पटना। बिहार में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR (Special Intensive Revision) को लेकर मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने बड़ा दावा किया है। उन्होंने कहा कि पिछले साल बिहार में कराए गए SIR का असर 2025 के विधानसभा चुनाव में साफ तौर पर दिखाई दिया और राज्य में मतदान प्रतिशत में उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई। उनके मुताबिक, बिहार में हुए विधानसभा चुनाव में मतदान का प्रतिशत अमेरिका, ब्रिटेन और फ्रांस जैसे विकसित देशों में दर्ज मतदान प्रतिशत से भी अधिक रहा।
राज्य के दो दिवसीय दौरे पर पहुंचे मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने रविवार को पटना हवाई अड्डे पर मीडिया से बातचीत में कहा कि बिहार लोकतंत्र की ऐतिहासिक भूमि है, जहां वैशाली में लोकतंत्र की प्राचीन परंपरा का उल्लेख मिलता है। उन्होंने कहा कि निर्वाचन आयोग के लिए यह गर्व की बात है कि बिहार में पहली बार SIR की प्रक्रिया सफलतापूर्वक पूरी की गई।
70 लाख नाम हटे, फिर रिकॉर्ड मतदान का दावा
मुख्य निर्वाचन आयुक्त ने बताया कि करीब तीन महीने तक चली व्यापक SIR प्रक्रिया के दौरान मतदाता सूचियों की गहन जांच की गई। इस प्रक्रिया के बाद मतदाता सूचियों से करीब 70 लाख नाम हटाए गए। निर्वाचन आयोग के मुताबिक, इसके बाद हुए विधानसभा चुनाव में मतदान प्रतिशत में बड़ी बढ़ोतरी दर्ज की गई।
ज्ञानेश कुमार ने कहा कि मतदाता सूची को अधिक शुद्ध और व्यवस्थित बनाने की इस प्रक्रिया का प्रभाव चुनावी भागीदारी पर भी देखने को मिला। उन्होंने कहा कि बिहार के मतदाताओं ने बड़ी संख्या में मतदान केंद्रों तक पहुंचकर लोकतंत्र के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभाई।
2025 के बिहार विधानसभा चुनाव में 67.25 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया। निर्वाचन आयोग के अनुसार, यह आजादी के बाद राज्य में दर्ज किया गया अब तक का सबसे अधिक मतदान प्रतिशत है। यही वजह है कि आयोग SIR के बाद बढ़ी चुनावी भागीदारी को महत्वपूर्ण उपलब्धि के रूप में देख रहा है।
बिहार में मतदान ने बनाया नया रिकॉर्ड
बिहार जैसे बड़े और राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण राज्य में 67.25 प्रतिशत मतदान को चुनावी प्रक्रिया के लिहाज से अहम माना जा रहा है। मुख्य निर्वाचन आयुक्त ने विशेष रूप से इस बात का उल्लेख किया कि बिहार का मतदान प्रतिशत अमेरिका, ब्रिटेन और फ्रांस जैसे विकसित लोकतांत्रिक देशों में दर्ज मतदान प्रतिशत से अधिक रहा।
आयोग का मानना है कि लोकतंत्र की मजबूती केवल चुनाव कराने से नहीं, बल्कि नागरिकों की सक्रिय भागीदारी से होती है। ऐसे में बिहार में रिकॉर्ड मतदान को मतदाता जागरूकता और चुनावी सहभागिता की दिशा में महत्वपूर्ण संकेत के तौर पर देखा जा रहा है।
SIR के दौरान मतदाता सूची की जांच, नामों का सत्यापन और पात्र मतदाताओं को सूची में शामिल रखने की प्रक्रिया को लेकर व्यापक प्रशासनिक कवायद की गई। आयोग का कहना है कि इसका उद्देश्य मतदाता सूची को अधिक विश्वसनीय और त्रुटिरहित बनाना था।
राजगीर में BLO से सीधा संवाद करेंगे CEC
मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार अपने बिहार दौरे के दौरान जमीनी स्तर पर निर्वाचन प्रक्रिया को समझने पर भी जोर दे रहे हैं। अधिकारियों के अनुसार, सोमवार को वह राजगीर स्थित नालंदा विश्वविद्यालय में करीब 500 बूथ स्तरीय अधिकारियों (BLOs) के साथ संवाद करेंगे।
इस दौरान वह बूथ स्तर पर काम करने वाले अधिकारियों से सीधे बातचीत करेंगे और निर्वाचन प्रक्रिया के दौरान सामने आने वाली व्यावहारिक चुनौतियों की जानकारी लेंगे। BLO मतदाता सूची तैयार करने और उसके सत्यापन से लेकर चुनावी प्रक्रिया के कई महत्वपूर्ण कार्यों में अहम भूमिका निभाते हैं।
CEC के साथ होने वाली यह बैठक इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि निर्वाचन आयोग लगातार चुनावी प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी, प्रभावी और मतदाता के लिए आसान बनाने पर जोर दे रहा है। जमीनी स्तर पर काम करने वाले अधिकारियों से मिलने वाली जानकारी के आधार पर भविष्य की चुनावी व्यवस्था में सुधार की दिशा तय की जा सकती है।
ELC 2.0 से युवाओं को जोड़ने की तैयारी
बिहार दौरे के दौरान मुख्य निर्वाचन आयुक्त पटना में आयोजित एक सम्मेलन में निर्वाचन साक्षरता क्लब 2.0 (ELC 2.0) की शुरुआत भी करेंगे। इसके साथ ही ECINet की शुरुआत किए जाने की भी जानकारी सामने आई है।
निर्वाचन आयोग ने विद्यार्थियों और युवा नागरिकों को लोकतांत्रिक मूल्यों, चुनावी प्रक्रिया तथा निर्वाचन आयोग की भूमिका और कार्यप्रणाली से परिचित कराने के लिए वर्ष 2018 में निर्वाचन साक्षरता क्लब की शुरुआत की थी।
इन क्लबों का उद्देश्य युवाओं को केवल मतदान के लिए प्रेरित करना नहीं, बल्कि उन्हें लोकतंत्र और चुनावी व्यवस्था की पूरी प्रक्रिया से परिचित कराना भी रहा है। अब बदलते डिजिटल दौर में इस पहल को नए स्वरूप में आगे बढ़ाने की तैयारी की जा रही है।
डिजिटल दौर में बदलेगा निर्वाचन साक्षरता क्लब का स्वरूप
अधिकारियों के अनुसार, सूचना एवं संचार तकनीक में तेजी से हो रहे बदलाव और युवाओं की बढ़ती डिजिटल भागीदारी को देखते हुए निर्वाचन साक्षरता क्लबों को अब ELC 2.0 के रूप में नया स्वरूप दिया जा रहा है।
इसका लक्ष्य स्कूलों, कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में मौजूद निर्वाचन साक्षरता क्लबों को केवल कभी-कभार होने वाली गतिविधियों तक सीमित रखने के बजाय उन्हें सालभर सक्रिय और डिजिटल रूप से सक्षम मंच बनाना है।
इसके माध्यम से युवा मतदाताओं को चुनावी प्रक्रिया की जानकारी डिजिटल माध्यमों से उपलब्ध कराने, लोकतांत्रिक मूल्यों को समझाने और उन्हें निर्वाचन प्रक्रिया में सक्रिय भागीदारी के लिए प्रेरित करने पर जोर दिया जाएगा।
युवाओं की डिजिटल भागीदारी पर आयोग की नजर
आज के दौर में युवा आबादी का बड़ा हिस्सा डिजिटल प्लेटफॉर्म से जुड़ा हुआ है। सोशल मीडिया, ऑनलाइन सूचना और डिजिटल संचार युवाओं की रोजमर्रा की जिंदगी का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुके हैं। ऐसे में निर्वाचन आयोग भी मतदाता शिक्षा और जागरूकता को पारंपरिक तरीकों के साथ डिजिटल माध्यमों से जोड़ने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।
ELC 2.0 इसी बदलाव का हिस्सा माना जा रहा है। इसके जरिए युवाओं को मतदान की प्रक्रिया, मतदाता अधिकार, जिम्मेदार नागरिकता और लोकतांत्रिक संस्थाओं के कामकाज की जानकारी अधिक आधुनिक और इंटरैक्टिव तरीके से देने की कोशिश की जाएगी।
आयोग का मानना है कि यदि युवा मतदाता चुनावी प्रक्रिया को समझेंगे और उससे सक्रिय रूप से जुड़ेंगे, तो लोकतांत्रिक व्यवस्था में उनकी भागीदारी और मजबूत होगी।
SIR से लेकर डिजिटल वोटर एजुकेशन तक आयोग का फोकस
बिहार में मुख्य निर्वाचन आयुक्त का यह दौरा ऐसे समय में हो रहा है जब निर्वाचन आयोग मतदाता सूची की शुद्धता के साथ-साथ मतदाता जागरूकता और चुनावी भागीदारी बढ़ाने पर भी जोर दे रहा है।
एक तरफ SIR के जरिए मतदाता सूचियों की समीक्षा और सत्यापन किया गया, वहीं दूसरी तरफ ELC 2.0 जैसे कार्यक्रमों के जरिए नई पीढ़ी को लोकतांत्रिक व्यवस्था से जोड़ने की तैयारी है। यानी आयोग की रणनीति में स्वच्छ मतदाता सूची, अधिक मतदान और जागरूक मतदाता तीनों पहलुओं को प्रमुखता दी जा रही है।
बिहार में 67.25 प्रतिशत मतदान का रिकॉर्ड इस पूरी प्रक्रिया के बीच एक महत्वपूर्ण आंकड़ा बनकर सामने आया है। मुख्य निर्वाचन आयुक्त ने इसे राज्य की लोकतांत्रिक परंपरा और मतदाताओं की सक्रिय भागीदारी से जोड़ते हुए रेखांकित किया।
वैशाली से आधुनिक लोकतंत्र तक बिहार की यात्रा
ज्ञानेश कुमार ने बिहार को लोकतंत्र की ऐतिहासिक भूमि बताते हुए वैशाली का उल्लेख किया। वैशाली का नाम प्राचीन गणतांत्रिक परंपराओं के संदर्भ में लिया जाता है। ऐसे में बिहार में चुनावी प्रक्रिया और लोकतांत्रिक भागीदारी को लेकर निर्वाचन आयोग का विशेष जोर प्रतीकात्मक रूप से भी महत्वपूर्ण है।
आज जब चुनावी प्रक्रिया तेजी से तकनीक आधारित हो रही है, मतदाता सूची के डिजिटल प्रबंधन से लेकर मतदाता जागरूकता तक कई स्तरों पर बदलाव देखने को मिल रहे हैं। बिहार में SIR और ELC 2.0 जैसी पहल इसी बदलते निर्वाचन तंत्र की तस्वीर पेश करती हैं।
2025 के विधानसभा चुनाव में रिकॉर्ड 67.25 प्रतिशत मतदान के बाद आयोग अब यह सुनिश्चित करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है कि मतदाता सूची अधिक सटीक हो, मतदान प्रक्रिया अधिक सुगम बने और खासकर युवा मतदाता लोकतंत्र की प्रक्रिया से सालभर जुड़े रहें।
कुल मिलाकर, बिहार में SIR के बाद रिकॉर्ड मतदान और अब ELC 2.0 की शुरुआत निर्वाचन आयोग के उस व्यापक प्रयास की ओर इशारा करती है, जिसमें चुनावी व्यवस्था को अधिक पारदर्शी, सहभागी और डिजिटल बनाने पर जोर दिया जा रहा है।














