अफगानिस्तान से लगी ताजिकिस्तान की सीमा पर सुरक्षा को लेकर रूस की सक्रियता बढ़ गई है। मॉस्को ने ताजिकिस्तान की दक्षिणी सीमा को मजबूत करने के लिए तकनीकी उपकरण, सैन्य साजो-सामान और हथियार उपलब्ध कराने की बात कही है। रूस का कहना है कि वह अफगानिस्तान से जुड़े संभावित सुरक्षा खतरों पर लगातार नजर बनाए हुए है।
ताजिक सीमा को मजबूत करने में रूस की मदद
रूसी विदेश मंत्रालय के CIS मामलों के तीसरे विभाग के निदेशक अलेक्जेंडर स्टर्निक के अनुसार, रूस की सुरक्षा एजेंसियां ताजिक सीमा बलों को आधुनिक तकनीकी उपकरण और सैन्य संसाधन उपलब्ध करा रही हैं। यह सहयोग दोनों देशों के बीच सुरक्षा साझेदारी का हिस्सा है।
इसके अलावा, ताजिकिस्तान-अफगानिस्तान सीमा को मजबूत करने के लिए CSTO यानी कलेक्टिव सिक्योरिटी ट्रीटी ऑर्गनाइजेशन के पांच वर्षीय कार्यक्रम के तहत भी सहायता दी जा रही है। इस कार्यक्रम को 2024 में मंजूरी दी गई थी। इसका उद्देश्य सीमा की निगरानी बढ़ाना और ताजिक सीमा बलों की क्षमता को मजबूत करना है।
1,300 किलोमीटर लंबी सीमा बनी चिंता का कारण
ताजिकिस्तान की अफगानिस्तान के साथ करीब 1,300 किलोमीटर लंबी सीमा है। अफगान क्षेत्र में सक्रिय हथियारबंद समूहों, संभावित घुसपैठ और सीमा पार हिंसा को लेकर क्षेत्रीय देशों की चिंता बनी हुई है।
इसी वजह से CSTO ने भी ताजिकिस्तान की सीमा सुरक्षा मजबूत करने के लिए सैन्य उपकरण उपलब्ध कराने की योजना बनाई है। रूस इस पूरी प्रक्रिया में अहम भूमिका निभा रहा है।
ताजिकिस्तान में रूस का 201वां मिलिट्री बेस
ताजिकिस्तान में रूस का 201वां मिलिट्री बेस भी मौजूद है, जो मध्य एशिया में मॉस्को की महत्वपूर्ण सैन्य मौजूदगी को दर्शाता है। रूस लंबे समय से ताजिक-अफगान सीमा की सुरक्षा को अपनी क्षेत्रीय सुरक्षा प्राथमिकताओं में शामिल करता रहा है।
मॉस्को में अफगानिस्तान पर बड़ी बैठक
इसी बीच मॉस्को में अफगानिस्तान पर मॉस्को फॉर्मेट की आठवीं बैठक आयोजित की जा रही है। इसमें भारत, रूस, चीन, ईरान, पाकिस्तान, ताजिकिस्तान, कजाकिस्तान, किर्गिस्तान और उज्बेकिस्तान समेत क्षेत्रीय देशों के प्रतिनिधि शामिल हो रहे हैं।
बैठक में अफगानिस्तान के साथ राजनीतिक और आर्थिक सहयोग के अलावा आतंकवाद, कट्टरपंथ और ड्रग तस्करी जैसे मुद्दों पर क्षेत्रीय सहयोग को लेकर चर्चा होने की उम्मीद है।
रूस का रणनीतिक संदेश
रूस की बढ़ती सक्रियता से संकेत मिलता है कि मॉस्को अफगानिस्तान की अस्थिरता को मध्य एशिया के दूसरे देशों तक फैलने से रोकने को लेकर गंभीर है। ताजिकिस्तान की सीमा को मजबूत करना जहां उसकी सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण है, वहीं रूस और CSTO के लिए भी यह एक अहम रणनीतिक मुद्दा है।
अफगान सीमा पर रूस की सैन्य और तकनीकी मदद को मध्य एशिया में अपनी सुरक्षा और रणनीतिक भूमिका मजबूत रखने की मॉस्को की कोशिश के तौर पर भी देखा जा रहा है।















