नई दिल्ली:राम मंदिर में कथित चढ़ावा चोरी के मुद्दे को लेकर संसद परिसर में हुए विपक्ष के विरोध प्रदर्शन की गूंज अब संसद से निकलकर सड़क और पुलिस जांच तक पहुंच गई है। पूर्णिया से निर्दलीय सांसद पप्पू यादव पर रविवार को उनके दिल्ली स्थित आवास पर आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान चप्पल फेंक दी गई। घटना के बाद वहां अफरा-तफरी मच गई और समर्थकों व हमलावर के बीच हाथापाई हो गई। पप्पू यादव ने इसे अपनी हत्या की साजिश बताते हुए कहा कि वे डरने वाले नहीं हैं। वहीं, घटना में शामिल बताए जा रहे आरोपी के साथी ने दावा किया कि वे किसी प्रकार का हथियार लेकर नहीं गए थे और केवल सवाल पूछना चाहते थे।
संसद में प्रदर्शन से शुरू हुआ पूरा विवाद
पूरा विवाद शुक्रवार को संसद परिसर में उस समय शुरू हुआ जब विपक्षी सांसदों ने अयोध्या राम मंदिर में कथित चढ़ावा चोरी के विरोध में अनोखा प्रदर्शन किया। मकर द्वार के सामने आयोजित इस विरोध प्रदर्शन में कांग्रेस नेता राहुल गांधी सहित कई विपक्षी सांसद शामिल हुए।
प्रदर्शन के दौरान सांसदों ने प्रतीकात्मक रूप से दान पेटी में पैसे डाले। वहीं, पप्पू यादव ने कथित तौर पर यह दिखाने की कोशिश की कि यदि मंदिर में चोरी होती है तो पैसे जेब में चले जाते हैं। इसी प्रतीकात्मक अभिनय ने राजनीतिक और धार्मिक विवाद को जन्म दे दिया।
इस प्रदर्शन का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ, जिसके बाद भारतीय जनता पार्टी, हिंदू संगठनों और कई धार्मिक संस्थाओं ने इसे भगवान राम और राम मंदिर का अपमान बताते हुए कड़ी आपत्ति जताई।
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान हुआ हंगामा
रविवार को पप्पू यादव ने अपने दिल्ली स्थित आवास पर प्रेस कॉन्फ्रेंस बुलाकर संसद में किए गए प्रदर्शन का बचाव किया। उन्होंने कहा कि उनका उद्देश्य किसी की धार्मिक भावना को ठेस पहुंचाना नहीं था बल्कि राम मंदिर में कथित वित्तीय अनियमितताओं पर सवाल उठाना था।
इसी दौरान मौजूद लोगों में से एक युवक अचानक खड़ा हुआ और पप्पू यादव पर भगवान राम के अपमान का आरोप लगाते हुए उन पर चप्पल फेंक दी। चप्पल फेंकते ही वहां मौजूद समर्थक हमलावर पर टूट पड़े और कुछ देर के लिए माहौल पूरी तरह तनावपूर्ण हो गया।
दिल्ली पुलिस ने तुरंत हस्तक्षेप कर स्थिति को नियंत्रित किया और आरोपी को हिरासत में ले लिया।
‘मेरी हत्या की साजिश रची जा रही है’
घटना के बाद पप्पू यादव ने इसे सामान्य विरोध नहीं बल्कि एक सुनियोजित हमला बताया। उन्होंने कहा कि कुछ लोग उनकी आवाज दबाना चाहते हैं और उनकी हत्या की साजिश रची जा रही है।
उन्होंने कहा कि वे ऐसे हमलों से डरने वाले नहीं हैं और जनहित के मुद्दों को उठाते रहेंगे। सांसद ने यह भी आरोप लगाया कि राजनीतिक विरोधियों द्वारा माहौल को जानबूझकर भड़काया जा रहा है।
आरोपी के साथी का दावा—’हम चाकू नहीं लेकर गए थे’
इस पूरे मामले में आरोपी सुमित के साथी हैप्पी शर्मा का वीडियो भी सामने आया है। उसने मीडिया से बातचीत में कहा कि वे किसी भी तरह का हथियार लेकर नहीं गए थे।
हैप्पी ने कहा,
“हम भगवान और साधु-संतों का मजाक बर्दाश्त नहीं करेंगे। हम सिर्फ पप्पू यादव से सवाल पूछने गए थे। हमारे पास कोई चाकू नहीं था। हमें झूठे मामले में फंसाने की कोशिश की जा रही है।”
उसने यह भी दावा किया कि पप्पू यादव के समर्थकों ने बिना किसी कारण उनके साथ मारपीट शुरू कर दी।
कौन है आरोपी सुमित?
पुलिस के अनुसार आरोपी की पहचान 34 वर्षीय सुमित के रूप में हुई है। वह उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर का रहने वाला है और गाजियाबाद में स्क्रैप तथा लोहे के सामान का कारोबार करता है।
बताया गया है कि वह अपने साथी हैप्पी के साथ कार की मरम्मत कराने दिल्ली आया था। इसी दौरान दोनों ने इंटरनेट पर पप्पू यादव का पता खोजा और उनसे मिलने उनके आवास पहुंच गए।
पुलिस का कहना है कि आरोपी का अब तक कोई आपराधिक रिकॉर्ड सामने नहीं आया है। हालांकि घटना के पीछे की वास्तविक मंशा की जांच की जा रही है।
दिल्ली पुलिस की जांच जारी
दिल्ली पुलिस ने आरोपी सुमित को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी है। वहीं, उसके साथी हैप्पी की तलाश जारी है।
पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि क्या यह हमला पहले से योजनाबद्ध था या फिर मौके पर अचानक हुई प्रतिक्रिया थी। साथ ही आरोपी के मोबाइल फोन, कॉल डिटेल और सोशल मीडिया गतिविधियों की भी जांच की जा रही है।
वाराणसी में दर्ज हुई एफआईआर
संसद परिसर में हुए प्रदर्शन के बाद मामला केवल राजनीतिक विरोध तक सीमित नहीं रहा। वाराणसी में धार्मिक भावनाएं आहत करने के आरोप में पप्पू यादव, लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी तथा समाजवादी पार्टी के सांसद अवधेश प्रसाद के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है।
शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि संसद परिसर में किया गया प्रदर्शन करोड़ों रामभक्तों की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाला था।
राजनीति और आस्था के बीच बढ़ता टकराव
राम मंदिर देश की आस्था का केंद्र होने के कारण उससे जुड़ा हर मुद्दा राजनीतिक बहस का विषय बन जाता है। विपक्ष का कहना है कि यदि मंदिर के चढ़ावे में किसी प्रकार की अनियमितता हुई है तो उसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।
दूसरी ओर भाजपा और हिंदू संगठनों का आरोप है कि विपक्ष ने इस मुद्दे की आड़ में भगवान राम और मंदिर की गरिमा को ठेस पहुंचाने का प्रयास किया है।
इस विवाद ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि लोकतांत्रिक विरोध और धार्मिक संवेदनशीलता के बीच संतुलन कैसे बनाया जाए।
अब आगे क्या?
दिल्ली पुलिस की जांच, वाराणसी में दर्ज एफआईआर और संसद में हुए प्रदर्शन को लेकर बढ़ते राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप के बीच यह मामला आने वाले दिनों में और तूल पकड़ सकता है। जांच एजेंसियां यह स्पष्ट करने में जुटी हैं कि पप्पू यादव पर हुआ हमला स्वतःस्फूर्त विरोध था या किसी बड़ी साजिश का हिस्सा।
फिलहाल एक ओर सांसद पप्पू यादव अपनी जान को खतरा बता रहे हैं, तो दूसरी ओर आरोपी पक्ष स्वयं को निर्दोष बताते हुए केवल सवाल पूछने की बात कह रहा है। ऐसे में इस पूरे घटनाक्रम पर अब सबकी निगाहें पुलिस जांच और न्यायिक प्रक्रिया पर टिकी हुई हैं।














