“सेक्टर-105 के आरडब्ल्यूए अध्यक्ष दिव्य कृष्णात्रेय बोले— ‘अपनी ईगो और गंदगी घर तक रखें, सार्वजनिक स्थानों को बदतमीजी का अखाड़ा न बनाएं’; खतरनाक नस्लों के कुत्तों पर सख्त नियम लागू करने की मांग तेज”
नोएडा शहर को देश के सबसे आधुनिक, व्यवस्थित और स्वच्छ शहरों में गिना जाता है। करोड़ों रुपये की विकास योजनाएं, स्मार्ट इंफ्रास्ट्रक्चर, चौड़ी सड़कें, हरित पार्क और बेहतर कानून-व्यवस्था इसकी पहचान हैं। नोएडा प्राधिकरण, पुलिस कमिश्नरेट और विभिन्न सामाजिक संस्थाएं लगातार शहर को साफ-सुथरा, सुरक्षित और नागरिकों के लिए बेहतर बनाने की दिशा में कार्य कर रही हैं। लेकिन इसी शहर में कुछ लोगों की लापरवाही और तथाकथित ‘स्टेटस सिंबल’ की मानसिकता अब आम नागरिकों की सुरक्षा और स्वच्छता के लिए गंभीर चुनौती बनती जा रही है।
इसी मुद्दे को लेकर सेक्टर-105 रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन (RWA) के अध्यक्ष दिव्य कृष्णात्रेय ने सार्वजनिक रूप से तीखी नाराजगी जताई है। उन्होंने कहा कि कुछ लोग अपने पालतू कुत्तों को बिना मज़ल (मुँह का पट्टा) और बिना पर्याप्त नियंत्रण के सार्वजनिक पार्कों, गलियों और सड़कों पर घुमाते हैं। इतना ही नहीं, कई लोग अपने पालतू जानवरों से दूसरों के घरों के सामने, मुख्य गेट और सार्वजनिक स्थानों पर गंदगी करवाकर बिना सफाई किए वहां से चले जाते हैं। यह केवल असभ्यता नहीं बल्कि सामाजिक जिम्मेदारी से मुंह मोड़ने जैसा व्यवहार है।
सार्वजनिक सुरक्षा पर मंडरा रहा बड़ा खतरा
आरडब्ल्यूए अध्यक्ष दिव्य कृष्णात्रेय का कहना है कि पिछले कुछ वर्षों में देशभर में पिटबुल, जर्मन शेफर्ड और अन्य बड़ी नस्लों के कुत्तों द्वारा बच्चों, महिलाओं और बुजुर्गों पर हमलों की घटनाएं लगातार सामने आई हैं। इसके बावजूद कुछ लोग इन कुत्तों को बिना मज़ल और बिना उचित सुरक्षा व्यवस्था के सार्वजनिक स्थानों पर घुमाते हैं।
उन्होंने कहा कि पार्कों में सुबह-शाम बड़ी संख्या में बच्चे खेलते हैं, बुजुर्ग टहलते हैं और महिलाएं व्यायाम करती हैं। ऐसे में यदि कोई खूंखार या आक्रामक स्वभाव का कुत्ता अचानक नियंत्रण से बाहर हो जाए तो किसी भी समय बड़ा हादसा हो सकता है। यह केवल पशु प्रेम का विषय नहीं बल्कि सीधे-सीधे जनसुरक्षा का मामला है।
दूसरों के दरवाजे को बना दिया ‘डॉग टॉयलेट’
दिव्य कृष्णात्रेय ने सबसे गंभीर समस्या सार्वजनिक स्थानों पर फैलाई जा रही गंदगी को बताया। उन्होंने कहा कि कई पेट-ओनर्स अपने घरों को तो चमकाकर रखते हैं, लेकिन अपने पालतू कुत्तों से पड़ोसियों के घरों के सामने, मुख्य गेट, पार्कों और सड़कों पर मल-मूत्र करवाकर बिना सफाई किए चले जाते हैं।
इससे न केवल दुर्गंध फैलती है बल्कि संक्रमण और बीमारियों का खतरा भी बढ़ जाता है। कई बार बारिश के दौरान यह गंदगी पूरे इलाके में फैल जाती है, जिससे लोगों का निकलना तक मुश्किल हो जाता है। उन्होंने कहा कि स्वच्छ भारत अभियान और नोएडा को साफ रखने की कोशिशों के बीच ऐसी हरकतें पूरे समाज के प्रति गैर-जिम्मेदार रवैये को दर्शाती हैं।
आवारा कुत्तों की बढ़ती संख्या पर भी चिंता
आरडब्ल्यूए अध्यक्ष ने एक और गंभीर मुद्दा उठाते हुए कहा कि शहर में जगह-जगह सार्वजनिक स्थानों पर बड़ी मात्रा में खाद्य सामग्री डालने की प्रवृत्ति भी तेजी से बढ़ी है। उनका कहना है कि इससे आवारा कुत्तों के बड़े झुंड एकत्र हो जाते हैं, जिससे स्थानीय निवासियों, बच्चों और राहगीरों के लिए खतरा बढ़ जाता है।
उन्होंने कहा कि सड़कों पर बिखरा भोजन और गंदगी कई बार लोगों के फिसलने का कारण बनती है और दुर्घटनाओं की आशंका बनी रहती है। उनका आरोप है कि इस प्रकार की गतिविधियां न्यायालय द्वारा समय-समय पर दिए गए सार्वजनिक व्यवस्था संबंधी दिशा-निर्देशों की भावना के भी विपरीत हैं।
टोकने पर शुरू हो जाती है बहसबाजी
दिव्य कृष्णात्रेय ने कहा कि सबसे चिंताजनक बात यह है कि जब कोई जागरूक नागरिक नियमों का पालन करने या गंदगी साफ करने के लिए कहता है तो कुछ पेट-ओनर्स सहयोग करने के बजाय बहस और विवाद पर उतर आते हैं।
उनके अनुसार इस तरह का व्यवहार केवल सामाजिक सौहार्द को प्रभावित नहीं करता बल्कि कई बार झगड़े और कानून-व्यवस्था की स्थिति भी उत्पन्न कर देता है। उन्होंने कहा कि सार्वजनिक स्थान किसी एक व्यक्ति की निजी संपत्ति नहीं हैं और हर नागरिक का दायित्व है कि वह दूसरों के अधिकारों और सुरक्षा का सम्मान करे।
‘स्टेटस सिंबल’ पर दिव्य कृष्णात्रेय का तीखा बयान
आरडब्ल्यूए अध्यक्ष ने बेपरवाह पेट-ओनर्स को स्पष्ट संदेश देते हुए कहा,
“अपनी ईगो और गंदगी को अपने घर के ड्राइंग रूम तक सीमित रखें। सार्वजनिक सड़कों और दूसरों के घर के दरवाज़ों को अपनी बदतमीजी का अखाड़ा न बनाएं। कानून और जनसुरक्षा से बढ़कर किसी का स्टेटस सिंबल नहीं हो सकता।”
उन्होंने कहा कि पालतू जानवर रखना गलत नहीं है, लेकिन उसके साथ नागरिक जिम्मेदारी निभाना भी उतना ही आवश्यक है। यदि कोई व्यक्ति नियमों का पालन नहीं करता और उसकी वजह से दूसरों की जान या स्वास्थ्य खतरे में पड़ता है तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।
पुलिस और प्राधिकरण के सामने रखीं प्रमुख मांगें
आरडब्ल्यूए सेक्टर-105 ने प्रशासन के समक्ष कई महत्वपूर्ण मांगें रखी हैं। संगठन ने नोएडा पुलिस कमिश्नरेट से अपील की है कि सार्वजनिक सुरक्षा को खतरे में डालने और शांति भंग करने वाले गैर-जिम्मेदार पेट-ओनर्स के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की संबंधित धाराओं के तहत कानूनी कार्रवाई की जाए।
इसके अलावा नोएडा प्राधिकरण से मांग की गई है कि—
- नियमों का उल्लंघन करने वाले पेट-ओनर्स पर भारी आर्थिक जुर्माना लगाया जाए।
- सार्वजनिक स्थानों पर पालतू कुत्तों की गंदगी साफ न करने वालों के खिलाफ विशेष अभियान चलाया जाए।
- खतरनाक और प्रतिबंधित प्रजातियों के कुत्तों के लिए सख्त सुरक्षा नियम लागू किए जाएं।
- सार्वजनिक पार्कों और संकरे रास्तों में बिना सुरक्षा उपकरण के ऐसे कुत्तों के प्रवेश पर प्रभावी नियंत्रण किया जाए।
- नागरिकों में जिम्मेदार पेट-ओनरशिप को लेकर व्यापक जागरूकता अभियान चलाया जाए।
जनहित में सख्त कार्रवाई की मांग
आरडब्ल्यूए का कहना है कि यह किसी वर्ग विशेष के खिलाफ अभियान नहीं बल्कि आम नागरिकों की सुरक्षा, स्वच्छता और सामाजिक अनुशासन का विषय है। यदि समय रहते प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई तो भविष्य में किसी बड़ी दुर्घटना से इनकार नहीं किया जा सकता।
शहर के कई निवासी भी मानते हैं कि जिम्मेदार पेट-ओनर्स और लापरवाह लोगों के बीच स्पष्ट अंतर होना चाहिए। नियमों का पालन करने वाले नागरिकों को किसी प्रकार की परेशानी नहीं होगी, जबकि सार्वजनिक सुरक्षा और स्वच्छता से खिलवाड़ करने वालों के खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई आवश्यक है।
नोएडा जैसे स्मार्ट शहर की पहचान केवल आधुनिक इमारतों और चौड़ी सड़कों से नहीं, बल्कि नागरिक अनुशासन और सामूहिक जिम्मेदारी से भी बनती है। ऐसे में अब निगाहें नोएडा पुलिस कमिश्नरेट और नोएडा प्राधिकरण पर टिकी हैं कि वे आरडब्ल्यूए की मांगों पर क्या कदम उठाते हैं और शहर को सुरक्षित, स्वच्छ तथा व्यवस्थित बनाए रखने के लिए किस प्रकार की नई व्यवस्था लागू करते हैं।














