नई दिल्ली। भारत ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान चीन और पाकिस्तान के कथित गठजोड़ को लेकर बेहद कड़ा रुख अपनाया है। विदेश मंत्रालय ने पहली बार खुलकर उन रिपोर्टों पर गंभीर चिंता जताई है, जिनमें भारत-पाक सैन्य संघर्ष के दौरान पाकिस्तान को चीन द्वारा तकनीकी और रणनीतिक सहायता दिए जाने का दावा किया गया है।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने मंगलवार को कहा कि जो देश खुद को “जिम्मेदार वैश्विक शक्ति” बताते हैं, उन्हें यह भी समझना चाहिए कि इस तरह की गतिविधियों का उनकी अंतरराष्ट्रीय साख और विश्वसनीयता पर क्या प्रभाव पड़ता है।
चीन के बयान पर भारत का तीखा जवाब
विदेश मंत्रालय की यह प्रतिक्रिया उस चीनी अधिकारी के बयान के बाद आई है, जिसमें उसने भारत के साथ सैन्य तनाव के दौरान पाकिस्तान को “जमीनी स्तर पर तकनीकी सहायता” देने की बात स्वीकार की थी।
रणधीर जायसवाल ने कहा कि भारत ने उन रिपोर्टों को देखा है और वे उन आशंकाओं की पुष्टि करती हैं, जिनकी पहले से चर्चा हो रही थी।
उन्होंने कहा,
“ऑपरेशन सिंदूर पहलगाम में हुए आतंकवादी हमले का सटीक, लक्षित और सोच-समझकर दिया गया जवाब था। इसका उद्देश्य पाकिस्तान से संचालित और उसके समर्थन से चल रहे राज्य-प्रायोजित आतंकवादी ढांचे को नष्ट करना था।”
चीन ने पाकिस्तान की मदद करने की बात स्वीकारी
दरअसल, Aviation Industry Corporation of China (AVIC) से जुड़े चेंगदू एयरक्राफ्ट डिजाइन एंड रिसर्च इंस्टीट्यूट के इंजीनियर झांग हेंग के एक इंटरव्यू ने इस पूरे विवाद को और गंभीर बना दिया है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, झांग हेंग ने चीनी मीडिया से बातचीत में स्वीकार किया कि वह उस टीम का हिस्सा थे जिसे मई 2025 के संघर्ष के दौरान पाकिस्तान को तकनीकी सहायता देने के लिए तैनात किया गया था।
उन्होंने कथित तौर पर कहा कि संघर्ष के दौरान सपोर्ट बेस पर लगातार लड़ाकू विमानों की आवाजें और एयर रेड सायरन सुनाई देते थे। उन्होंने यह भी बताया कि भीषण गर्मी और तनावपूर्ण हालात में काम करना उनके लिए मानसिक और शारीरिक रूप से बेहद चुनौतीपूर्ण था।
“पाकिस्तान चीन की लाइव लैब”
भारत पहले भी कई बार चीन की भूमिका पर सवाल उठा चुका है। ऑपरेशन सिंदूर के बाद भारतीय सुरक्षा अधिकारियों ने आरोप लगाया था कि चीन ने पाकिस्तान को भारतीय सैन्य प्रतिष्ठानों से जुड़ी संवेदनशील जानकारी उपलब्ध कराई थी।
जुलाई 2025 में लेफ्टिनेंट जनरल Rahul Singh ने पाकिस्तान को “चीनी सेना की लाइव लैब” बताया था, जहां चीन अपनी सैन्य रणनीतियों और तकनीकों का परीक्षण करता है।
अमेरिकी रक्षा विभाग की एक हालिया रिपोर्ट में भी दावा किया गया था कि चीन ने सूचना युद्ध, साइबर ऑपरेशन, खुफिया सहायता और कूटनीतिक समर्थन के जरिए पाकिस्तान की मदद की थी।
भारत का सख्त संदेश
विदेश मंत्रालय की टिप्पणी को चीन के लिए एक स्पष्ट और सख्त कूटनीतिक संदेश माना जा रहा है। भारत ने संकेत दिया है कि आतंकवाद और सैन्य सहयोग जैसे संवेदनशील मुद्दों पर किसी भी तरह की अप्रत्यक्ष मदद को गंभीरता से लिया जाएगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि चीन-पाकिस्तान की बढ़ती रणनीतिक साझेदारी आने वाले समय में दक्षिण एशिया की सुरक्षा और भू-राजनीतिक संतुलन को और अधिक संवेदनशील बना सकती है।














