गुजरात के अहमदाबाद से सामने आया यह मामला देश की बैंकिंग सुरक्षा व्यवस्था पर बड़ा सवाल खड़ा कर रहा है। Bank of Baroda की गांधी रोड शाखा में स्थित Reserve Bank of India (RBI) के करेंसी चेस्ट से करीब ₹8.7 करोड़ रुपये चोरी कर लिए गए और हैरानी की बात यह रही कि लगभग 98 दिनों तक किसी को इसकी भनक तक नहीं लगी।
कौन है आरोपी और कैसे मिली जिम्मेदारी?
पुलिस जांच के अनुसार आरोपी हर्षित कड़ियार बैंक ऑफ बड़ौदा की गांधी रोड शाखा में जूनियर जॉइंट कस्टोडियन के पद पर तैनात था। करेंसी चेस्ट की देखरेख और नकदी प्रबंधन से जुड़े कई संवेदनशील कार्य उसकी जिम्मेदारी में शामिल थे। इसी कारण उसे खजाने तक नियमित पहुंच प्राप्त थी।
प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि आरोपी लंबे समय से बैंक की सुरक्षा प्रणाली, नकदी की आवाजाही और निरीक्षण प्रक्रिया को बारीकी से समझ रहा था। उसने उसी जानकारी का फायदा उठाकर इस पूरी साजिश को अंजाम दिया।
“कचरा बाहर फेंकने” के बहाने करोड़ों रुपये निकाले गए
जांच एजेंसियों के मुताबिक आरोपी ने दो संविदा कर्मचारियों को अपने साथ मिलाया। नोटों की गड्डियों को कथित तौर पर कचरे के डिब्बों और लोहे के बॉक्स में रखा गया। इसके बाद उन्हें बैंक परिसर से “कचरा बाहर ले जाने” के नाम पर बाहर निकाला गया।
सबसे बड़ी चूक यह रही कि इतनी बड़ी नकदी बैंक से बाहर जाती रही, लेकिन किसी भी स्तर पर संदेह नहीं हुआ। इससे बैंक की आंतरिक निगरानी व्यवस्था और सुरक्षा प्रोटोकॉल पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
13 जनवरी को हुई चोरी, फिर भी रोज बैंक आता रहा आरोपी
पुलिस अधिकारियों के अनुसार चोरी 13 जनवरी को की गई थी। लेकिन आरोपी इसके बाद भी सामान्य तरीके से बैंक आता-जाता रहा। वह 20 अप्रैल तक लगातार ड्यूटी करता रहा ताकि किसी को उस पर शक न हो।
जांच में यह भी सामने आया है कि आरोपी को विश्वास था कि बैंक के CCTV फुटेज लगभग 90 दिनों बाद स्वतः डिलीट हो जाएंगे। इसी वजह से उसने खुद को सामान्य दिखाने की कोशिश जारी रखी।
बाद में वह अचानक लंबी छुट्टी पर चला गया और संपर्क से बाहर हो गया, जिसके बाद बैंक अधिकारियों को संदेह गहराया।
RBI निरीक्षण से पहले खुली करोड़ों की चोरी
करीब चार महीने बाद RBI निरीक्षण की तैयारी के दौरान नियमित सत्यापन किया गया। इसी दौरान करेंसी चेस्ट में भारी नकदी की कमी सामने आई। जब हिसाब मिलाया गया तो करोड़ों रुपये गायब पाए गए। इसके बाद बैंक प्रबंधन में हड़कंप मच गया और तुरंत पुलिस को सूचना दी गई।
पुलिस और बैंक अधिकारियों ने संयुक्त जांच शुरू की, जिसमें धीरे-धीरे पूरी साजिश सामने आने लगी।
क्रिप्टोकरेंसी और संपत्तियों में लगाया चोरी का पैसा
जांच एजेंसियों को शक है कि आरोपी ने चोरी की रकम को छिपाने के लिए कई जगह निवेश किया। शुरुआती जांच में संपत्तियां खरीदने और Cryptocurrency में निवेश के संकेत मिले हैं।
पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि चोरी की रकम किन-किन माध्यमों से ट्रांसफर की गई और क्या इस मामले में अन्य लोग भी शामिल हैं। मनी लॉन्ड्रिंग के एंगल से भी जांच की जा रही है।
आरोपी गिरफ्तार, पुलिस हिरासत में भेजा गया
पुलिस ने आरोपी हर्षित कड़ियार को गिरफ्तार कर लिया है। अदालत ने उसे 27 मई तक पुलिस हिरासत में भेज दिया है। जांच एजेंसियां अब उसके बैंक खातों, निवेश और संपर्कों की जांच कर रही हैं।
साथ ही उन संविदा कर्मचारियों की भूमिका भी खंगाली जा रही है, जिन्होंने कथित तौर पर नकदी को बैंक से बाहर ले जाने में मदद की।
बैंकिंग सुरक्षा व्यवस्था पर उठे बड़े सवाल
यह मामला केवल चोरी का नहीं बल्कि बैंकिंग सुरक्षा तंत्र की बड़ी विफलता के रूप में देखा जा रहा है। सवाल उठ रहे हैं कि:
करेंसी चेस्ट जैसी संवेदनशील जगह से करोड़ों रुपये कैसे बाहर निकल गए?
CCTV और सुरक्षा निगरानी प्रणाली इतनी कमजोर कैसे रही?
नियमित ऑडिट और सत्यापन में इतनी बड़ी कमी पहले क्यों नहीं पकड़ी गई?
क्या बैंक के अंदर और लोग भी इस साजिश में शामिल थे?
यह घटना अब देशभर के बैंकों और करेंसी चेस्ट की सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा की मांग को और तेज कर रही है।














