Wednesday, August 5, 2026
Your Dream Technologies
HomeInternational150 से ज्यादा केस, फांसी का खतरा... फिर भी बांग्लादेश लौटना चाहती...

150 से ज्यादा केस, फांसी का खतरा… फिर भी बांग्लादेश लौटना चाहती हैं शेख हसीना, जानिए क्या है इसके पीछे की रणनीति

ढाका/नई दिल्ली: बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना ने संकेत दिया है कि वह वर्ष 2026 के अंत तक अपने देश लौट सकती हैं। यह फैसला इसलिए भी चौंकाने वाला है क्योंकि उनके खिलाफ बांग्लादेश में 150 से अधिक आपराधिक मामले दर्ज हैं, कई मामलों में दोषसिद्धि हो चुकी है और एक मामले में उन्हें मौत की सजा भी सुनाई जा चुकी है। इसके बावजूद उनका कहना है कि वह अपने देश वापस जाएंगी क्योंकि “मेरे लोग मुझे बुला रहे हैं।”

यह बयान ऐसे समय आया है जब बांग्लादेश की राजनीति तख्तापलट के दो वर्ष बाद भी अस्थिर बनी हुई है और देश में सत्ता परिवर्तन के बाद नई राजनीतिक परिस्थितियां तेजी से बदल रही हैं।

तख्तापलट के बाद से भारत में रह रही हैं हसीना

जुलाई 2024 में हुए व्यापक विरोध प्रदर्शनों और सत्ता परिवर्तन के बाद शेख हसीना बांग्लादेश छोड़कर भारत आ गई थीं। तब से वह नई दिल्ली में रह रही हैं। उनके खिलाफ हत्या, भ्रष्टाचार, मानवता के खिलाफ अपराध और सत्ता के दुरुपयोग समेत कई मामलों में मुकदमे दर्ज किए गए।

हाल ही में एक अदालत ने मानवता के खिलाफ अपराध के मामले में उन्हें मौत की सजा सुनाई। ऐसे में उनकी संभावित वापसी को लेकर राजनीतिक और सुरक्षा दोनों स्तरों पर चर्चा तेज हो गई है।

आखिर क्यों लौटना चाहती हैं शेख हसीना?

अपनी राजनीतिक विरासत बचाने की कोशिश

विश्लेषकों का मानना है कि शेख हसीना अपने राजनीतिक जीवन का अंतिम अध्याय अपने देश में लिखना चाहती हैं। उनके पिता शेख मुजीबुर रहमान बांग्लादेश के संस्थापक माने जाते हैं। ऐसे में वह निर्वासन में रहने के बजाय अपने समर्थकों के बीच लौटकर अपनी विरासत को मजबूत करना चाहती हैं।

आवामी लीग का जनाधार अब भी मौजूद

हाल के कुछ सर्वेक्षणों के अनुसार, बांग्लादेश में बड़ी संख्या में लोग अब भी आवामी लीग को देश की प्रमुख राजनीतिक ताकत मानते हैं। पार्टी पर प्रतिबंध और नेताओं की गिरफ्तारी के बावजूद उसका एक मजबूत समर्थक वर्ग मौजूद है।

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यदि हसीना स्वयं देश लौटती हैं तो पार्टी कार्यकर्ताओं का मनोबल बढ़ सकता है।

कट्टरपंथ के खिलाफ राजनीति

शेख हसीना लंबे समय से खुद को धर्मनिरपेक्ष राजनीति का चेहरा बताती रही हैं। उनके समर्थकों का दावा है कि वर्तमान राजनीतिक माहौल में कट्टरपंथी संगठनों का प्रभाव बढ़ा है, जिसे रोकने के लिए उनकी वापसी जरूरी है।

मौजूदा सरकार को चुनौती देने की तैयारी

नई सरकार के कई फैसलों और चुनावी वादों को लेकर विपक्ष लगातार सवाल उठा रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि हसीना अपनी वापसी के जरिए यह संदेश देना चाहती हैं कि उनके शासनकाल की नीतियां बेहतर थीं और वर्तमान सरकार जनता की उम्मीदों पर खरी नहीं उतरी है।

आवामी लीग के भविष्य की चिंता

अगर शेख हसीना लंबे समय तक देश से बाहर रहती हैं तो आवामी लीग का संगठन और कमजोर हो सकता है। पार्टी नेतृत्व मानता है कि उनकी मौजूदगी ही कार्यकर्ताओं को एकजुट रख सकती है। इसी कारण उनकी वापसी को संगठन बचाने की रणनीति के रूप में भी देखा जा रहा है।

आर्थिक मुद्दों को राजनीतिक हथियार बनाने की कोशिश

आवामी लीग का आरोप है कि सत्ता परिवर्तन के बाद बांग्लादेश की आर्थिक रफ्तार धीमी हुई है, विदेशी निवेश प्रभावित हुआ है और कई उद्योगों पर दबाव बढ़ा है। पार्टी इन मुद्दों को जनता के बीच प्रमुख चुनावी मुद्दा बनाना चाहती है।

वापसी आसान नहीं होगी

हालांकि शेख हसीना ने लौटने की इच्छा जताई है, लेकिन उनके सामने कानूनी और सुरक्षा संबंधी बड़ी चुनौतियां हैं। बांग्लादेश लौटते ही उन्हें गिरफ्तार किया जा सकता है और अदालतों में चल रहे मामलों का सामना करना पड़ सकता है।

राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि उनकी वापसी केवल व्यक्तिगत फैसला नहीं बल्कि बांग्लादेश की राजनीति में एक बड़े शक्ति संघर्ष की शुरुआत भी साबित हो सकती है।

आगे क्या?

यदि शेख हसीना वास्तव में 2026 के अंत तक बांग्लादेश लौटती हैं, तो इससे देश की राजनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। उनकी वापसी समर्थकों को नई ऊर्जा दे सकती है, वहीं विरोधी दलों और सरकार के लिए भी यह एक नई राजनीतिक चुनौती होगी।

- Advertisement -
Your Dream Technologies
RELATED ARTICLES
- Advertisment -

Most Popular

Recent Comments

Call Now Button