Wednesday, May 6, 2026
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बिहार NDA में फिर नीतीश की चली! सम्राट कैबिनेट में JDU के 12 मंत्री लगभग तय, बेटे निशांत कुमार की एंट्री से सियासी भूचाल

बिहार की राजनीति में सत्ता परिवर्तन के बाद अब सबसे बड़ी हलचल सम्राट चौधरी मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर मची हुई है। मुख्यमंत्री Samrat Choudhary के नेतृत्व वाली नई NDA सरकार में अब Janata Dal (United) अपना पूरा राजनीतिक वजन दिखाने जा रही है। सूत्रों के मुताबिक, पूर्व मुख्यमंत्री Nitish Kumar के आवास पर हुई हाईलेवल बैठक में JDU कोटे से 12 विधायकों को मंत्री बनाने पर लगभग सहमति बन गई है, जबकि औपचारिक घोषणा अब सिर्फ समय की बात मानी जा रही है। बिहार में सम्राट चौधरी के मुख्यमंत्री बनने के बाद भी JDU की बराबर हिस्सेदारी बनाए रखने का फार्मूला पहले ही तय हो चुका था और मौजूदा संकेत बताते हैं कि NDA सरकार में BJP और JDU के बीच 16-16 पदों का संतुलन रखा जाएगा।

सबसे बड़ी और सबसे चौंकाने वाली चर्चा जिस नाम को लेकर है, वह है Nishant Kumar। जेडीयू की संभावित सूची में नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार का नाम शामिल होना बिहार की राजनीति में एक नए अध्याय की शुरुआत माना जा रहा है। हाल ही में निशांत ने अपनी पहली राजनीतिक यात्रा शुरू की है और पार्टी के अंदर उन्हें सक्रिय भूमिका देने की कवायद तेज हुई है। ऐसे में अगर निशांत सीधे मंत्री बनते हैं, तो यह सिर्फ कैबिनेट विस्तार नहीं बल्कि नीतीश कुमार की राजनीतिक विरासत के औपचारिक ट्रांसफर का संकेत होगा।

नीतीश आवास पर बनी फाइनल सूची, इन 12 नामों पर मुहर की चर्चा

सूत्र बताते हैं कि जेडीयू के कार्यकारी अध्यक्ष Sanjay Kumar Jha और केंद्रीय मंत्री Lalan Singh ने संभावित मंत्रियों की सूची तैयार कर पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को सौंप दी है। इस सूची में जिन नामों की सबसे ज्यादा चर्चा है, उनमें—

1.निशांत कुमार

2.श्रवण कुमार

3.अशोक चौधरी

4.लेसी सिंह

5.शीला मंडल

6.मदन सहनी

7.सुनील कुमार

8.रत्नेश सदा

9.जमा खान

10.बुलो मंडल

11.भगवान सिंह कुशवाहा

12.दामोदर रावत

शामिल बताए जा रहे हैं।

इनमें श्रवण कुमार, Ashok Choudhary, Leshi Singh, मदन सहनी, जमा खान और सुनील कुमार पहले भी नीतीश सरकार में मंत्री रह चुके हैं। यानी सम्राट कैबिनेट में भी पुराने भरोसेमंद चेहरों को रिपीट करने का फॉर्मूला अपनाया जा रहा है।

नए चेहरों से सामाजिक समीकरण साधने की तैयारी

दूसरी ओर, शीला मंडल, निशांत कुमार, दामोदर रावत, बुलो मंडल जैसे नाम नए सामाजिक संदेश के रूप में देखे जा रहे हैं। जेडीयू की कोशिश है कि अति पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक, महिला और सवर्ण—सभी वर्गों को कैबिनेट में संतुलित प्रतिनिधित्व दिया जाए ताकि 2027 की राजनीतिक जमीन अभी से मजबूत की जा सके।

विशेषज्ञ मानते हैं कि यह विस्तार सिर्फ प्रशासनिक नहीं बल्कि सामाजिक इंजीनियरिंग प्लस उत्तराधिकार इंजीनियरिंग दोनों का मिश्रण है।

सम्राट मुख्यमंत्री, लेकिन रिमोट अब भी नीतीश के पास?

हालांकि बिहार में चेहरा बदल गया है और सम्राट चौधरी मुख्यमंत्री बन चुके हैं, लेकिन कैबिनेट विस्तार की पूरी पटकथा अब भी नीतीश कुमार आवास से लिखी जा रही है—ऐसा राजनीतिक गलियारों में खुलकर कहा जा रहा है। सम्राट सरकार ने सत्ता संभालने के बाद निरंतरता बनाए रखने के संकेत दिए हैं, वहीं जेडीयू ने साफ कर दिया है कि NDA में उसकी भूमिका सिर्फ सहयोगी की नहीं, बराबर के शक्ति केंद्र की है।

राजनीतिक जानकारों का कहना है कि मंत्रिमंडल में जेडीयू के 12 नाम फाइनल होना इस बात का प्रमाण है कि—

“CM सम्राट हैं, लेकिन कैबिनेट की आत्मा अब भी नीतीश मॉडल से चलेगी।”

BJP-JDU बराबर, चिराग को दो, मांझी-कुशवाहा को एक-एक

मौजूदा फार्मूले के मुताबिक:

BJP के पास 16 मंत्री पद

JDU के पास 16 मंत्री पद

Lok Janshakti Party (Ram Vilas) को 2 पद

Hindustani Awam Morcha को 1 पद

Rashtriya Lok Morcha को 1 पद

रहने की चर्चा है। फिलहाल सम्राट चौधरी कई विभाग अपने पास रखे हुए हैं और विस्तार के बाद बड़े पैमाने पर विभागों का बंटवारा होगा।

निशांत कुमार को मिल सकता है बड़ा विभाग, बिहार में ‘उत्तराधिकारी मॉडल’ शुरू?

सबसे ज्यादा निगाहें निशांत कुमार पर हैं। अगर उन्हें मंत्री पद के साथ कोई प्रभावशाली विभाग मिलता है, तो यह बिहार की राजनीति में संदेश देगा कि नीतीश कुमार अब धीरे-धीरे अपनी राजनीतिक विरासत को संस्थागत रूप दे रहे हैं। NDA के भीतर भी यह कदम कई नए समीकरण बनाएगा, क्योंकि इससे जेडीयू का भविष्य नेतृत्व स्पष्ट होने लगेगा।

सोशल मीडिया और राजनीतिक मंचों पर पहले से ही “परिवारवाद बनाम उत्तराधिकार” की बहस तेज है और लोग इसे जेडीयू के अगले चरण की तैयारी मान रहे हैं।

गुरुवार का शपथग्रहण बना बिहार की सबसे बड़ी सियासी परीक्षा

अब सबकी नजर गुरुवार को होने वाले संभावित शपथ ग्रहण पर है। अगर इन नामों पर अंतिम मुहर लगती है तो बिहार की राजनीति में तीन बड़े संदेश जाएंगे—

1.सम्राट चौधरी सरकार में भी नीतीश कुमार की पकड़ ढीली नहीं हुई

2.JDU ने NDA में अपनी बराबरी की ताकत साबित कर दी

3.निशांत कुमार की एंट्री से बिहार में उत्तराधिकार की राजनीति आधिकारिक रूप से शुरू हो गई

यानी बिहार में सिर्फ कैबिनेट विस्तार नहीं होने जा रहा—
यह NDA के अंदर असली शक्ति संतुलन का सार्वजनिक प्रदर्शन होने वाला है।

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VIKAS TRIPATHIhttp://www.pardaphaas.com
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