तमिलनाडु की राजनीति में वह करिश्मा हो गया जिसकी चर्चा वर्षों से केवल अटकलों में होती थी। सिनेमा के पर्दे पर जनता के नायक बनकर उभरे सुपरस्टार Vijay ने अब वास्तविक राजनीति के मंच पर भी वही ‘विजय’ हासिल कर ली है। 2026 तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में उनकी पार्टी Tamilaga Vettri Kazhagam (TVK) ने ऐसा अप्रत्याशित प्रदर्शन किया कि सत्ता पर वर्षों से बारी-बारी से काबिज दो दिग्गज दल—M. K. Stalin की DMK और AIADMK—दोनों हाशिए पर जाते दिखे। शुरुआती और दोपहर बाद के रुझानों ने साफ संकेत दे दिया कि TVK राज्य की सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभर रही है और तमिलनाडु की राजनीति में तीसरे विकल्प की जो चर्चा दशकों से अधूरी थी, उसे विजय ने जमीन पर उतार दिया है।
रजनीकांत और कमल हासन जहां ठिठके, वहां विजय ने पूरी बाजी पलट दी
तमिलनाडु की राजनीति में फिल्मी सितारों का प्रभाव नया नहीं है। रजनीकांत और कमल हासन जैसे बड़े नाम भी राजनीति में उतरे, लेकिन जनता के वोट को व्यापक सत्ता समर्थन में नहीं बदल सके। विजय ने यहां सबसे बड़ा रणनीतिक अंतर यह रखा कि उन्होंने राजनीति को ‘साइड प्रोजेक्ट’ नहीं बनाया। फिल्मों से लगभग विदाई लेकर उन्होंने खुद को पूरी तरह जनता के बीच उतार दिया। गांव-गांव पदयात्रा, युवाओं से सीधा संवाद, महिलाओं से भावनात्मक अपील और DMK-AIADMK की ‘बारी-बारी सत्ता’ पर लगातार हमला—इन सबने विजय को महज स्टार नहीं बल्कि विकल्प के रूप में स्थापित कर दिया।
52 साल का चेहरा, युवाओं का सबसे बड़ा भरोसा
महज 52 वर्षीय विजय तमिल सिनेमा के उन सुपरस्टार्स में गिने जाते हैं जिनकी फैन फॉलोइंग गांव से महानगर तक फैली हुई है। बाल कलाकार के रूप में करियर शुरू करने वाले विजय ने दशकों तक एक ऐसे फिल्मी नायक की छवि बनाई जो अन्याय के खिलाफ खड़ा होता है और अंत में व्यवस्था बदल देता है। यही छवि उन्होंने चुनावी मंच पर भी इस्तेमाल की। उनकी सभाओं में सबसे ज्यादा भीड़ युवाओं और पहली बार वोट डालने वालों की दिखी। सोशल मीडिया पर विजय की रैलियां फिल्मी ट्रेलर की तरह वायरल होती रहीं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि TVK की सफलता के पीछे सबसे बड़ा फैक्टर “युवा असंतोष + स्टार करिश्मा + एंटी-इंकम्बेंसी” का मिश्रण रहा।
DMK-AIADMK पर ‘झूठे वादों’ का हमला, खुद खोला मुफ्त घोषणाओं का खजाना
विजय ने चुनाव प्रचार के दौरान लगातार कहा कि DMK और AIADMK ने तमिलनाडु को दशकों तक सिर्फ वादों और परिवारवाद के भरोसे चलाया। लेकिन दिलचस्प यह है कि जनता को लुभाने के लिए उन्होंने खुद भी वादों की ऐसी लंबी फेहरिस्त पेश की जिसने चुनाव को पूरी तरह कल्याणकारी प्रतिस्पर्धा में बदल दिया। TVK ने हर परिवार को 25 लाख रुपये तक हेल्थ इंश्योरेंस, 60 साल तक की महिलाओं को 2500 रुपये मासिक सहायता, साल में 6 मुफ्त सिलेंडर, शादी के लिए सोना और साड़ी, महिलाओं के लिए मुफ्त बस यात्रा, बेरोजगार युवाओं को 4000 रुपये, 5 लाख सरकारी नौकरियां, 5 लाख पेड इंटर्नशिप, किसानों का 50 फीसदी कर्ज माफ और 200 यूनिट मुफ्त बिजली जैसे वादे किए।
इन वादों ने खासकर निम्न मध्यमवर्ग, महिलाओं, बेरोजगार युवाओं और ग्रामीण वोटरों को TVK की ओर तेजी से खींचा। विजय ने यह संदेश देने में सफलता पाई कि उनकी पार्टी ‘नई है लेकिन देने में पीछे नहीं।’
हर वर्ग से भावुक कनेक्ट: ‘TVK को वोट मतलब अपने परिवार को वोट’
चुनाव अभियान के दौरान विजय का सबसे चर्चित संवाद था—“TVK उम्मीदवार को वोट देना मतलब अपने परिवार के सदस्य को सत्ता में भेजना।” यह लाइन तमिलनाडु के गांवों में बेहद असरदार साबित हुई। उन्होंने महिलाओं, किसानों, मछुआरों, मिल मजदूरों, बुनकरों, आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं, स्टार्टअप युवाओं और छात्रों के लिए अलग-अलग पैकेज पेश किए। विजय की टीम ने यह सुनिश्चित किया कि उनकी हर रैली में स्थानीय मुद्दे उठें, जिससे लोगों को लगा कि यह सिर्फ फिल्मी भाषण नहीं बल्कि सीधे उनके जीवन से जुड़ी राजनीति है।
गठबंधन नहीं, सीधी लड़ाई: ‘तीसरा विकल्प’ की मुनादी सफल
जहां तमिलनाडु की राजनीति परंपरागत रूप से गठबंधनों के सहारे चलती रही है, विजय ने चुनाव से पहले ही साफ कर दिया था कि वह किसी भी बड़े दल के साथ समझौता नहीं करेंगे। यह दांव जोखिम भरा था, लेकिन इसी ने उन्हें ‘सिस्टम से अलग’ चेहरा बना दिया। जनता को लगा कि TVK वास्तव में DMK-AIADMK के खिलाफ स्वतंत्र विकल्प है, कोई छिपा हुआ सहयोगी नहीं। यही वजह रही कि शहरी शिक्षित वोटर से लेकर ग्रामीण गरीब तबके तक विजय को “एक मौका” देने के मूड में दिखे।
तमिलनाडु की सिनेमा-पॉलिटिक्स परंपरा को फिर मिला नया उत्तराधिकारी
तमिलनाडु का इतिहास गवाह है कि यहां सिनेमा और सत्ता का रिश्ता बेहद गहरा रहा है। M. G. Ramachandran, J. Jayalalithaa और M. Karunanidhi ने इसी परंपरा को मजबूत किया था। लेकिन लंबे समय बाद किसी फिल्म स्टार ने जनता के भीतर वैसी राजनीतिक ऊर्जा पैदा की है। विजय ने खुद को सिर्फ अभिनेता नहीं बल्कि परिवर्तनकारी चेहरा साबित किया है।
अब असली परीक्षा: क्या वादे निभा पाएंगे ‘थलपति’?
चुनावी जीत ने विजय को तमिलनाडु का नया राजनीतिक केंद्र बना दिया है, लेकिन असली चुनौती अब शुरू होगी। मुफ्त योजनाओं, रोजगार, AI City, AI Ministry, किसानों की राहत, महिलाओं की सहायता और युवाओं के अवसर जैसे वादों को जमीन पर उतारना आसान नहीं होगा। जनता ने उन्हें DMK और AIADMK से ऊबकर मौका दिया है; अगर वे डिलीवर करते हैं तो तमिलनाडु की राजनीति में लंबी पारी खेल सकते हैं, लेकिन अगर वादे हवा साबित हुए तो यही जनादेश सबसे बड़ा दबाव बन जाएगा।
तमिलनाडु ने चुना नया नायक
फिलहाल इतना तय है कि 2026 का तमिलनाडु चुनाव सिर्फ सत्ता परिवर्तन नहीं बल्कि राजनीतिक कथा परिवर्तन है। दशकों से DMK और AIADMK के बीच घूमती राजनीति में अब तीसरा अध्याय खुल चुका है—और उसका नाम है ‘विजय’। जिस अभिनेता ने पर्दे पर विलेन को हराकर इंकलाब लाने का अभिनय किया, उसने अब असली सियासत में भी वही पटकथा लिखनी शुरू कर दी है।














