Wednesday, July 15, 2026
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आजम खान की जौहर यूनिवर्सिटी पर बड़ी कार्रवाई, 38 भवन अवैध घोषित

यूपी ब्रेकिंग – रामपुर स्थित मौलाना मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी के खिलाफ प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई का फैसला लिया है। जिलाधिकारी अजय कुमार द्विवेदी ने सुनवाई के बाद यूनिवर्सिटी प्रबंधन की दलीलों को खारिज कर दिया है। इसके बाद रामपुर विकास प्राधिकरण (RDA) ने यूनिवर्सिटी परिसर में बने 38 भवनों को अवैध मानते हुए ध्वस्तीकरण की प्रक्रिया शुरू कर दी है।

38 भवन बिना स्वीकृत नक्शे के बने

आरडीए की जांच में सामने आया कि यूनिवर्सिटी परिसर में कुल 40 भवन हैं, जिनमें से केवल दो भवनों के नक्शे स्वीकृत पाए गए। बाकी 38 भवन बिना वैध अनुमति के बनाए गए हैं। प्रशासन के अनुसार संस्थान को 15 दिन का समय दिया जाएगा ताकि वह स्वयं अवैध निर्माण हटा सके। निर्धारित समय में कार्रवाई नहीं होने पर आरडीए ध्वस्तीकरण करेगा।

डीएम ने खारिज की यूनिवर्सिटी की दलील

सुनवाई के दौरान यूनिवर्सिटी प्रशासन ने कहा कि भवन निर्माण के समय रामपुर विकास प्राधिकरण अस्तित्व में नहीं था, इसलिए नक्शे स्वीकृत नहीं कराए जा सके। हालांकि जिलाधिकारी ने इस तर्क को अस्वीकार करते हुए कहा कि उस समय क्षेत्र जिला पंचायत के अधिकार क्षेत्र में था और यूनिवर्सिटी के दो भवनों के नक्शे वहीं से स्वीकृत कराए गए थे। इससे स्पष्ट है कि प्रबंधन को नियमों की जानकारी थी, लेकिन बाकी भवनों के लिए अनुमति नहीं ली गई।

2024 के बाद RDA के अधिकार क्षेत्र में आया इलाका

डीएम अजय कुमार द्विवेदी ने बताया कि सींगनखेड़ा स्थित यूनिवर्सिटी 2024 के बाद रामपुर विकास प्राधिकरण के अधिकार क्षेत्र में आई। इससे पहले निर्माण संबंधी स्वीकृतियों और अवैध निर्माण पर कार्रवाई का अधिकार जिला पंचायत के पास था। अब वही जिम्मेदारी आरडीए निभा रहा है।

आजम खान और परिवार पर पहले से कार्रवाई

समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री आजम खान तथा उनके बेटे अब्दुल्ला आजम 17 नवंबर 2025 से रामपुर जेल में बंद हैं। दोनों को दो पैन कार्ड रखने के मामले में विशेष एमपी-एमएलए अदालत ने सात साल की सजा सुनाई थी। वहीं उनकी पत्नी तंजीन फातिमा फिलहाल जमानत पर बाहर हैं।

शुरुआत से विवादों में रही जौहर यूनिवर्सिटी

जौहर यूनिवर्सिटी की स्थापना का फैसला वर्ष 2005 में मौलाना मोहम्मद अली जौहर ट्रस्ट के माध्यम से लिया गया था। उसी वर्ष तत्कालीन मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव ने यूनिवर्सिटी की आधारशिला रखी थी। हालांकि शुरुआत से ही जमीन अधिग्रहण और किसानों की शिकायतों को लेकर यह संस्थान विवादों में रहा। बाद के वर्षों में यहां बीए, बीएससी, बीटेक और बी.फार्मा सहित कई पाठ्यक्रम शुरू हुए और परिसर में बड़ी संख्या में भवनों का निर्माण किया गया। अब प्रशासन की ताजा कार्रवाई के बाद यूनिवर्सिटी एक बार फिर चर्चा के केंद्र में आ गई है।

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