लंदन: ब्रिटेन में RAF Fairford एयरबेस के पास पांच युवकों की गिरफ्तारी के बाद कथित विदेशी नेटवर्क और ईरान कनेक्शन को लेकर जांच तेज हो गई है। 27 सितंबर को Gloucestershire के Whelford इलाके में पांच ब्रिटिश युवकों को संदिग्ध वाहनों के साथ पकड़ा गया था। पुलिस ने उन्हें Explosives Act और आतंकवादी गतिविधि की तैयारी के संदेह में गिरफ्तार किया था।
हालांकि, जांच अभी जारी है और किसी विदेशी सरकार की भूमिका की पुष्टि नहीं हुई है। बाद में पांचों आरोपियों को पुलिस जमानत पर रिहा कर दिया गया। जांच एजेंसियां ईरान, रूस, आतंकी संगठनों या अन्य संभावित कड़ियों समेत कई एंगल की पड़ताल कर रही हैं।
£1,000 में भर्ती का दावा
ब्रिटिश सुरक्षा विशेषज्ञ विल गेडेस ने दावा किया है कि ईरान से जुड़े नेटवर्क ब्रिटेन में कम रकम देकर युवाओं और अपराधी पृष्ठभूमि वाले लोगों को छोटे स्तर की आतंकी गतिविधियों के लिए इस्तेमाल करने की कोशिश कर सकते हैं। उनके अनुसार, यह रकम करीब 1,000 पाउंड यानी लगभग 1 लाख रुपये तक हो सकती है।
गेडेस ने यह भी दावा किया कि ऐसे नेटवर्क युवाओं को प्रभावित करने और उन्हें अपने उद्देश्यों के लिए इस्तेमाल करने की कोशिश कर रहे हैं। हालांकि, ये विशेषज्ञ के दावे हैं और RAF Fairford मामले में इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है।
RAF Fairford में क्या हुआ?
27 सितंबर की रात करीब 12:45 बजे पुलिस को तीन संदिग्ध वाहनों के एयरबेस की ओर जाने की सूचना मिली। इसके बाद सशस्त्र पुलिस अधिकारियों ने कार्रवाई करते हुए पांच लोगों को गिरफ्तार किया। वाहनों की सैन्य और फॉरेंसिक विशेषज्ञों की मदद से जांच की गई।
घटना के बाद आसपास के करीब 85 घरों को एहतियातन खाली कराया गया और इलाके में सुरक्षा घेरा बनाया गया। RAF Fairford का इस्तेमाल अमेरिकी सैन्य अभियानों के लिए किया जाता रहा है और मौजूदा ईरान संघर्ष के दौरान भी यह बेस रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण रहा है।
पांचों आरोपी ब्रिटिश नागरिक
ब्रिटिश काउंटर-टेररिज्म पुलिस के मुताबिक गिरफ्तार किए गए पांचों लोग लंदन के रहने वाले ब्रिटिश नागरिक और 20 साल की उम्र के युवा हैं। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार उनकी उम्र 23 से 25 वर्ष के बीच बताई गई है।
यह तथ्य उस दावे को लेकर भी चर्चा पैदा कर रहा है कि विदेशी नेटवर्क स्थानीय युवाओं को अपने अभियानों के लिए इस्तेमाल करने की कोशिश कर सकते हैं।
क्या ईरान का हाथ है?
यह इस पूरे मामले का सबसे बड़ा सवाल है। ब्रिटिश अधिकारी अभी किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुंचे हैं। काउंटर-टेररिज्म पुलिस ने कहा है कि जांच में कई नई दिशाएं सामने आई हैं और जांचकर्ता पूरे मामले को सावधानी से देख रहे हैं।
अमेरिकी अधिकारियों की ओर से भी संभावित विदेशी भूमिका की बात कही गई है, लेकिन उपलब्ध जानकारी के आधार पर अभी यह स्थापित नहीं हुआ है कि RAF Fairford मामले के पीछे ईरानी सरकार थी।
वहीं, लंदन स्थित ईरानी दूतावास ने किसी भी तरह की संलिप्तता से इनकार किया है और ईरान को इस घटना से जोड़ने वाली अटकलों को निराधार बताया है।
जांच जारी, कई सवाल बाकी
पांचों आरोपियों को जमानत पर छोड़े जाने के बावजूद जांच बंद नहीं हुई है। पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि संदिग्धों का उद्देश्य क्या था, क्या उन्हें किसी संगठन या विदेशी शक्ति से निर्देश या आर्थिक मदद मिली थी और RAF Fairford को ही निशाना बनाने के पीछे क्या कारण था।
फिलहाल £1,000 में युवाओं की भर्ती और ईरानी नेटवर्क की भूमिका से जुड़े दावे जांच का हिस्सा हैं, स्थापित तथ्य नहीं। RAF Fairford मामले में अंतिम निष्कर्ष जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएगा।















