फ्रांस से स्पेन और पुर्तगाल तक विरोध की लहर, शिक्षा, बेरोजगारी और भ्रष्टाचार भी बने बड़े मुद्दे
यूरोप को दुनिया के विकसित क्षेत्रों में गिना जाता है, लेकिन आज इसी यूरोप के कई देशों में युवा और आम नागरिक बेहतर जीवन की मांग को लेकर सड़कों पर उतर रहे हैं। फ्रांस, स्पेन, पुर्तगाल, इटली, बेल्जियम और अल्बानिया में अलग-अलग मुद्दों पर हो रहे विरोध-प्रदर्शन सरकारों के सामने बड़ी चुनौती बनते दिखाई दे रहे हैं। कहीं शिक्षा व्यवस्था से नाराज छात्र प्रदर्शन कर रहे हैं, तो कहीं महंगे किराये, बढ़ती महंगाई, बेरोजगारी और भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठ रही है।
इन प्रदर्शनों के पीछे एक साझा सवाल है—क्या पढ़ाई पूरी करने और नौकरी करने के बावजूद युवाओं के लिए सम्मानजनक जीवन जीना मुश्किल होता जा रहा है?
फ्रांस में शिक्षा व्यवस्था और महंगाई के खिलाफ नाराजगी
फ्रांस में विद्यार्थियों का गुस्सा स्कूलों में शिक्षकों की कमी, पुरानी इमारतों और पढ़ाई से जुड़ी समस्याओं को लेकर सामने आया है। विद्यार्थियों की शिकायत है कि लंबे स्कूल समय और कक्षाओं के बीच खाली अंतराल के कारण उनका पूरा दिन स्कूल में बीत जाता है, लेकिन इसके बावजूद शिक्षा व्यवस्था में कई कमियां बनी हुई हैं।
रिपोर्ट में दिए गए आंकड़ों के मुताबिक, फ्रांस के सरकारी स्कूलों में एक कक्षा में औसतन 30.5 विद्यार्थी हैं। माध्यमिक शिक्षा में लगभग 10 प्रतिशत निर्धारित पढ़ाई के घंटे प्रभावित होने का अनुमान भी जताया गया है।
शिक्षा से शुरू हुआ असंतोष बाद में महंगाई, वेतन और पेंशन जैसे मुद्दों तक पहुंच गया। मजदूर संगठनों ने भी बेहतर वेतन और बढ़ती कीमतों से राहत देने की मांग उठाई। सरकार के सामने अब शिक्षा व्यवस्था में सुधार करने और आम लोगों की आर्थिक परेशानियां दूर करने की चुनौती है।
स्पेन में आवास संकट बना सबसे बड़ा मुद्दा
स्पेन में महंगे मकानों और बढ़ते किराये ने युवाओं तथा मध्यम वर्ग की चिंता बढ़ा दी है। कई लोगों के लिए अपनी कमाई से किराया चुकाना और बाकी घरेलू खर्च पूरे करना मुश्किल होता जा रहा है।
एक बुजुर्ग महिला को किराया बढ़ने के बाद घर खाली करना पड़ा। इस मामले ने आवास संकट और बेदखली को लेकर जारी बहस को और तेज कर दिया। प्रदर्शनकारी किराये पर नियंत्रण, जबरन बेदखली से सुरक्षा और आवास बाजार में निवेश फंडों की भूमिका पर सख्त नियम बनाने की मांग कर रहे हैं।
आवास का मुद्दा अब केवल आर्थिक समस्या नहीं, बल्कि राजनीतिक बहस का भी केंद्र बन चुका है। सरकारों पर दबाव है कि वे आम नागरिकों के लिए किफायती घर उपलब्ध कराने के ठोस उपाय करें।
पुर्तगाल में वेतन से भी महंगा पड़ रहा किराया
पुर्तगाल में घरों की बढ़ती कीमतों ने युवाओं और परिवारों के लिए आर्थिक दबाव बढ़ा दिया है। राजधानी लिस्बन में आवास की लागत को लेकर स्थिति विशेष रूप से चिंताजनक बताई गई है।
यूरोपीय संसद के आंकड़ों के अनुसार, 2015 से 2024 के बीच पुर्तगाल में घरों की कीमतों में 124.4 प्रतिशत की वृद्धि हुई। वहीं, रिपोर्ट में उद्धृत आंकड़ों के मुताबिक, लिस्बन का अनुमानित किराया औसत वेतन के 116 प्रतिशत तक पहुंच सकता है।
इसका मतलब है कि औसत वेतन पाने वाले व्यक्ति के लिए अकेले अपनी आय से औसत किराया चुकाना भी बेहद मुश्किल हो सकता है। ऐसे में प्रदर्शनकारी बेहतर वेतन, सस्ते मकान और जीवनयापन की बढ़ती लागत से राहत देने की मांग कर रहे हैं।
इटली में महंगाई, अल्बानिया में भ्रष्टाचार के खिलाफ गुस्सा
इटली के मिलान में जीवनयापन की बढ़ती लागत को लेकर विरोध-प्रदर्शन हुए। कुछ स्थानों पर प्रदर्शन के दौरान हिंसा की घटनाएं भी सामने आने की बात कही गई है।
दूसरी ओर, अल्बानिया में भ्रष्टाचार, बेरोजगारी और शिक्षा व्यवस्था को लेकर असंतोष है। एक विवादित तटीय विकास परियोजना ने भी विरोध को हवा दी है, जिसका संबंध जेरेड कुशनर से बताया गया है।
इन दोनों देशों के हालात बताते हैं कि जनता की नाराजगी केवल महंगाई तक सीमित नहीं है। रोजगार के अवसर, सरकारी फैसलों में पारदर्शिता और संस्थाओं पर भरोसा भी महत्वपूर्ण मुद्दे बन चुके हैं।
बेल्जियम में छात्रों का प्रदर्शन, शिक्षा सुधारों पर सवाल
बेल्जियम के ब्रसेल्स और लीज में छात्रों के विरोध-प्रदर्शन के दौरान पुलिस के साथ झड़पों की खबरें सामने आईं। प्रदर्शन के प्रमुख मुद्दों में शिक्षा सुधार, फीस में बढ़ोतरी और सरकार की बजट कटौती की नीतियां शामिल हैं।
छात्रों और प्रदर्शनकारियों की चिंता है कि शिक्षा का खर्च बढ़ने और सार्वजनिक सेवाओं में कटौती से आम परिवारों पर अतिरिक्त बोझ पड़ सकता है। सरकार के लिए चुनौती यह है कि आर्थिक















