दिल्ली में प्रदर्शनकारियों की हिरासत पर जताई चिंता, चुनावी पारदर्शिता और लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा की उठाई मांग
पर्दाफाश न्यूज़ | नई दिल्ली
भारत में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर जारी राजनीतिक विवाद के बीच बांग्लादेश की नेशनल सिटिजन पार्टी (NCP) ने दिल्ली में प्रदर्शन कर रहे CJP के समर्थन में बयान दिया है। पार्टी के संयोजक नाहिद इस्लाम ने प्रदर्शनकारियों की हिरासत, इंटरनेट सेवाओं पर कथित प्रतिबंध और जंतर-मंतर पर लगाई गई पाबंदियों को लेकर चिंता जताई है। उन्होंने भारत और बांग्लादेश के लोकतांत्रिक आंदोलनों को जोड़ते हुए कहा कि दोनों देशों के युवाओं की लोकतांत्रिक आकांक्षाएं एक-दूसरे से जुड़ी हुई हैं।
नाहिद इस्लाम ने क्या कहा?
NCP संयोजक नाहिद इस्लाम ने सोशल मीडिया पर जारी अपने संदेश में भारत के युवाओं और लोकतांत्रिक ताकतों के प्रति एकजुटता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि चुनावी जवाबदेही और लोकतांत्रिक अधिकारों की मांग करने वालों की आवाज सुनी जानी चाहिए।
उनके मुताबिक, चुनावी निष्पक्षता और संस्थागत स्वतंत्रता से जुड़े सवालों का समाधान पारदर्शी जवाब और संवाद के माध्यम से होना चाहिए। उन्होंने अधिकारियों से शांतिपूर्ण प्रदर्शन के अधिकार का सम्मान करने तथा हिरासत में लिए गए लोगों के बारे में स्पष्ट जानकारी देने की अपील भी की।
नाहिद इस्लाम ने अपने संदेश में कहा कि यह संघर्ष केवल भारत के प्रदर्शनकारियों तक सीमित नहीं है, बल्कि लोकतांत्रिक संस्थाओं, जवाबदेह शासन और मानवीय गरिमा से जुड़ा व्यापक मुद्दा है।
शेख हसीना विरोधी आंदोलन का भी किया जिक्र
बांग्लादेश की NCP उन राजनीतिक समूहों में शामिल है जो 2024 में शेख हसीना सरकार के खिलाफ हुए छात्र आंदोलन के बाद उभरे। उस आंदोलन ने आगे चलकर व्यापक सरकार-विरोधी विद्रोह का रूप ले लिया और अंततः शेख हसीना को सत्ता छोड़नी पड़ी।
नाहिद इस्लाम ने अपने बयान में जुलाई 2024 के आंदोलन का उल्लेख करते हुए कहा कि बांग्लादेश के युवाओं ने लोकतांत्रिक अधिकारों और जवाबदेह शासन के लिए संघर्ष किया। उन्होंने आंदोलन के दौरान हुई हिंसा और जान-माल के नुकसान को याद करते हुए संयुक्त राष्ट्र के उस आकलन का भी उल्लेख किया, जिसके अनुसार आंदोलन और उसे दबाने की कार्रवाई के दौरान लगभग 1,400 लोगों की मौत हुई थी।
उन्होंने कहा कि बांग्लादेश में आंदोलन के दौरान भारत के कुछ छात्रों, लेखकों और स्वतंत्र आवाजों की ओर से मिले समर्थन को वे याद करते हैं।
शाहीन बाग और विश्वविद्यालयों के आंदोलनों का उल्लेख
नाहिद इस्लाम ने भारत में हुए विभिन्न जन आंदोलनों का भी जिक्र किया। उन्होंने शाहीन बाग में महिलाओं के नागरिकता संबंधी विरोध प्रदर्शन और जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) तथा जादवपुर विश्वविद्यालय में छात्र आंदोलनों को लोकतांत्रिक विरोध की परंपरा के उदाहरण के तौर पर प्रस्तुत किया।
उन्होंने कहा कि भारत और बांग्लादेश, दोनों जगह युवाओं और महिलाओं ने अपने अधिकारों तथा सामाजिक न्याय के सवालों पर आवाज उठाई है।
NCP संयोजक ने अपने संदेश में सांप्रदायिक नफरत, राजनीतिक असहिष्णुता और धार्मिक श्रेष्ठता की राजनीति का विरोध करते हुए कहा कि दक्षिण एशिया का भविष्य समानता, सामाजिक न्याय और सांप्रदायिक सद्भाव पर आधारित होना चाहिए।
SIR को लेकर दिल्ली में क्यों हो रहा है प्रदर्शन?
दिल्ली में CJP और अन्य संगठनों के विरोध प्रदर्शन मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) में कथित अनियमितताओं के आरोपों से जुड़े हैं। प्रदर्शनकारी मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं।
खबर के मुताबिक, प्रदर्शन के लिए अनुमति नहीं मिलने के बावजूद शनिवार को कई लोग दिल्ली में जुटे, जिसके बाद पुलिस ने कार्रवाई करते हुए प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया। आयोजकों ने रविवार, 11 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर फिर से जुटने का आह्वान किया।
प्रदर्शनकारियों की हिरासत और पुलिस की कार्रवाई को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई है। हालांकि, हिरासत में लिए गए लोगों की संख्या और कार्रवाई से संबंधित अलग-अलग दावों की स्वतंत्र पुष्टि आवश्यक है।
भारत के अधिकारियों से की अपील
नाहिद इस्लाम ने भारतीय अधिकारियों से शांतिपूर्ण तरीके से एकत्र होने के अधिकार का सम्मान करने, हिरासत में लिए गए लोगों के बारे में जानकारी उपलब्ध कराने और शांतिपूर्ण प्रदर्शन के कारण हिरासत में लिए गए लोगों की रिहाई पर विचार करने की अपील की।
उन्होंने पत्रकारों को बिना डर के रिपोर्टिंग करने देने की आवश्यकता पर भी जोर दिया। अपने संदेश में उन्होंने शरजील इमाम और उमर खालिद का उल्लेख करते हुए लंबे समय से जारी उनकी कैद और मुकदमे की स्थिति पर सवाल उठाए।
भारत-बांग्लादेश संबंधों पर भी दिया संदेश
अपने बयान के अंतिम हिस्से में नाहिद इस्लाम ने कहा कि भारत और बांग्लादेश के बीच सीमा पर होने वाली हत्याओं, जल बंटवारे, पर्यावरण संरक्षण और राष्ट्रीय संप्रभुता जैसे कई मुद्दे अब भी महत्वपूर्ण हैं।
उन्होंने ऐसे दक्षिण एशिया की कल्पना पेश की, जहां सभी देशों को समान सम्मान मिले, सरकारें जवाबदेह रहें और किसी भी देश की संप्रभुता का इस्तेमाल दूसरे देश पर दबाव बनाने के लिए न किया जाए।
सियासी बहस में नया मोड़
भारत के SIR विवाद पर बांग्लादेश की NCP का बयान इस मुद्दे को घरेलू राजनीतिक बहस से आगे क्षेत्रीय लोकतंत्र और नागरिक अधिकारों की चर्चा से जोड़ता है। एक ओर प्रदर्शनकारी मतदाता सूची की प्रक्रिया में पारदर्शिता की मांग कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर विदेशी राजनीतिक समूहों के ऐसे बयानों पर भारत-बांग्लादेश संबंधों के संदर्भ में भी चर्चा हो सकती है।
फिलहाल, इस पूरे घटनाक्रम के केंद्र में मतदाता सूची की प्रक्रिया, प्रदर्शन की अनुमति, हिरासत में लिए गए लोगों के अधिकार और चुनावी संस्थाओं के प्रति सार्वजनिक विश्वास जैसे सवाल हैं। इन मुद्दों पर स्थिति स्पष्ट करने के लिए संबंधित अधिकारियों और चुनाव आयोग की आधिकारिक प्रतिक्रिया भी महत्वपूर्ण होगी।















