HomeUttarakhandकैंची धाम में अब बिना रजिस्ट्रेशन पहुंचना होगा मुश्किल!

कैंची धाम में अब बिना रजिस्ट्रेशन पहुंचना होगा मुश्किल!

“50 हजार की भीड़ ने खोली व्यवस्था की पोल, कमिश्नर दीपक रावत की बैठक में बड़े फैसले; 20-25 हजार श्रद्धालुओं की प्रस्तावित सीमा, शटल से लेकर एंट्री-एग्जिट तक बदलेगा सिस्टम”

नैनीताल। विश्व प्रसिद्ध कैंची धाम में उमड़ रही श्रद्धालुओं की बेकाबू भीड़ ने आखिरकार प्रशासन को नई रणनीति बनाने पर मजबूर कर दिया है। एक दिन में 50 हजार से अधिक श्रद्धालुओं के पहुंचने के बाद साफ हो गया कि मौजूदा व्यवस्थाएं लगातार बढ़ती आस्था की भीड़ के सामने दबाव में आ रही हैं। सड़कें हों या पार्किंग, मंदिर परिसर हो या आसपास का ट्रैफिक—हर मोर्चे पर क्षमता और भीड़ के बीच का अंतर दिखाई देने लगा है।

अब प्रशासन भीड़ के आने के बाद व्यवस्था संभालने के बजाय भीड़ आने से पहले उसकी गणना और नियंत्रण की दिशा में बढ़ रहा है। इसी कड़ी में कैंची धाम के लिए प्री-रजिस्ट्रेशन व्यवस्था लागू करने की तैयारी की जा रही है।

कुमाऊं कमिश्नर दीपक रावत की अध्यक्षता में अधिकारियों, पुलिस, पर्यटन विभाग, होटल कारोबारियों, टैक्सी यूनियन और अन्य संबंधित पक्षों के साथ हुई बैठक में भीड़ नियंत्रण को लेकर कई अहम बिंदुओं पर चर्चा हुई। डीएम और एसएसपी को इस संबंध में प्रस्ताव तैयार कर शासन को भेजने के निर्देश दिए गए हैं।

यानी आने वाले समय में कैंची धाम की यात्रा पहले जैसी पूरी तरह अनियोजित नहीं रह सकती। श्रद्धालुओं को संभवतः पहले रजिस्ट्रेशन कराना होगा और प्रशासन पहले से यह जानना चाहेगा कि किस दिन कितने लोग और कितने वाहन धाम की ओर पहुंच रहे हैं।

आस्था पर पहरा नहीं, लेकिन भीड़ पर नियंत्रण जरूरी

कैंची धाम देश-विदेश के श्रद्धालुओं के लिए आस्था का बड़ा केंद्र है। ऐसे में प्रशासन के सामने सबसे बड़ी चुनौती यही है कि भीड़ नियंत्रण और धार्मिक आस्था के बीच संतुलन कैसे कायम किया जाए।

प्रस्तावित रजिस्ट्रेशन व्यवस्था को इसी संदर्भ में देखा जा रहा है। इसका घोषित उद्देश्य श्रद्धालुओं को रोकना नहीं, बल्कि उपलब्ध संसाधनों के मुताबिक भीड़ का प्रबंधन करना है।

लेकिन सवाल भी यहीं से उठता है—जब किसी धार्मिक स्थल पर एक दिन में 50 हजार से ज्यादा लोग पहुंच रहे हों और स्थानीय सड़क, पार्किंग तथा सुरक्षा व्यवस्था इतनी बड़ी संख्या को सहजता से संभालने की स्थिति में न हो, तो क्या केवल मौके पर पुलिस और प्रशासनिक इंतजाम बढ़ाकर समस्या का समाधान संभव है?

प्रशासन का जवाब फिलहाल पूर्व नियोजन और नियंत्रित प्रवेश के रूप में सामने आ रहा है।

20 से 25 हजार की भीड़ होगी ‘मैनेजेबल कैप’?

बैठक में फिलहाल 20 से 25 हजार श्रद्धालुओं की संख्या को संभालने योग्य सीमा के तौर पर प्रस्तावित किए जाने की बात सामने आई है। हालांकि इसे अंतिम या स्थायी संख्या नहीं माना जा रहा है।

यानी आने वाले समय में कैंची धाम की क्षमता के हिसाब से प्रतिदिन श्रद्धालुओं की संख्या को नियंत्रित करने की व्यवस्था बनाई जा सकती है।

यह फैसला कितना प्रभावी होगा, इसका असली परीक्षण वीकेंड और विशेष पर्वों के दौरान होगा। क्योंकि सामान्य दिनों और छुट्टियों के दौरान कैंची धाम पहुंचने वाले श्रद्धालुओं की संख्या में बड़ा अंतर रहता है।

अगर किसी दिन प्रस्तावित सीमा से कई गुना अधिक लोग पहुंचने की कोशिश करते हैं, तो प्रशासन के सामने अगला सवाल यही होगा कि रजिस्ट्रेशन के बिना आने वालों के लिए व्यवस्था क्या होगी?

इस व्यवस्था का अंतिम स्वरूप शासन की मंजूरी और प्रशासन द्वारा तैयार किए जाने वाले प्रस्ताव के बाद ही स्पष्ट होगा।

50 हजार की भीड़ ने दिखा दिया सिस्टम का ‘स्ट्रेस टेस्ट’

पिछला वीकेंड प्रशासन के लिए किसी सिस्टम स्ट्रेस टेस्ट से कम नहीं रहा।

50 हजार से अधिक श्रद्धालुओं की मौजूदगी ने यह सवाल सामने खड़ा कर दिया कि यदि भीड़ इसी रफ्तार से बढ़ती रही तो आने वाले वर्षों में कैंची धाम की सड़कें, पार्किंग, सुरक्षा व्यवस्था और मंदिर परिसर किस तरह इस दबाव को संभालेंगे?

भीड़ बढ़ने का सीधा असर आसपास के यातायात पर पड़ता है। बड़ी संख्या में निजी वाहन पहुंचते हैं तो पार्किंग की समस्या पैदा होती है। पार्किंग भरने के बाद सड़क किनारे वाहनों का दबाव बढ़ता है और इसके बाद स्थानीय यातायात भी प्रभावित होने लगता है।

यही वजह है कि प्रशासन अब क्राउड मैनेजमेंट को केवल मंदिर परिसर का मुद्दा नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र की यातायात और नागरिक व्यवस्था से जोड़कर देख रहा है।

हाईवे बंद नहीं होगा—स्थानीय लोगों की राह भी नहीं रुकेगी

कैंची धाम में भीड़ नियंत्रण जितना जरूरी है, उतना ही जरूरी है भवाली-अल्मोड़ा हाईवे पर सामान्य यातायात को बनाए रखना।

कैंची धाम की भीड़ का असर केवल दर्शन के लिए आने वाले लोगों तक सीमित नहीं रहता। अल्मोड़ा, बागेश्वर और पिथौरागढ़ की ओर जाने वाले स्थानीय लोग, पर्यटक, कारोबारी और रोजमर्रा के यात्री भी इसी सड़क का इस्तेमाल करते हैं।

ऐसे में प्रशासन के सामने साफ चुनौती है—श्रद्धालुओं की सुविधा भी रहे और पहाड़ का सामान्य यातायात भी न थमे।

बैठक में इसी बात पर जोर दिया गया कि कैंची धाम आने वाली भीड़ के कारण हाईवे का सामान्य आवागमन बाधित नहीं होना चाहिए।

शटल सर्विस, पार्किंग और ट्रैफिक डायवर्जन/मैनेजमेंट जैसी व्यवस्थाओं का उद्देश्य भी इसी दबाव को कम करना है।

मंदिर में ‘वन वे’ सिस्टम की तैयारी

भीड़ के दबाव को देखते हुए मंदिर परिसर में एंट्री और एग्जिट को अलग-अलग रखने की व्यवस्था पर भी जोर दिया जा रहा है।

एक ही रास्ते से लोगों का प्रवेश और निकास होने पर भीड़ के आमने-सामने आने की स्थिति बन सकती है। अत्यधिक भीड़ में ऐसी स्थिति भगदड़ जैसे जोखिम को बढ़ा सकती है।

इसलिए प्रस्तावित व्यवस्था में श्रद्धालुओं के आवागमन को एक दिशा में नियंत्रित करने की कोशिश होगी।

यह बदलाव छोटा दिखाई दे सकता है, लेकिन बड़े धार्मिक आयोजनों में भीड़ की दिशा नियंत्रित करना सुरक्षा व्यवस्था का अहम हिस्सा माना जाता है।

वीकेंड से पहले होगी ‘वार रूम’ जैसी तैयारी?

हर वीकेंड कैंची धाम में श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ने की संभावना को देखते हुए एसडीएम, सीओ और संबंधित विभागों के अधिकारियों को पहले से बैठक कर ट्रैफिक, पार्किंग और शटल सर्विस की रूपरेखा तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं।

यानी अब प्रशासन का फोकस ‘भीड़ आ गई, अब संभालो’ वाले मॉडल से हटकर ‘भीड़ आने से पहले तैयारी करो’ पर है।

अगर यह व्यवस्था जमीन पर प्रभावी ढंग से लागू होती है तो पुलिस और प्रशासन के लिए भी दबाव कम हो सकता है और श्रद्धालुओं के लिए यात्रा अधिक व्यवस्थित हो सकती है।

शिप्रा नदी में नहाने पर सख्ती

कैंची धाम के आसपास शिप्रा नदी में नहाने पर रोक लगाने के निर्देश भी दिए गए हैं।

बड़ी संख्या में लोगों के नदी में उतरने से दुर्घटना का खतरा बढ़ सकता है। ऐसे में प्रशासन ने वन विभाग और संबंधित अधिकारियों को नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।

यहां भी संदेश स्पष्ट है—धार्मिक यात्रा के नाम पर सुरक्षा नियमों की अनदेखी स्वीकार नहीं होगी।

श्रद्धालुओं की जेब पर भी नजर—रेट लिस्ट अनिवार्य

कैंची धाम आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ने के साथ स्थानीय कारोबार भी बढ़ता है। लेकिन इसी के साथ यह शिकायत भी सामने आती रही है कि भीड़ के समय कुछ जगहों पर सामान और सेवाओं की कीमतें बढ़ सकती हैं।

अब प्रशासन ने दुकानदारों को रेट लिस्ट स्पष्ट रूप से प्रदर्शित करने के निर्देश दिए हैं।

यदि किसी दुकान पर तय कीमत से अधिक वसूली की शिकायत मिलती है और जांच में आरोप की पुष्टि होती है तो संबंधित दुकानदार के खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है।

यानी प्रशासन का संदेश केवल भीड़ नियंत्रण तक सीमित नहीं है। श्रद्धालु कैंची धाम पहुंचे तो उन्हें सुरक्षित और पारदर्शी माहौल मिले, यह भी व्यवस्था का हिस्सा बनाया जा रहा है।

 

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होटल-होम स्टे पर भी शिकंजा कसने की तैयारी

सबसे अहम मुद्दों में से एक है ठहरने की कीमतें।

कैंची धाम में भीड़ बढ़ने के साथ आसपास के होटल और होम-स्टे की मांग भी बढ़ती है। ऐसे समय में कमरों की कीमतों को लेकर शिकायतें सामने आती हैं तो प्रशासन के सामने कार्रवाई का सवाल खड़ा होता है।

इसी वजह से पर्यटन विभाग और एसडीएम स्तर के अधिकारियों को होटल, होम-स्टे और अन्य आवासीय प्रतिष्ठानों की जांच के निर्देश दिए गए हैं।

होटल संचालकों को भी रेट लिस्ट प्रदर्शित करनी होगी।

यदि जांच में नियमों का उल्लंघन या अनुचित वसूली सामने आती है तो संबंधित प्रतिष्ठान के खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है। गंभीर मामलों में लाइसेंस संबंधी कार्रवाई का प्रावधान भी इस्तेमाल किया जा सकता है।

निजी वाहन बन सकते हैं सबसे बड़ी चुनौती

कैंची धाम में अचानक बढ़ने वाली भीड़ का एक बड़ा हिस्सा निजी वाहनों से पहुंचता है।

एक परिवार का वाहन भले ही छोटा हो, लेकिन हजारों निजी वाहन एक साथ पहुंचें तो सड़क और पार्किंग की क्षमता पर सीधा असर पड़ता है।

इसीलिए प्रस्तावित रजिस्ट्रेशन व्यवस्था में केवल श्रद्धालुओं की संख्या ही नहीं, बल्कि वाहनों की संख्या का अनुमान लगाने पर भी जोर दिया जा रहा है।

ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन, पार्किंग क्षमता और शटल सर्विस को आपस में जोड़कर एक ऐसी व्यवस्था बनाने पर विचार किया जा रहा है जिसमें प्रशासन को पहले से पता हो कि किसी दिन कितने लोगों के पहुंचने की संभावना है।

असली परीक्षा अब जमीन पर होगी

बैठकें हो गईं। फैसलों की दिशा तय हो गई। प्रस्ताव तैयार होगा और शासन को भेजा जाएगा।

लेकिन असली सवाल अब भी यही है—क्या यह पूरा प्लान जमीन पर उतरेगा?

क्योंकि पहाड़ों में किसी भी व्यवस्था की सफलता केवल कागज पर बनाए गए प्लान से तय नहीं होती। सड़क की चौड़ाई, पार्किंग की वास्तविक क्षमता, स्थानीय लोगों की आवाजाही, मौसम, पर्यटक दबाव और अचानक बढ़ने वाली भीड़—इन सभी परिस्थितियों में सिस्टम को काम करना होगा।

50 हजार लोगों की भीड़ ने प्रशासन को चेतावनी दे दी है कि आने वाले समय में केवल पारंपरिक इंतजाम पर्याप्त नहीं होंगे।

कैंची धाम के सामने अब दोहरी चुनौती

एक तरफ कैंची धाम की लोकप्रियता लगातार बढ़ रही है। दूसरी तरफ उसी अनुपात में बुनियादी ढांचे पर दबाव बढ़ रहा है।

अगर श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ती रही तो सवाल सिर्फ मंदिर परिसर का नहीं रहेगा। सवाल होगा—क्या सड़कें इतनी भीड़ संभाल पाएंगी? क्या पार्किंग पर्याप्त होगी? क्या स्थानीय लोगों की आवाजाही प्रभावित नहीं होगी? क्या आपात स्थिति में एंबुलेंस और सुरक्षा बलों की आवाजाही तत्काल संभव होगी?

प्रशासन की नई रणनीति इन्हीं सवालों का जवाब खोजने की कोशिश है।

‘पर्दाफाश न्यूज़’ का सवाल: क्या 25 हजार की सीमा समाधान है या शुरुआत?

20 से 25 हजार की प्रस्तावित क्षमता निश्चित तौर पर भीड़ प्रबंधन की दिशा में एक कदम हो सकती है। लेकिन इसे अंतिम समाधान मान लेना जल्दबाजी होगी।

कैंची धाम की बढ़ती लोकप्रियता को देखते हुए प्रशासन को लंबी अवधि का मास्टर प्लान तैयार करना होगा।

सिर्फ रजिस्ट्रेशन से समस्या खत्म नहीं होगी। पार्किंग, वैकल्पिक यातायात व्यवस्था, पैदल मार्ग, आपातकालीन सेवाएं, स्वच्छता, पेयजल, चिकित्सा सुविधा, होटल-होम-स्टे की निगरानी और स्थानीय लोगों के अधिकार—इन सभी को एक ही योजना का हिस्सा बनाना होगा।

सबसे महत्वपूर्ण बात यह कि नई व्यवस्था पारदर्शी और स्पष्ट होनी चाहिए। श्रद्धालुओं को पहले से बताया जाए कि रजिस्ट्रेशन कैसे होगा, किस दिन कितनी क्षमता उपलब्ध है, वाहन कहां पार्क होंगे, शटल कहां से मिलेगी और किसी आपात स्थिति में क्या व्यवस्था होगी।

अब प्रशासन की अग्निपरीक्षा

कैंची धाम में उमड़ी 50 हजार से अधिक श्रद्धालुओं की भीड़ ने एक बात स्पष्ट कर दी है—आस्था की ताकत को रोका नहीं जा सकता, लेकिन उसे सुरक्षित और व्यवस्थित करने के लिए मजबूत प्रशासनिक सिस्टम जरूरी है।

कुमाऊं कमिश्नर दीपक रावत की अध्यक्षता में हुई बैठक से प्रशासन ने दिशा जरूर तय कर दी है। अब नजर इस बात पर होगी कि प्रस्ताव कब शासन तक पहुंचता है, मंजूरी कब मिलती है और जमीन पर नई व्यवस्था कब लागू होती है।

फिलहाल संदेश साफ है—कैंची धाम की यात्रा आने वाले दिनों में पहले जैसी ‘बस पहुंच गए और दर्शन कर लिए’ वाली व्यवस्था नहीं रह सकती।

रजिस्ट्रेशन से लेकर पार्किंग तक, शटल से लेकर एंट्री-एग्जिट तक और दुकानों से लेकर होटल-होम स्टे तक—प्रशासन अब पूरे कैंची धाम क्षेत्र को एक नियंत्रित क्राउड मैनेजमेंट सिस्टम के तहत लाने की तैयारी में है।

आस्था बनी रहेगी, दर्शन भी होंगे—लेकिन अब प्रशासन चाहता है कि भीड़ अनियंत्रित न हो और व्यवस्था भीड़ के पीछे दौड़ने के बजाय उससे पहले तैयार खड़ी मिले।

यही 50 हजार की भीड़ का सबसे बड़ा सबक है—कैंची धाम की बढ़ती लोकप्रियता अब सिर्फ श्रद्धा का विषय नहीं, बल्कि प्रशासनिक क्षमता की भी बड़ी परीक्षा बन चुकी है।

 

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VIKAS TRIPATHI
VIKAS TRIPATHIhttp://www.pardaphaas.com
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