13 लोगों की हत्या के दोषी पूर्व अमेरिकी सैन्य अधिकारी की फांसी का सीधा प्रसारण कराने के प्रस्ताव पर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप दोबारा कर रहे विचार, सांसदों और सलाहकारों के विरोध के बीच अंतिम फैसले पर सबकी नजर
पर्दाफाश न्यूज़ | अंतरराष्ट्रीय डेस्क
वॉशिंगटन। अमेरिका में मौत की सजा को लाइव दिखाने के प्रस्ताव ने राजनीतिक और नैतिक बहस को तेज कर दिया है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप कथित तौर पर पूर्व अमेरिकी आर्मी मेजर निदाल हसन की फांसी के लाइव प्रसारण को मंजूरी देने के सवाल पर दोबारा विचार कर रहे हैं। Axios की रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रंप ने अपने करीबी लोगों से इस विषय पर चर्चा की है और संकेत दिया है कि प्रस्तावित लाइव स्ट्रीमिंग शायद नहीं हो।
इस मुद्दे पर अमेरिकी सांसदों के दोनों दलों और व्हाइट हाउस के भीतर तथा बाहर मौजूद सलाहकारों की ओर से विरोध की बात सामने आई है। ऐसे में अब निगाहें ट्रंप के अंतिम फैसले पर टिकी हैं।
पहले समर्थन, अब फैसले पर असमंजस
रिपोर्ट के अनुसार, शुरुआत में ट्रंप ने फांसी के लाइव प्रसारण का समर्थन किया था। उनका तर्क था कि इससे लोगों को गंभीर अपराधों के परिणामों का एहसास हो सकता है और दूसरे लोग ऐसे अपराध करने से डर सकते हैं।
हालांकि, बाद में उन्होंने संकेत दिया कि इस फैसले पर विचार करने की गुंजाइश है। ट्रंप ने यह भी कहा कि अंतिम निर्णय वही करेंगे। प्रशासन के एक अधिकारी के हवाले से रिपोर्ट में कहा गया है कि राष्ट्रपति शायद लाइव प्रसारण की मंजूरी न दें, लेकिन अंतिम फैसला अभी स्पष्ट नहीं है।
रक्षा मंत्री ने क्यों दिया लाइव प्रसारण का प्रस्ताव?
अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने इस प्रस्ताव का समर्थन किया था। इसके पीछे तर्क दिया गया कि इस तरह की सजा के गंभीर परिणामों को जनता के सामने लाया जा सकता है।
लेकिन प्रस्ताव सामने आने के बाद अमेरिका के भीतर और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इसकी आलोचना हुई। आलोचकों के लिए सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या किसी व्यक्ति की फांसी का सार्वजनिक प्रसारण अपराध रोकने का प्रभावी तरीका होगा या इससे मानवीय गरिमा और न्याय व्यवस्था से जुड़े विवाद बढ़ेंगे।
यदि ऐसा प्रसारण होता है, तो यह अमेरिका में किसी व्यक्ति की फांसी का पहला लाइव प्रसारण होगा—ऐसा दावा संबंधित मीडिया रिपोर्ट में किया गया है।
कौन है निदाल हसन?
निदाल हसन अमेरिकी सेना का पूर्व मेजर है, जिसे 5 नवंबर 2009 को टेक्सास के फोर्ट हुड सैन्य ठिकाने पर हुई गोलीबारी के मामले में दोषी ठहराया गया था। इस हमले में 13 लोगों की मौत हुई थी और 32 लोग घायल हुए थे। मृतकों में एक गर्भवती महिला भी शामिल थी।
उस समय सैन्यकर्मी मेडिकल जांच के लिए कतार में खड़े थे। इस घटना ने अमेरिका की सुरक्षा व्यवस्था और सेना के भीतर संभावित कट्टरपंथी विचारों की पहचान को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए थे।
फोर्ट हुड हमला आज भी क्यों है चर्चा में?
हमले के बाद अमेरिकी सीनेट की होमलैंड सिक्योरिटी एंड गवर्नमेंट अफेयर्स कमेटी की एक रिपोर्ट में सेना की कार्यप्रणाली की आलोचना की गई थी। रिपोर्ट के मुताबिक, संवेदनशील मुद्दों पर सावधानी बरतने के कारण अधिकारी हसन के बढ़ते कट्टरपंथी विचारों को समय रहते पहचानने में नाकाम रहे।
यह घटना अमेरिकी इतिहास के गंभीर सैन्य प्रतिष्ठान हमलों में गिनी जाती है और इसके बाद सुरक्षा प्रक्रियाओं की समीक्षा की मांग उठी थी।
क्या ट्रंप लाइव स्ट्रीमिंग की मंजूरी देंगे?
फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या ट्रंप इस प्रस्ताव को मंजूरी देंगे या आलोचनाओं के बाद इसे रोक देंगे। सांसदों और सलाहकारों के विरोध ने इस फैसले को और संवेदनशील बना दिया है।
एक तरफ समर्थकों का तर्क है कि कठोर सजा का सार्वजनिक प्रदर्शन अपराधों के खिलाफ चेतावनी बन सकता है। दूसरी तरफ विरोधियों का सवाल है कि क्या लाइव प्रसारण वास्तव में अपराध रोकने में मदद करेगा और क्या इस तरह का कदम न्याय व्यवस्था की गरिमा के अनुरूप होगा।
निदाल हसन की फांसी की लाइव स्ट्रीमिंग का प्रस्ताव अमेरिका में कानून, सुरक्षा, नैतिकता और सार्वजनिक हित को लेकर नई बहस छेड़ रहा है। ट्रंप का अंतिम फैसला ही तय करेगा कि यह प्रस्ताव आगे बढ़ेगा या यहीं रुक जाएगा।















