ईरान और अमेरिका के बीच लंबे समय से जारी सैन्य तनाव के बीच अब बातचीत का रास्ता भी अहम हो गया है। दोनों देशों के बीच चर्चा में सबसे बड़ा मुद्दा ईरान का परमाणु कार्यक्रम और यूरेनियम संवर्धन बना हुआ है। रिपोर्टों के मुताबिक, अमेरिका ने अपनी पहले की मांग में बदलाव के संकेत दिए हैं।
परमाणु संवर्धन पर बदला अमेरिकी रुख
अमेरिका पहले ईरान की परमाणु संवर्धन क्षमता को पूरी तरह रोकने की मांग कर रहा था। अब चर्चा इस बात पर केंद्रित होती दिख रही है कि ईरान अपनी संवर्धन क्षमता को एक निर्धारित सीमा के भीतर रखे।
अमेरिका का कहना है कि केवल भविष्य में संवर्धन कम करने का वादा पर्याप्त नहीं होगा। वॉशिंगटन ईरान की तरफ से जमीन पर ठोस और सत्यापित कदम चाहता है।
60 फीसदी संवर्धित यूरेनियम बना बड़ा मुद्दा
यूरेनियम संवर्धन परमाणु ऊर्जा के लिए इस्तेमाल होने वाली प्रक्रिया है। हालांकि, संवर्धन का स्तर बढ़ने के साथ परमाणु हथियारों की संभावित क्षमता को लेकर अंतरराष्ट्रीय चिंताएं भी बढ़ती हैं।
अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने रॉयटर्स से बातचीत में सवाल उठाया कि अगर ईरान परमाणु हथियार बनाने का इरादा नहीं रखता, तो उसे 60 फीसदी तक संवर्धित ईंधन रखने की जरूरत क्यों है।
अमेरिका चाहता है सिर्फ वादे नहीं, कार्रवाई
अमेरिकी पक्ष का कहना है कि बातचीत तभी आगे बढ़ सकती है जब ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम को लेकर वास्तविक कदम उठाए। वेंस ने संकेत दिया कि अमेरिका केवल आश्वासनों के आधार पर समझौता नहीं करेगा।
उन्होंने यह भी कहा कि वॉशिंगटन के लिए ईरान की निर्णय लेने की प्रक्रिया पूरी तरह स्पष्ट नहीं है और यह सवाल बना हुआ है कि तेहरान में अंतिम निर्णय कौन लेता है।
होर्मुज जलडमरूमध्य भी बातचीत का अहम मुद्दा
ईरान-अमेरिका विवाद का असर सिर्फ परमाणु कार्यक्रम तक सीमित नहीं है। युद्ध के कारण वैश्विक ऊर्जा बाजार पर भी दबाव बढ़ा है।
होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलना भी बातचीत का एक महत्वपूर्ण मुद्दा बताया जा रहा है। यह समुद्री मार्ग वैश्विक तेल और ऊर्जा आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण है।
रिपोर्टों के मुताबिक, दोनों पक्षों ने हाल के हफ्तों में युद्ध खत्म करने और होर्मुज को दोबारा खोलने से जुड़े प्रस्तावों पर चर्चा की है। हालांकि, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के ताजा प्रस्ताव को स्वीकार नहीं किया है और सैन्य कार्रवाई बढ़ाने की चेतावनी भी दी है।
अब बातचीत या बढ़ेगा सैन्य दबाव?
ईरान और अमेरिका के बीच मौजूदा स्थिति में परमाणु संवर्धन, युद्धविराम और होर्मुज जलडमरूमध्य तीन प्रमुख मुद्दे बनकर सामने आए हैं। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि दोनों पक्ष बातचीत के जरिए किसी समझौते तक पहुंचते हैं या क्षेत्र में सैन्य तनाव और बढ़ता है।















