Wednesday, August 5, 2026
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राम मंदिर से उपचुनाव तक संसद में सियासी महाभारत: हंगामे में डूबा 12वां दिन, रोजगार और चुनावी नतीजों पर सरकार-विपक्ष आमने-सामने

“राम मंदिर चढ़ावा चोरी के आरोपों पर विपक्ष का जोरदार प्रदर्शन, सरकार का पलटवार। दतिया और बांकीपुर उपचुनाव के नतीजों पर सियासी तकरार तेज, वहीं NDA बैठक में 17 करोड़ रोजगार का दावा बना सरकार का बड़ा हथियार”


नई दिल्ली: संसद के मानसून सत्र का 12वां दिन भी जोरदार हंगामे की भेंट चढ़ गया। मंगलवार को लोकसभा और राज्यसभा दोनों सदनों में राम मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी के मुद्दे पर विपक्ष ने सरकार को घेरते हुए जमकर नारेबाजी की। विपक्षी सांसदों ने तख्तियां लहराईं, सरकार के खिलाफ तीखे आरोप लगाए और सदन की कार्यवाही बार-बार बाधित होती रही। दूसरी ओर सरकार ने विपक्ष के आरोपों का जवाब देते हुए पलटवार किया और संसद के बाहर उपचुनावों के नतीजों से लेकर रोजगार के आंकड़ों तक राजनीतिक बहस छिड़ी रही।

दिनभर संसद परिसर में सत्ता और विपक्ष के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर चलता रहा। जहां विपक्ष ने राम मंदिर, बेरोजगारी और उपचुनाव के नतीजों को लेकर सरकार पर निशाना साधा, वहीं भाजपा ने रोजगार के आंकड़े, विकास कार्यों और विपक्ष के राजनीतिक रवैये को मुद्दा बनाकर जवाब दिया। संसद के भीतर और बाहर दोनों जगह राजनीतिक तापमान चरम पर दिखाई दिया।


राम मंदिर के मुद्दे पर गरमाया संसद का माहौल

संसद की कार्यवाही शुरू होते ही विपक्ष ने अयोध्या राम मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी के मामले को लेकर सरकार को घेरना शुरू कर दिया। विपक्षी सांसदों ने सदन में नारेबाजी करते हुए इस मुद्दे पर विस्तृत चर्चा की मांग की। लोकसभा और राज्यसभा दोनों में विपक्षी दलों के सांसद तख्तियां लेकर पहुंचे और सरकार से जवाब मांगने लगे।

हंगामे के बीच कई बार कार्यवाही स्थगित करनी पड़ी। हालांकि इसी दौरान वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने टैक्स संशोधन से जुड़ा महत्वपूर्ण विधेयक सदन में पेश किया, लेकिन शोर-शराबे के कारण उस पर अपेक्षित चर्चा नहीं हो सकी। सदन में बहस से ज्यादा राजनीतिक नारों की गूंज सुनाई देती रही।


किरण रिजिजू का विपक्ष पर तीखा पलटवार

विपक्ष के हमलों का जवाब देते हुए संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि जो दल कभी राम मंदिर निर्माण का विरोध करते थे, वही आज राम के नाम पर राजनीति कर रहे हैं।

रिजिजू ने कहा कि विपक्ष जनता की भावनाओं का सम्मान करने के बजाय राजनीतिक लाभ के लिए धार्मिक मुद्दों का इस्तेमाल कर रहा है। भाजपा नेताओं ने इसे विपक्ष की दोहरी राजनीति बताते हुए कहा कि जनता सब कुछ देख रही है।


संसद के गलियारों में छाया उपचुनाव का गणित

जहां सदन के भीतर राम मंदिर का मुद्दा छाया रहा, वहीं संसद के गलियारों में सबसे ज्यादा चर्चा बिहार के बांकीपुर और मध्य प्रदेश के दतिया उपचुनाव के नतीजों की होती रही।

भाजपा सांसद अपने-अपने स्तर पर हार के कारणों की समीक्षा करते नजर आए। कोई स्थानीय संगठन की कमजोरी की बात कर रहा था तो कोई जातीय समीकरणों और कम मतदान प्रतिशत को हार की वजह बता रहा था। वहीं विपक्षी दलों के सांसद इन नतीजों को भाजपा के खिलाफ जनता के बदलते मूड का संकेत बताते रहे।


प्रियंका गांधी बोलीं— यह सिर्फ शुरुआत है

कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी ने उपचुनाव परिणामों को लेकर भाजपा पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि दतिया और बांकीपुर के नतीजे साफ संकेत दे रहे हैं कि जनता भाजपा से निराश हो चुकी है।

प्रियंका गांधी ने कहा कि इन चुनाव परिणामों को केवल दो सीटों की जीत या हार के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए, बल्कि यह आने वाले बड़े चुनावी बदलाव की शुरुआत है। उन्होंने दावा किया कि जनता अब बदलाव चाहती है और इसका असर आगामी विधानसभा चुनावों में भी देखने को मिलेगा।


भाजपा का जवाब— उपचुनाव और विधानसभा चुनाव अलग होते हैं

प्रियंका गांधी के बयान पर भाजपा सांसद विवेक ठाकुर ने पलटवार करते हुए कहा कि लोकतंत्र में हार-जीत सामान्य प्रक्रिया है और हर उपचुनाव के बाद पार्टी आत्ममंथन करती है।

उन्होंने कहा कि पहले भी कई उपचुनावों में भाजपा को झटका लगा था, लेकिन बाद में विधानसभा चुनावों में पार्टी ने शानदार प्रदर्शन किया। उन्होंने कहा कि केवल उपचुनाव के नतीजों के आधार पर भविष्य की राजनीति का आकलन करना उचित नहीं होगा।

भाजपा नेताओं का कहना है कि उपचुनाव स्थानीय मुद्दों पर लड़े जाते हैं, जबकि विधानसभा और लोकसभा चुनावों में जनता व्यापक राष्ट्रीय और राज्य स्तरीय मुद्दों को ध्यान में रखकर मतदान करती है।


NDA बैठक में रोजगार बना सबसे बड़ा मुद्दा

संसद की कार्यवाही शुरू होने से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मौजूदगी में एनडीए संसदीय दल की बैठक हुई। बैठक में सरकार ने विपक्ष के बेरोजगारी के आरोपों का जवाब देने की रणनीति तैयार की।

केंद्रीय श्रम एवं रोजगार मंत्री मनसुख मांडविया ने सांसदों के सामने रोजगार का विस्तृत रिपोर्ट कार्ड प्रस्तुत किया। उन्होंने विभिन्न सरकारी योजनाओं, कौशल विकास कार्यक्रमों और रोजगार सृजन के आंकड़ों के माध्यम से सरकार की उपलब्धियां गिनाईं।


सरकार का दावा— दस वर्षों में बने 17 करोड़ रोजगार

बैठक में सरकार ने दावा किया कि वर्ष 2014 से 2024 के बीच देश में 17 करोड़ से अधिक नए रोजगार के अवसर पैदा हुए हैं। इसके अलावा स्किल डेवलपमेंट, स्वरोजगार, सामाजिक सुरक्षा योजनाओं और रोजगार से जुड़ी कई पहल का भी विस्तृत विवरण सांसदों को दिया गया।

सरकार का कहना है कि प्रधानमंत्री मुद्रा योजना, स्टार्टअप इंडिया, स्किल इंडिया, पीएम विश्वकर्मा योजना और डिजिटल अर्थव्यवस्था के विस्तार ने करोड़ों युवाओं को रोजगार उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

हालांकि विपक्ष इन आंकड़ों पर सवाल उठा रहा है और उसका आरोप है कि देश का युवा आज भी रोजगार के संकट से जूझ रहा है।


बेरोजगारी पर सरकार-विपक्ष आमने-सामने

एक ओर विपक्ष संसद के बाहर लगातार बेरोजगारी का मुद्दा उठाकर सरकार को घेर रहा था, तो दूसरी ओर सरकार अपने रोजगार संबंधी आंकड़ों के जरिए यह साबित करने की कोशिश कर रही थी कि पिछले एक दशक में रोजगार के अवसरों में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।

विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में रोजगार, महंगाई और युवाओं से जुड़े मुद्दे देश की राजनीति के सबसे महत्वपूर्ण विषय बने रहेंगे।


हंगामे के बीच प्रभावित हुई संसदीय कार्यवाही

मंगलवार को लगातार हंगामे के कारण संसद की कार्यवाही कई बार स्थगित करनी पड़ी। विपक्ष की नारेबाजी और सरकार के जवाबी तेवरों के बीच कई महत्वपूर्ण विधायी कार्य प्रभावित हुए।

संसदीय कार्यवाही बाधित होने पर सत्ता पक्ष ने विपक्ष पर लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं को बाधित करने का आरोप लगाया, जबकि विपक्ष ने कहा कि सरकार संवेदनशील मुद्दों पर चर्चा से बच रही है।


आगे क्या?

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि राम मंदिर, उपचुनाव के नतीजे, बेरोजगारी और आगामी विधानसभा चुनावों का असर आने वाले दिनों में संसद के भीतर और बाहर दोनों जगह दिखाई देगा। विपक्ष इन मुद्दों को लेकर सरकार पर दबाव बनाए रखने की रणनीति पर काम कर रहा है, जबकि भाजपा विकास, रोजगार और जनकल्याणकारी योजनाओं के जरिए अपनी राजनीतिक बढ़त बनाए रखने की कोशिश कर रही है।

मानसून सत्र के आगामी दिनों में भी सदन के शांतिपूर्ण संचालन की संभावना कम दिखाई दे रही है। सरकार विधायी कार्यों को आगे बढ़ाना चाहती है, जबकि विपक्ष जनहित के मुद्दों पर चर्चा की मांग को लेकर आक्रामक रुख अपनाए हुए है। ऐसे में संसद का अगला सप्ताह भी राजनीतिक टकराव और तीखी बहसों का गवाह बन सकता है।

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VIKAS TRIPATHI
VIKAS TRIPATHIhttp://www.pardaphaas.com
VIKAS TRIPATHI भारत देश की सभी छोटी और बड़ी खबरों को सामने दिखाने के लिए "पर्दाफास न्यूज" चैनल को लेके आए हैं। जिसके लोगो के बीच में करप्शन को कम कर सके। हम देश में समान व्यवहार के साथ काम करेंगे। देश की प्रगति को बढ़ाएंगे।
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