‘महाराष्ट्र में अपराधियों को कानून का डर नहीं’, सीएम से मांगी माफी; पुणे की सड़कों पर उबाल, विपक्ष ने कानून-व्यवस्था पर खोला मोर्चा
मुंबई/पुणे,: पुणे जिले के नसरापुर में चार वर्षीय मासूम बच्ची के साथ दुष्कर्म और निर्मम हत्या की दिल दहला देने वाली घटना ने पूरे महाराष्ट्र को झकझोर दिया है। 65 वर्षीय आरोपी की गिरफ्तारी के बावजूद जनाक्रोश थमने का नाम नहीं ले रहा। गांव से लेकर पुणे-बेंगलुरु हाईवे तक विरोध प्रदर्शनों की आग भड़क उठी है, वहीं अब इस जघन्य वारदात ने राज्य की राजनीति को भी गरमा दिया है।
इसी बीच संजय राउत ने महाराष्ट्र सरकार और मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि यह घटना केवल एक आपराधिक वारदात नहीं, बल्कि राज्य की ध्वस्त होती कानून-व्यवस्था का खुला प्रमाण है।
“इस हत्या के लिए अगर कोई जिम्मेदार है, तो सरकार जिम्मेदार है”
संजय राउत ने मीडिया से बातचीत में कहा कि महाराष्ट्र में महिलाओं और मासूम बच्चियों के खिलाफ अपराध लगातार बढ़ रहे हैं और अपराधियों में अब कानून का कोई भय नहीं बचा है।
उन्होंने कहा—
“यह कोई पहली घटना नहीं है। जब से यह सरकार सत्ता में आई है, महाराष्ट्र की कानून-व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है। अपराधी बेखौफ हैं, जनता असुरक्षित है और सरकार राजनीतिक प्रचार में व्यस्त है।”
राउत ने साफ शब्दों में कहा कि इस घटना की नैतिक जिम्मेदारी राज्य सरकार को लेनी चाहिए और मुख्यमंत्री को जनता से माफी मांगनी चाहिए।
फडणवीस पर सीधा निशाना — “महाराष्ट्र छोड़ चुनावी राज्यों में व्यस्त हैं मुख्यमंत्री”
संजय राउत ने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, जो राज्य के गृह मंत्री भी हैं, महाराष्ट्र की आंतरिक सुरक्षा छोड़कर दूसरे राज्यों के चुनावी प्रचार में अधिक सक्रिय हैं।
राउत ने कहा—मुख्यमंत्री कभी केरल,कभी तमिलनाडु,कभी असम,तो कभी पश्चिम बंगाल के चुनावी दौरों में व्यस्त रहते हैं। ऐसे में सवाल यह है कि महाराष्ट्र में बिगड़ती कानून-व्यवस्था को कौन संभालेगा? उनका कहना था कि वीआईपी सुरक्षा, राजनीतिक प्रबंधन और चुनावी रणनीति में उलझी सरकार को अब आम नागरिकों की सुरक्षा का हिसाब देना होगा।
पुणे की सड़कों पर गुस्सा, हाईवे जाम, पुलिस को करना पड़ा बल प्रयोग
घटना के बाद नसरापुर और भोर क्षेत्र में हजारों लोग सड़कों पर उतर आए। पुणे-बेंगलुरु हाईवे घंटों जाम रहा। लोगों ने आरोपी को फांसी देने और सरकार से जवाब मांगने की मांग की। हालात इतने तनावपूर्ण हो गए कि पुलिस को भीड़ हटाने के लिए हल्का लाठीचार्ज करना पड़ा।
सोशल मीडिया पर भी व्यापक आक्रोश देखने को मिला। कई प्लेटफॉर्म्स पर लोगों ने सवाल उठाया कि बार-बार ऐसे जघन्य अपराध होने के बावजूद सख्त निवारक व्यवस्था क्यों नहीं बन पा रही। कुछ चर्चाओं में सीधी मांग उठी कि मासूमों के साथ बलात्कार और हत्या के मामलों में त्वरित और कठोर दंड व्यवस्था लागू की जाए।
सरकार ने क्या कहा?
मुख्यमंत्री Devendra Fadnavis ने घटना को “अत्यंत निंदनीय और दर्दनाक” बताते हुए कहा है कि आरोपी को गिरफ्तार कर लिया गया है और सरकार इस मामले में फास्ट ट्रैक कोर्ट में सुनवाई कराएगी। राज्य सरकार ने अदालत में आरोपी के लिए मृत्युदंड की मांग करने की भी बात कही है।
पुलिस के अनुसार 65 वर्षीय आरोपी ने बच्ची को खाने का लालच देकर एक शेड में ले जाकर दुष्कर्म किया और फिर हत्या कर दी। आरोपी के खिलाफ पहले भी गंभीर आपराधिक मामले दर्ज होने की बात सामने आई है।
विपक्ष का सवाल — गिरफ्तारी काफी है या जवाबदेही भी तय होगी?
संजय राउत ने पुलिस कार्रवाई पर भी प्रश्न उठाया। उनका कहना है कि:
जनता पर लाठीचार्ज क्यों हुआ?
पहले से निगरानी तंत्र क्यों विफल रहा?
क्या प्रशासन को आरोपी के पुराने रिकॉर्ड की जानकारी नहीं थी?
महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा के लिए सरकार का रोडमैप क्या है?
उन्होंने विपक्षी दलों और नागरिक समाज से इस मुद्दे पर सड़क से सदन तक लड़ाई लड़ने की अपील की।
महाराष्ट्र में महिलाओं की सुरक्षा फिर राष्ट्रीय बहस के केंद्र में
पुणे की यह घटना सिर्फ एक जिले का अपराध नहीं रही—इसने पूरे महाराष्ट्र में महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा पर गंभीर बहस छेड़ दी है। विपक्ष इसे कानून-व्यवस्था की विफलता बता रहा है, जबकि सरकार त्वरित न्याय और कठोर सजा का भरोसा दे रही है।
लेकिन जनता का सवाल अभी भी वही है—
गिरफ्तारी तो हो गई…
पर क्या मासूम की मौत के बाद भी व्यवस्था नहीं बदलेगी?
नसरापुर की मासूम के साथ हुई हैवानियत ने महाराष्ट्र की राजनीति को झकझोर दिया है। संजय राउत के तीखे हमले ने इस मामले को केवल अपराध की घटना नहीं रहने दिया, बल्कि इसे सरकार की जवाबदेही और कानून-व्यवस्था की परीक्षा बना दिया है।
अब निगाहें दो चीजों पर टिकी हैं—
क्या आरोपी को सचमुच त्वरित और कठोर सजा मिलेगी?
और क्या सरकार जनता के गुस्से का राजनीतिक जवाब दे पाएगी?














