जा रहा है।
भारत-अमेरिका संबंधों का नया दौर
आज भारत और अमेरिका के संबंध केवल दक्षिण एशिया की राजनीति तक सीमित नहीं हैं। दोनों देशों के बीच रक्षा, आतंकवाद-रोधी सहयोग, टेक्नोलॉजी, व्यापार और महत्वपूर्ण खनिजों जैसे कई क्षेत्रों में साझेदारी बढ़ रही है।
यही वजह है कि सर्जियो गोर का श्रीनगर दौरा सिर्फ एक राजनयिक यात्रा नहीं, बल्कि बदलते भारत-अमेरिका संबंधों और कश्मीर पर अमेरिकी दृष्टिकोण में बदलाव का संकेत भी माना जा रहा है।
तीन दशकों में अमेरिकी राजदूतों के कश्मीर दौरों की तुलना करें तो एक बदलाव साफ दिखाई देता है—जहां 1990 के दशक में अमेरिकी राजनयिक अलगाववादी समूहों से संपर्क को लेकर चर्चा में रहे, वहीं अब अमेरिकी राजदूत का जोर भारत-अमेरिका रणनीतिक साझेदारी और आतंकवाद-रोधी सहयोग पर दिखाई देता है।














