“बढ़ती आबादी और वाहनों के दबाव के बीच जीबीएनवीएस ने ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण को लिखा पत्र, चार मूर्ति चौक समेत कई प्रमुख स्थानों पर अतिरिक्त सीएनजी स्टेशन बनाने की मांग”
ग्रेटर नोएडा वेस्ट। तेजी से विकसित हो रहे ग्रेटर नोएडा वेस्ट में बढ़ती आबादी और वाहनों की संख्या के साथ सीएनजी ईंधन की मांग भी लगातार बढ़ रही है। लेकिन क्षेत्र में उपलब्ध सीएनजी सुविधाएं बढ़ती जरूरत के मुकाबले अपर्याप्त साबित हो रही हैं। इसका सबसे बड़ा असर व्यस्त समय में सीएनजी स्टेशनों पर लगने वाली लंबी कतारों के रूप में दिखाई दे रहा है। कई स्थानों पर वाहन चालकों को 30 से 45 मिनट या उससे भी अधिक समय तक ईंधन भराने के लिए इंतजार करना पड़ रहा है।
नागरिकों की इस समस्या को गंभीरता से उठाते हुए गौतम बुद्ध नगर विकास समिति (जीबीएनवीएस) ने ग्रेटर नोएडा औद्योगिक विकास प्राधिकरण को पत्र लिखकर क्षेत्र में अतिरिक्त सीएनजी स्टेशनों के लिए उपयुक्त भूमि चिन्हित कर उपलब्ध कराने की मांग की है। समिति ने कहा है कि सीएनजी स्टेशनों की कमी अब केवल ईंधन उपलब्धता का मुद्दा नहीं रह गई है, बल्कि इससे यातायात व्यवस्था, नागरिकों के समय और स्थानीय प्रदूषण पर भी असर पड़ रहा है।
3.5 से 4 लाख आबादी, डेढ़ लाख से अधिक परिवार
जीबीएनवीएस के अनुसार ग्रेटर नोएडा वेस्ट में वर्तमान में अनुमानतः 3.5 से 4 लाख लोग निवास कर रहे हैं और यहां 1.5 लाख से अधिक परिवार रह रहे हैं। क्षेत्र में बड़ी संख्या में लोग सीएनजी वाहनों का इस्तेमाल करते हैं। इसके बावजूद मौजूदा सीएनजी सुविधाओं का विस्तार आबादी और वाहनों की बढ़ती संख्या के अनुरूप नहीं हो पाया है।
समिति का कहना है कि आने वाले समय में ग्रेटर नोएडा वेस्ट में नए आवासीय और व्यावसायिक प्रोजेक्ट बढ़ने के साथ आबादी और वाहनों की संख्या में और वृद्धि होना तय है। ऐसे में भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए अभी से ईंधन सुविधाओं का विस्तार करना जरूरी है।
एक मूर्ति चौक पर सबसे ज्यादा दबाव
ग्रेटर नोएडा वेस्ट के प्रमुख सीएनजी केंद्रों में व्यस्त समय के दौरान वाहनों की लंबी कतारें आम होती जा रही हैं। विशेष रूप से एक मूर्ति चौक सहित सीएनजी सुविधा वाले बहु-ईंधन केंद्रों पर वाहनों का दबाव बढ़ने से स्थिति कई बार गंभीर हो जाती है।
कतार में लंबे समय तक खड़े रहने से वाहन चालकों का समय तो बर्बाद होता ही है, साथ ही सड़क पर वाहनों की संख्या बढ़ने से यातायात की रफ्तार भी प्रभावित होती है। लंबे समय तक इंजन चालू रहने या बार-बार आगे बढ़ने की स्थिति में ईंधन की अतिरिक्त खपत और प्रदूषण बढ़ने की आशंका भी रहती है।
जीबीएनवीएस ने अपने पत्र में इसी समस्या को आधार बनाते हुए प्राधिकरण से क्षेत्रवार जरूरत का आकलन कराने और नए सीएनजी स्टेशनों के लिए तत्काल भूमि चिन्हित करने का अनुरोध किया है।
चार मूर्ति से सेक्टर-12 तक नए स्टेशन की जरूरत
समिति ने पत्र में कई ऐसे प्रमुख क्षेत्रों का उल्लेख किया है, जहां भविष्य की मांग को देखते हुए अतिरिक्त सीएनजी स्टेशन स्थापित किए जा सकते हैं। इनमें चार मूर्ति चौक, एक मूर्ति बुद्ध चौक, पायलट चौक, 130 मीटर मार्ग, सेक्टर-10 और सेक्टर-12 प्रमुख हैं।
जीबीएनवीएस का कहना है कि इन क्षेत्रों के साथ-साथ अन्य घनी आबादी वाले इलाकों का भी सर्वे कराया जाना चाहिए, ताकि सीएनजी स्टेशनों का ऐसा नेटवर्क विकसित हो सके जिससे किसी एक केंद्र पर अत्यधिक दबाव न पड़े।
मकसद सिर्फ सीएनजी स्टेशन बढ़ाना नहीं, ट्रैफिक दबाव घटाना भी
समिति के अनुसार नए सीएनजी स्टेशन स्थापित होने से नागरिकों को ईंधन भराने के लिए लंबी दूरी तय नहीं करनी पड़ेगी और मौजूदा केंद्रों पर वाहनों का दबाव कम होगा। इससे सड़कों पर लगने वाली कतारें घटेंगी और यातायात व्यवस्था को भी राहत मिलेगी।
आईजीएल के साथ समन्वय की मांग
जीबीएनवीएस ने प्राधिकरण से अनुरोध किया है कि उपयुक्त सरकारी अथवा प्राधिकरण की भूमि उपलब्ध होने के बाद संबंधित गैस वितरण कंपनी आईजीएल के साथ समन्वय कर नए सीएनजी स्टेशनों की स्थापना की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जाए।
समिति ने इस संबंध में संबंधित विभागों के अधिकारियों के साथ संयुक्त स्थल निरीक्षण और बैठक आयोजित करने की मांग भी की है। उसका कहना है कि जमीनी स्थिति का आकलन करने के बाद ही ऐसे स्थानों का चयन किया जाना चाहिए, जहां वर्तमान और भविष्य दोनों की जरूरतों को पूरा किया जा सके।
“आबादी बढ़ रही है तो सुविधाएं भी उसी अनुपात में बढ़ें”
जीबीएनवीएस की अध्यक्ष रश्मि पाण्डेय ने कहा कि ग्रेटर नोएडा वेस्ट अब तेजी से विकसित होता हुआ प्रमुख आवासीय एवं व्यावसायिक क्षेत्र बन चुका है। जिस तेजी से यहां आबादी और वाहनों की संख्या बढ़ रही है, उसी अनुपात में स्वच्छ ईंधन और यातायात से जुड़ी सुविधाओं का विस्तार भी जरूरी है।
उन्होंने कहा कि सीएनजी केंद्रों पर लगने वाली लंबी कतारें नागरिकों के समय के साथ-साथ यातायात व्यवस्था को भी प्रभावित कर रही हैं। इसलिए नए सीएनजी स्टेशनों के लिए भूमि चिन्हित करने की प्रक्रिया को प्राथमिकता के आधार पर आगे बढ़ाया जाना चाहिए।
अब समयबद्ध कार्रवाई की मांग
समिति के उपाध्यक्ष हिमांशु राजपूत और सचिव अनूप कुमार सोनी ने कहा कि ग्रेटर नोएडा वेस्ट की वर्तमान आवश्यकता को देखते हुए सीएनजी सुविधाओं का विस्तार अब बुनियादी नागरिक सुविधा का हिस्सा बन चुका है। उन्होंने प्राधिकरण से इस विषय पर शीघ्र कार्रवाई की मांग की।
जीबीएनवीएस ने उम्मीद जताई है कि प्राधिकरण इस जनहित से जुड़े मुद्दे पर समयबद्ध तरीके से कार्रवाई करेगा। समिति का कहना है कि यदि अभी से क्षेत्र की वास्तविक जरूरत के आधार पर नए सीएनजी स्टेशनों के लिए भूमि चिन्हित कर योजना बनाई जाती है, तो आने वाले वर्षों में बढ़ती आबादी और वाहनों के दबाव से उत्पन्न होने वाली समस्या को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है।
फिलहाल निगाहें प्राधिकरण की अगली कार्रवाई पर हैं। यदि प्रस्तावित क्षेत्रों में नए सीएनजी स्टेशनों के लिए जमीन उपलब्ध होती है और आईजीएल के साथ समन्वय कर प्रक्रिया आगे बढ़ती है, तो इससे ग्रेटर नोएडा वेस्ट के हजारों वाहन चालकों को रोजाना लगने वाली लंबी कतारों से राहत मिलने की उम्मीद है।














