वॉशिंगटन: अमेरिका में 2026 के मिडटर्म चुनाव से पहले चुनावी प्रक्रिया और वोटर लिस्ट को लेकर बहस तेज हो गई है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत की चुनावी व्यवस्था और फोटो पहचान पत्र की व्यवस्था की तारीफ करते हुए अमेरिका में भी मतदाता पात्रता की सख्त जांच की वकालत की है।
ट्रंप का फोकस खास तौर पर इस बात पर है कि अमेरिकी चुनावों में केवल पात्र अमेरिकी नागरिक ही मतदान करें। इसी मुद्दे को लेकर वह कांग्रेस से SAVE America Act पारित करने की मांग कर रहे हैं। प्रस्तावित कानून में संघीय चुनावों के लिए मतदाता पंजीकरण के समय नागरिकता का दस्तावेजी प्रमाण और पहचान संबंधी आवश्यकताओं को मजबूत करने का प्रावधान है।
भारत के SIR से अमेरिका की तुलना क्यों?
भारत में Special Intensive Revision यानी SIR के तहत मतदाता सूची का विस्तृत पुनरीक्षण किया जाता है। इसमें मतदाता सूची को अपडेट करने, पात्र मतदाताओं की पहचान सुनिश्चित करने और गलत या अपात्र प्रविष्टियों पर कार्रवाई जैसी प्रक्रियाएं शामिल होती हैं।
अमेरिका में ट्रंप की मौजूदा मांग बिल्कुल उसी प्रक्रिया की कॉपी नहीं है। हालांकि, दोनों बहसों में वोटर लिस्ट की जांच, मतदाता पात्रता और पहचान सत्यापन जैसे मुद्दे समान दिखाई देते हैं।
यही वजह है कि अमेरिकी चुनावी बहस में भारत के SIR और वोटर-ID मॉडल का जिक्र हो रहा है।
ट्रंप का 24 हजार गैर-नागरिक मतदाताओं को लेकर दावा
ट्रंप ने हालिया बयान में दावा किया है कि 2020 के वोटर रिकॉर्ड और नागरिकता संबंधी रिकॉर्ड के मिलान में 24,000 से अधिक ऐसे लोगों की पहचान हुई है, जिन्हें वह गैर-नागरिक मतदाता बता रहे हैं। उन्होंने कहा है कि रिकॉर्ड की समीक्षा अभी पूरी नहीं हुई है और आगे यह संख्या बढ़ सकती है।
हालांकि, इस आंकड़े को ट्रंप के दावे के तौर पर ही देखना जरूरी है। गैर-नागरिकों का संघीय चुनावों में मतदान अमेरिकी कानून के तहत पहले से प्रतिबंधित है। इसलिए असली राजनीतिक सवाल यह है कि ऐसे मामलों की पहचान और रोकथाम के लिए किस तरह की सत्यापन व्यवस्था अपनाई जाए।
SAVE America Act क्या है?
ट्रंप जिस SAVE America Act की पैरवी कर रहे हैं, उसका आधिकारिक उद्देश्य संघीय चुनावों में मतदाता पात्रता को मजबूत करना है।
प्रस्ताव में अमेरिकी नागरिकता का दस्तावेजी प्रमाण, पहचान संबंधी आवश्यकताओं और वोटर रोल से गैर-नागरिकों को हटाने की व्यवस्था को मजबूत करने की बात कही गई है।
ट्रंप प्रशासन पहले ही नागरिकता सत्यापन को मजबूत करने के लिए कार्यकारी आदेश जारी कर चुका है। मार्च 2026 के आदेश में संघीय चुनावों के लिए नागरिकता सत्यापन और राज्यवार नागरिकता सूचियां तैयार करने की प्रक्रिया को बढ़ावा दिया गया।
मिडटर्म चुनाव से पहले क्यों अहम है मुद्दा?
अमेरिका में अगला नियमित संघीय आम चुनाव 3 नवंबर 2026 को होना है। इसमें कांग्रेस के लिए चुनाव होंगे और सत्ता के संतुलन पर इसका सीधा असर पड़ सकता है।
ऐसे समय में वोटर लिस्ट, पहचान और नागरिकता सत्यापन का मुद्दा राजनीतिक रूप से बेहद संवेदनशील बन गया है।
ट्रंप समर्थक इसे चुनाव की विश्वसनीयता और सुरक्षा से जोड़ रहे हैं, जबकि विरोधियों और कुछ विशेषज्ञों की चिंता है कि बहुत सख्त सत्यापन प्रक्रिया से पात्र मतदाताओं को भी वोटर लिस्ट से गलत तरीके से हटाए जाने का खतरा पैदा हो सकता है। जून 2026 में एक संघीय जज ने नागरिकता जांच से जुड़े एक संघीय डेटाबेस के इस्तेमाल पर रोक लगाते हुए गलत तरीके से मतदाताओं के हटाए जाने की आशंका का हवाला दिया था।
क्या अमेरिका में भारत जैसा SIR लागू होने जा रहा है?
फिलहाल इसे भारत के SIR की हूबहू अमेरिकी कॉपी कहना सही नहीं होगा।
अमेरिका में ट्रंप जिस व्यवस्था की मांग कर रहे हैं, उसमें नागरिकता का प्रमाण, फोटो ID और वोटर रोल की जांच जैसे उपाय शामिल हैं। भारत के SIR की तरह मतदाता सूची के व्यापक पुनरीक्षण से इसकी तुलना जरूर की जा रही है, लेकिन दोनों देशों की चुनावी व्यवस्थाएं और कानूनी ढांचे अलग हैं।
इसलिए बड़ा सवाल यह नहीं है कि “अमेरिका में SIR लागू होगा या नहीं?”, बल्कि यह है कि 2026 के चुनाव से पहले ट्रंप प्रशासन अमेरिकी वोटर लिस्ट और मतदाता पात्रता की जांच को कितना सख्त करता है—और इसका चुनावी राजनीति पर क्या असर पड़ता है।














