“निर्माणाधीन मकान में खेलते समय हुआ दर्दनाक हादसा, जबड़े की हड्डी और दांत टूटे, खून की नसें भी फटीं”
एटा। सकीट क्षेत्र के बावली गांव में निर्माणाधीन मकान में खेलना एक छह वर्षीय मासूम के लिए जिंदगी का सबसे भयावह हादसा बन गया। खेलते समय अचानक गिरने से लोहे की सरिया बच्चे के मुंह और गले के आर-पार हो गई। हादसा इतना गंभीर था कि कुछ पल के लिए मौके पर मौजूद लोगों के होश उड़ गए। खून से लथपथ मासूम प्रबल दर्द से तड़पता रहा और परिजन उसे बचाने के लिए बदहवास हालत में अस्पताल लेकर दौड़े।
गंभीर रूप से घायल प्रबल को प्राथमिक उपचार के बाद एटा मेडिकल कॉलेज ले जाया गया, लेकिन उसकी नाजुक हालत और चोटों की जटिलता को देखते हुए उसे आगे के उपचार के लिए निजी अस्पताल रेफर किया गया। इसके बाद प्रसिद्ध सर्जन डॉ. हिमांशु उपाध्याय की टीम ने बच्चे का उपचार अपने हाथ में लिया। चिकित्सकों के सामने चुनौती केवल सरिया निकालने की नहीं थी, बल्कि इस दौरान बच्चे की जान बचाने और क्षतिग्रस्त रक्त वाहिकाओं, हड्डियों तथा मुंह के अंदर हुए गंभीर नुकसान को संभालने की भी थी।
सरिया निकालना बना सबसे बड़ी चुनौती
चिकित्सकों के अनुसार, सरिया जिस तरह बच्चे के मुंह और गले के आर-पार हुई थी, उसमें मामूली लापरवाही भी जानलेवा साबित हो सकती थी। शरीर के इस हिस्से में महत्वपूर्ण रक्त वाहिकाएं और कई संवेदनशील संरचनाएं होती हैं। ऐसे में सरिया को सीधे खींचकर निकालना बेहद जोखिम भरा हो सकता था।
इसी चुनौती के बीच डॉक्टरों की टीम ने पूरी सावधानी और विशेषज्ञता के साथ ऑपरेशन की तैयारी की। सर्जरी के दौरान बच्चे की स्थिति पर लगातार नजर रखी गई और बेहद नियंत्रित तरीके से सरिया को बाहर निकाला गया। ऑपरेशन के दौरान चिकित्सकों की टीम के सामने सबसे बड़ी प्राथमिकता मासूम की जान बचाना और रक्तस्राव को नियंत्रित करना था।
टूटे जबड़े और दांतों के साथ फटी थीं खून की नसें
हादसे में प्रबल के जबड़े की हड्डी को गंभीर चोट पहुंची और उसके कई दांत भी टूट गए। इसके अलावा चोट के कारण रक्त वाहिकाओं को भी नुकसान पहुंचा, जिससे अत्यधिक रक्तस्राव का खतरा पैदा हो गया था।
ऐसी स्थिति में ऑपरेशन को बेहद चुनौतीपूर्ण माना जा रहा था। चिकित्सकों ने पहले बच्चे की स्थिति को स्थिर करने पर ध्यान दिया और उसके बाद सर्जिकल प्रक्रिया को आगे बढ़ाया। टीम ने क्षतिग्रस्त रक्त वाहिकाओं की मरम्मत की तथा टूटी हुई हड्डियों को भी रिपेयर किया।
करीबियों के मुताबिक, जिस समय मासूम को अस्पताल लाया गया, उस समय परिवार की हालत बेहद खराब थी। बच्चे की गंभीर चोट देखकर परिजन लगातार रो रहे थे और उसकी जिंदगी को लेकर चिंतित थे। हर गुजरते पल के साथ उनकी चिंता बढ़ती जा रही थी।
कई स्तर पर किया गया उपचार, अब खतरे से बाहर है मासूम
चिकित्सकों की टीम की मेहनत के बाद ऑपरेशन सफल रहा। सरिया को सुरक्षित तरीके से बाहर निकाल लिया गया। इसके साथ ही कटे हुए ब्लड वेसल्स और टूटी हड्डियों की मरम्मत की गई।
सर्जरी के बाद प्रबल को चिकित्सकों की निगरानी में रखा गया है। फिलहाल उसकी स्थिति नियंत्रण में बताई जा रही है और वह खतरे से बाहर है। डॉक्टर उसकी लगातार निगरानी कर रहे हैं ताकि ऑपरेशन के बाद किसी तरह की जटिलता सामने आने पर तत्काल उपचार दिया जा सके।
यह मामला इसलिए भी बेहद गंभीर था क्योंकि बच्चे की उम्र महज छह वर्ष है। इतनी कम उम्र में शरीर के महत्वपूर्ण हिस्से में इस तरह की गंभीर चोट के बावजूद उसका सफल उपचार चिकित्सकीय टीम के लिए बड़ी चुनौती था।
परिजनों की आंखों में लौट आई उम्मीद
ऑपरेशन सफल होने की जानकारी जैसे ही परिवार को मिली, उनकी आंखों से आंसू छलक पड़े। हादसे के बाद जिस परिवार को अपने बच्चे की जिंदगी बचने की उम्मीद मुश्किल नजर आ रही थी, उसे डॉक्टरों ने नई उम्मीद दी।
परिजनों ने चिकित्सकों की टीम का आभार जताया। क्षेत्र में भी इस सफल ऑपरेशन की चर्चा है और लोग डॉ. हिमांशु उपाध्याय तथा उनकी टीम की चिकित्सकीय कुशलता की सराहना कर रहे हैं।
निर्माण स्थलों पर बच्चों की मौजूदगी फिर बनी चिंता का विषय
प्रबल के साथ हुआ यह हादसा निर्माणाधीन मकानों और खुले निर्माण स्थलों पर बच्चों की सुरक्षा को लेकर भी गंभीर सवाल खड़े करता है। निर्माण स्थल पर खुले में पड़ी लोहे की सरिया, गड्ढे और अन्य निर्माण सामग्री बच्चों के लिए बड़े खतरे का कारण बन सकती है।
ग्रामीण इलाकों में अक्सर निर्माणाधीन मकानों के आसपास बच्चों का खेलना सामान्य बात है, लेकिन वहां मौजूद खतरनाक निर्माण सामग्री किसी भी समय बड़े हादसे का कारण बन सकती है। प्रबल का मामला इस खतरे की भयावह तस्वीर सामने रखता है।
एक हादसा, जिसने परिवार को झकझोर दिया
बावली गांव का यह हादसा प्रबल के परिवार के लिए किसी बुरे सपने से कम नहीं था। कुछ देर पहले तक खेल रहा छह साल का बच्चा अचानक जिंदगी और मौत के बीच पहुंच गया। मुंह और गले के आर-पार हुई सरिया ने परिवार की सांसें रोक दी थीं।
लेकिन समय पर अस्पताल पहुंचाने, चिकित्सकों द्वारा स्थिति को गंभीरता से लेने और जटिल सर्जरी के बाद अब प्रबल के परिवार में राहत की सांस है। डॉक्टरों की निगरानी में मासूम की हालत नियंत्रण में है।
प्रबल की कहानी फिलहाल दर्दनाक हादसे से निकलकर उम्मीद की कहानी बन चुकी है। एक ओर यह घटना निर्माण स्थलों पर सुरक्षा को लेकर चेतावनी देती है, तो दूसरी ओर कठिन परिस्थितियों में चिकित्सकीय विशेषज्ञता और समय पर उपचार की अहमियत भी सामने लाती है।
छह साल के मासूम की जिंदगी बचाने वाली इस जटिल सर्जरी ने परिवार को वह राहत दी है, जिसकी उम्मीद हादसे के बाद लगभग टूट चुकी थी। अब सभी की निगाहें प्रबल के पूरी तरह स्वस्थ होकर घर लौटने पर टिकी हैं।














