Friday, September 25, 2026
Your Dream Technologies
HomeNCR Newsशीशमहलों की चमक में दब गई ‘हाई-टेक’ नोएडा की हकीकत!

शीशमहलों की चमक में दब गई ‘हाई-टेक’ नोएडा की हकीकत!

“विज्ञापनों में स्मार्ट सिटी, धरातल पर प्रदूषण, बिजली, सड़क, स्वास्थ्य और शिक्षा की बदहाली के सवाल; अब विकास के साथ जवाबदेही का भी मांगा हिसाब”

नोएडा, 25 सितंबर: गगनचुंबी इमारतों के चमचमाते शीशे, आधुनिक एक्सप्रेसवे, बड़े-बड़े व्यावसायिक केंद्र और निवेश परियोजनाओं की तस्वीरों के बीच नोएडा को हाई-टेक और विश्वस्तरीय शहर के रूप में प्रस्तुत किया जाता है। लेकिन शहर की जमीनी व्यवस्थाओं को लेकर अब गंभीर सवाल उठ रहे हैं। आम नागरिकों की बुनियादी सुविधाओं से लेकर बिजली, पर्यावरण, सड़क, स्वास्थ्य, शिक्षा और किसानों की लंबित मांगों तक के मुद्दे एक बार फिर चर्चा के केंद्र में हैं।

आरडब्ल्यूए सेक्टर-105 के अध्यक्ष दिव्य कृष्णात्रेय ने 25 सितंबर को जारी प्रेस विज्ञप्ति में नोएडा की मौजूदा व्यवस्था पर चिंता जताते हुए कहा कि पिछले करीब एक दशक में शहर के विकास की चमक तो बढ़ी, लेकिन आम नागरिक, मध्यम वर्ग और भूमिदाता किसानों से जुड़े कई बुनियादी सवाल अब भी समाधान की प्रतीक्षा कर रहे हैं। उनका कहना है कि शहर को कागजों और विज्ञापनों में विश्वस्तरीय बताने के साथ-साथ धरातल पर नागरिक सुविधाओं और प्रशासनिक जवाबदेही को भी मजबूत किया जाना चाहिए।

उन्होंने सवाल उठाया कि यदि किसी नागरिक को अपनी समस्या के समाधान के लिए बार-बार सरकारी कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़ें, किसान वर्षों तक अपनी मांगों के लिए इंतजार करे, बिजली की समस्या के समाधान में लंबा समय लगे और सार्वजनिक सेवाओं को लेकर शिकायतें बनी रहें, तो विकास के दावों की वास्तविक कसौटी क्या होगी?

हिंडन-यमुना की हालत पर गंभीर सवाल

नोएडा की पर्यावरणीय स्थिति को लेकर भी प्रेस विज्ञप्ति में गंभीर सवाल उठाए गए हैं। दिव्य कृष्णात्रेय का कहना है कि हिंडन और यमुना नदियां प्रदूषण और गंदे पानी की समस्या से जूझ रही हैं। उनका आरोप है कि शहर के विभिन्न हिस्सों से निकलने वाले नालों और सीवर का पानी पर्याप्त उपचार के बिना नदी क्षेत्रों तक पहुंच रहा है।

उनके अनुसार, नदी किनारे दुर्गंध और प्रदूषण की स्थिति शहर के पर्यावरण प्रबंधन पर सवाल खड़े करती है। उन्होंने कहा कि नदियों की सफाई और पर्यावरण संरक्षण को लेकर किए जाने वाले दावों का वास्तविक मूल्यांकन जमीनी स्थिति के आधार पर होना चाहिए।

कृष्णात्रेय ने सवाल किया कि आधुनिक शहर की पहचान केवल ऊंची इमारतों से नहीं हो सकती। स्वच्छ जलस्रोत, प्रभावी सीवर ट्रीटमेंट और प्रदूषण नियंत्रण भी किसी आधुनिक शहर की बुनियादी पहचान हैं।

बारिश की बूंदों के साथ बिजली व्यवस्था पर सवाल

नोएडा की विद्युत व्यवस्था को लेकर भी आरडब्ल्यूए अध्यक्ष ने सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि तकनीकी और आर्थिक रूप से तेजी से आगे बढ़ रहे शहर में बिजली का बुनियादी ढांचा उसी गति से मजबूत नहीं हुआ है।

दिव्य कृष्णात्रेय के अनुसार, हल्की आंधी या बारिश के दौरान कई क्षेत्रों में बिजली आपूर्ति बाधित हो जाती है और नागरिकों को घंटों कटौती का सामना करना पड़ता है। उन्होंने विद्युत विभाग के मानव संसाधन, फॉल्ट निस्तारण और उपभोक्ता शिकायत व्यवस्था को लेकर भी चिंता जताई।

उनका दावा है कि सीमित स्टाफ के कारण एक साथ कई स्थानों पर फॉल्ट होने की स्थिति में उन्हें ठीक करने में लंबा समय लग सकता है। उन्होंने मांग की कि नोएडा की बढ़ती आबादी और विस्तार को देखते हुए बिजली विभाग के फील्ड स्टाफ, शिकायत केंद्र और तकनीकी संसाधनों को पर्याप्त रूप से बढ़ाया जाए।

बिल सुधार से लेकर फॉल्ट तक, उपभोक्ता व्यवस्था पर सवाल

प्रेस विज्ञप्ति में बिजली बिल और उपभोक्ता सेवाओं से जुड़ी व्यवस्था पर भी सवाल उठाए गए हैं। कृष्णात्रेय का कहना है कि लाखों की आबादी वाले शहर में उपभोक्ता शिकायतों के समाधान के लिए पर्याप्त केंद्र और संसाधन होने चाहिए।

उनके अनुसार, नई उपभोक्ता व्यवस्था तभी प्रभावी मानी जाएगी जब वह नागरिकों को सुविधा दे, शिकायतों का समयबद्ध निस्तारण करे और उपभोक्ताओं को अपने मामले की स्थिति जानने की स्पष्ट सुविधा उपलब्ध कराए।

मध्यम वर्ग के आशियाने का सवाल

नोएडा की आवासीय नीति को लेकर भी प्रेस विज्ञप्ति में सवाल उठाया गया है। दिव्य कृष्णात्रेय के अनुसार, पिछले एक दशक में निम्न और मध्यम आय वर्ग के लोगों के लिए एलआईजी, एमआईजी और एचआईजी श्रेणी की नई आवासीय योजनाओं को पर्याप्त प्राथमिकता नहीं मिली।

उन्होंने कहा कि नोएडा में जमीन और आवास की बढ़ती कीमतों के बीच मध्यम वर्ग के परिवारों के लिए अपना घर खरीदना कठिन होता जा रहा है। ऐसे में किफायती आवास की योजनाओं पर गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए, ताकि शहर का विकास केवल उच्च आय वर्ग तक सीमित न रहे।

किसानों की मांगें और अब जवाबदेही का सवाल

नोएडा के विकास में किसानों की भूमिका का उल्लेख करते हुए कृष्णात्रेय ने कहा कि जिन किसानों की जमीनों पर शहर का विस्तार हुआ, उनकी कई मांगें अभी भी लंबित हैं।

प्रेस विज्ञप्ति में 5 से 10 प्रतिशत आबादी भूखंड, जमीन से जुड़े मामलों और उचित मुआवजे जैसे मुद्दों का उल्लेख किया गया है। उनका कहना है कि किसानों को केवल आश्वासन देने के बजाय उनकी मांगों पर स्पष्ट निर्णय और समयसीमा तय होनी चाहिए।

यहीं से खबर का सबसे महत्वपूर्ण सवाल सामने आता है—यदि कोई मांग वर्षों से लंबित है तो उसकी जिम्मेदारी किस स्तर पर तय होगी?

कृष्णात्रेय ने कहा कि किसानों की समस्याओं के समाधान के लिए संबंधित विभागों और अधिकारियों की स्पष्ट जिम्मेदारी तय होनी चाहिए। प्रत्येक मामले में यह बताया जाना चाहिए कि फाइल किस स्तर पर लंबित है, निर्णय कब तक होगा और संबंधित पक्ष को इसकी जानकारी कैसे मिलेगी।

अस्पताल में व्यवस्था सुधारने की मांग

स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर भी प्रेस विज्ञप्ति में चिंता व्यक्त की गई है। दिव्य कृष्णात्रेय ने नोएडा के सरकारी अस्पताल की व्यवस्थाओं पर सवाल उठाते हुए स्वच्छता, वार्डों की स्थिति, दुर्गंध और मूलभूत सुविधाओं की उपलब्धता का मुद्दा उठाया।

उनका कहना है कि सरकारी अस्पताल आम नागरिकों के लिए भरोसेमंद स्वास्थ्य सेवा का प्रमुख केंद्र होना चाहिए। यदि मरीजों को पर्याप्त उपचार या आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध नहीं होतीं और उन्हें दूसरे अस्पतालों में भेजना पड़ता है, तो व्यवस्था की समीक्षा आवश्यक हो जाती है।

उन्होंने स्वास्थ्य सेवाओं में पर्याप्त स्टाफ, बेहतर आधारभूत सुविधाओं और मरीजों के लिए त्वरित सेवाओं की मांग की।

सरकारी स्कूल और कॉलेज भी सवालों के घेरे में

शिक्षा व्यवस्था को लेकर भी कृष्णात्रेय ने चिंता जताई। उनके अनुसार, सरकारी स्कूलों और गवर्नमेंट डिग्री कॉलेजों में बुनियादी सुविधाओं, शिक्षकों और आवश्यक रखरखाव से जुड़ी समस्याओं पर पर्याप्त ध्यान दिया जाना चाहिए।

उन्होंने कहा कि विश्वस्तरीय शहर का निर्माण तभी संभव है जब उसके सरकारी शिक्षण संस्थान भी मजबूत हों। शहर की नई पीढ़ी को बेहतर शिक्षा और सुविधाएं उपलब्ध कराना विकास का महत्वपूर्ण हिस्सा होना चाहिए।

गड्ढायुक्त सड़कें और नालियों की बदहाली

सड़कों और जल निकासी व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। दिव्य कृष्णात्रेय के अनुसार, शहर के कई हिस्सों में गड्ढायुक्त सड़कें, कचरे से भरे नाले और बदहाल सार्वजनिक सुविधाएं नागरिकों के लिए परेशानी का कारण बन रही हैं।

उन्होंने रजिस्ट्री कार्यालय समेत विभिन्न सरकारी कार्यालयों में साफ-सफाई और नागरिक सुविधाओं की स्थिति पर भी सवाल उठाए। उनका कहना है कि किसी भी सरकारी कार्यालय में आने वाले नागरिक को व्यवस्थित और सम्मानजनक वातावरण मिलना चाहिए।

अब सिर्फ विकास नहीं, काम का हिसाब भी चाहिए

दिव्य कृष्णात्रेय ने कहा कि नोएडा को हाई-टेक और विश्वस्तरीय शहर बनाने के लिए केवल नई परियोजनाएं पर्याप्त नहीं हैं। मजबूत बिजली व्यवस्था, स्वच्छ नदियां, बेहतर सीवर प्रबंधन, गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं, मजबूत सरकारी शिक्षा व्यवस्था, बेहतर सड़कें, किफायती आवास और किसानों की समस्याओं का समाधान भी विकास के जरूरी मानक हैं।

उन्होंने कहा कि अब व्यवस्था में जवाबदेही की स्पष्ट प्रणाली बनाई जानी चाहिए। किसी सड़क की खराब स्थिति है तो संबंधित विभाग की जिम्मेदारी तय हो, बिजली व्यवस्था में लगातार समस्या है तो समाधान की समयसीमा सामने आए, सीवर और प्रदूषण की समस्या है तो उसके समाधान की प्रगति सार्वजनिक हो तथा किसानों की मांगें लंबित हैं तो उनके निस्तारण की स्थिति स्पष्ट की जाए।

उनके अनुसार, नागरिकों को यह जानने का अधिकार है कि उनकी शिकायत किस अधिकारी के पास है, उस पर क्या कार्रवाई हुई और समाधान कब तक होगा।

हाई-टेक शहर में हाई-टेक जवाबदेही भी जरूरी

आरडब्ल्यूए अध्यक्ष ने कहा कि जब नोएडा को आधुनिक और हाई-टेक शहर कहा जाता है तो प्रशासनिक व्यवस्था में भी उसी स्तर की पारदर्शिता होनी चाहिए। ऑनलाइन शिकायत व्यवस्था के साथ शिकायत की स्थिति, संबंधित अधिकारी, समाधान की समयसीमा और कार्रवाई की जानकारी नागरिकों को उपलब्ध होनी चाहिए।

उन्होंने प्रमुख नागरिक समस्याओं की विभागवार समीक्षा, स्पष्ट समयसीमा और नियमित प्रगति रिपोर्ट सार्वजनिक करने की मांग की। उनका कहना है कि इससे जनता को यह पता चल सकेगा कि घोषणा और वास्तविक काम के बीच कितना अंतर है।

चमकदार इमारतों से आगे बढ़े विकास की कहानी

नोएडा की चमकदार तस्वीर में ऊंची इमारतें, आधुनिक परियोजनाएं और निवेश की संभावनाएं दिखाई देती हैं, लेकिन शहर की असली पहचान उसकी रोजमर्रा की नागरिक सुविधाओं से बनती है। प्रेस विज्ञप्ति में उठाए गए सवाल इसी अंतर की ओर ध्यान दिलाते हैं।

अब सवाल केवल यह नहीं है कि नोएडा कितना विकसित हुआ, बल्कि यह भी है कि विकास का लाभ आम नागरिक तक कितना पहुंचा, समस्याओं के समाधान की जिम्मेदारी किसकी है और जनता को उस काम का हिसाब कब मिलेगा।

दिव्य कृष्णात्रेय ने मांग की कि नोएडा की नागरिक व्यवस्थाओं की व्यापक समीक्षा कर कमियों को दूर करने के लिए स्पष्ट कार्ययोजना बनाई जाए। बिजली, पर्यावरण, सड़क, स्वास्थ्य, शिक्षा, आवास और किसानों से जुड़े मामलों में समयबद्ध कार्रवाई के साथ जवाबदेही तय की जाए।

क्योंकि किसी भी शहर की असली सफलता उसकी चमकदार इमारतों में नहीं, बल्कि इस बात में दिखाई देती है कि उस शहर का आम नागरिक कितनी आसानी से अपनी समस्या का समाधान पा सकता है और व्यवस्था उससे कितनी पारदर्शिता के साथ जवाब देती है।

 

- Advertisement -
Your Dream Technologies
VIKAS TRIPATHI
VIKAS TRIPATHIhttp://www.pardaphaas.com
VIKAS TRIPATHI भारत देश की सभी छोटी और बड़ी खबरों को सामने दिखाने के लिए "पर्दाफास न्यूज" चैनल को लेके आए हैं। जिसके लोगो के बीच में करप्शन को कम कर सके। हम देश में समान व्यवहार के साथ काम करेंगे। देश की प्रगति को बढ़ाएंगे।
RELATED ARTICLES
- Advertisment -

Most Popular

Recent Comments

Call Now Button