“रिजल्ट से ठीक पहले कांग्रेस का बड़ा फैसला, पार्टी विरोधी गतिविधियों के आरोप में राजेंद्र भारती पर कार्रवाई; बीजेपी पर लगाया षड्यंत्र का आरोप, 2028 में जनता से जवाब दिलाने का दावा”
दतिया। मध्य प्रदेश की राजनीति में दतिया विधानसभा उपचुनाव के नतीजों से ठीक पहले कांग्रेस ने ऐसा फैसला लिया जिसने प्रदेश की सियासत को गर्मा दिया है। पार्टी ने पूर्व विधायक राजेंद्र भारती को प्राथमिक सदस्यता से निलंबित कर दिया है। यह कार्रवाई उस समय की गई है जब दतिया उपचुनाव के परिणाम घोषित होने में कुछ ही घंटे शेष हैं। कांग्रेस का आरोप है कि राजेंद्र भारती ने चुनाव के दौरान पार्टी के अधिकृत प्रत्याशी के खिलाफ काम किया और संगठन को नुकसान पहुंचाने वाली गतिविधियों में शामिल रहे। वहीं भारती ने इस कार्रवाई को पूरी तरह राजनीतिक बताते हुए इसे भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस के कुछ नेताओं की मिलीभगत का परिणाम करार दिया है।
इस फैसले ने न केवल दतिया बल्कि पूरे मध्य प्रदेश की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि चुनाव परिणाम से पहले इस तरह की कार्रवाई कांग्रेस के अंदर चल रही खींचतान को भी उजागर करती है।
शिकायत के बाद हुई कार्रवाई
जानकारी के अनुसार कांग्रेस के अधिकृत प्रत्याशी कुंवर घनश्याम सिंह ने मतदान समाप्त होने के बाद पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, प्रदेश प्रभारी हरीश चौधरी और अन्य वरिष्ठ नेताओं को लिखित शिकायत भेजी थी। शिकायत में आरोप लगाया गया कि पूर्व विधायक राजेंद्र भारती ने चुनाव के दौरान कांग्रेस के खिलाफ काम किया और संगठन को नुकसान पहुंचाने की कोशिश की।
शिकायत मिलने के बाद पार्टी नेतृत्व ने मामले की समीक्षा की। इसके बाद कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव एवं मध्य प्रदेश प्रभारी हरीश चौधरी ने राजेंद्र भारती को पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से निलंबित करने का आदेश जारी कर दिया।
कांग्रेस का कहना है कि पार्टी अनुशासन सर्वोपरि है और किसी भी नेता को संगठन विरोधी गतिविधियों की अनुमति नहीं दी जा सकती।
दतिया उपचुनाव के बीच बढ़ी सियासी हलचल
दतिया विधानसभा सीट पर 30 जुलाई को मतदान हुआ था। निर्वाचन आयोग के अनुसार इस चुनाव में 71.44 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया, जिसे काफी अच्छा मतदान माना जा रहा है।
मतदान के बाद से ही राजनीतिक दल अपनी-अपनी जीत के दावे कर रहे हैं। लेकिन परिणाम से पहले कांग्रेस द्वारा अपने ही पूर्व विधायक पर की गई कार्रवाई ने चुनावी माहौल को और अधिक गर्म कर दिया है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस फैसले का संदेश केवल दतिया तक सीमित नहीं है, बल्कि पार्टी पूरे प्रदेश में अनुशासन को लेकर सख्त रुख दिखाना चाहती है।
राजेंद्र भारती की सदस्यता क्यों हुई थी समाप्त?
राजेंद्र भारती वर्ष 2023 के विधानसभा चुनाव में उस समय चर्चा में आए थे जब उन्होंने तत्कालीन गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा को लगभग 7,700 वोटों से हराकर बड़ा राजनीतिक उलटफेर किया था।
हालांकि इसी वर्ष अप्रैल में दिल्ली की एक अदालत ने उन्हें धोखाधड़ी के एक मामले में तीन वर्ष के कारावास की सजा सुनाई। सजा मिलने के बाद संविधान और जनप्रतिनिधित्व कानून के प्रावधानों के तहत उनकी विधानसभा सदस्यता समाप्त हो गई।
उनकी सदस्यता समाप्त होने के कारण ही दतिया विधानसभा सीट रिक्त हुई और उपचुनाव कराने की आवश्यकता पड़ी।
बीजेपी ने बदला उम्मीदवार, कांग्रेस ने घनश्याम सिंह पर जताया भरोसा
इस उपचुनाव में कांग्रेस ने कुंवर घनश्याम सिंह को मैदान में उतारा है। वहीं भारतीय जनता पार्टी ने इस बार बड़ा बदलाव करते हुए पूर्व गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा को टिकट नहीं दिया और उनकी जगह आशुतोष तिवारी को उम्मीदवार बनाया।
इसके अलावा आजाद समाज पार्टी के दामोदर सिंह यादव सहित कुल 21 उम्मीदवार चुनाव मैदान में हैं।
बीजेपी का मानना है कि नए चेहरे के साथ वह सीट पर वापसी करेगी, जबकि कांग्रेस अपनी सीट बचाने का दावा कर रही है।
निलंबन पर भड़के राजेंद्र भारती
पार्टी से निलंबित किए जाने के बाद राजेंद्र भारती ने तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि कांग्रेस की इस कार्रवाई से उन्हें कोई फर्क नहीं पड़ता।
उन्होंने कहा कि जनता सब कुछ देख रही है और 2028 के विधानसभा चुनाव में इसका जवाब देगी। उनके अनुसार जनता ही अंतिम फैसला करती है और वही तय करेगी कि कौन सही है और कौन गलत।
भारती ने दावा किया कि उनका जनाधार आज भी मजबूत है और वे जनता के बीच लगातार सक्रिय रहेंगे।
नरोत्तम मिश्रा पर लगाया बड़ा आरोप
राजेंद्र भारती ने अपने निलंबन को केवल संगठनात्मक कार्रवाई मानने से इनकार किया। उन्होंने आरोप लगाया कि पूरा घटनाक्रम बीजेपी के वरिष्ठ नेता नरोत्तम मिश्रा की राजनीतिक रणनीति का हिस्सा है।
उन्होंने कहा कि कांग्रेस उम्मीदवार घनश्याम सिंह ने भी नरोत्तम मिश्रा के साथ मिलकर चुनाव लड़ा है। भारती का कहना है कि उनका राजनीतिक संघर्ष हमेशा नरोत्तम मिश्रा के खिलाफ रहा है और आगे भी जारी रहेगा।
हालांकि इन आरोपों पर न तो बीजेपी की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया आई है और न ही कांग्रेस उम्मीदवार ने सार्वजनिक रूप से कोई जवाब दिया है।
कांग्रेस के लिए चुनौती या अनुशासन का संदेश?
राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि चुनाव परिणाम से पहले किसी प्रभावशाली नेता के खिलाफ कार्रवाई करना आसान फैसला नहीं होता।
एक ओर कांग्रेस यह संदेश देना चाहती है कि पार्टी विरोधी गतिविधियों को किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा, वहीं दूसरी ओर इससे स्थानीय स्तर पर कार्यकर्ताओं के बीच असंतोष की संभावना भी बढ़ सकती है।
यदि चुनाव परिणाम कांग्रेस के पक्ष में आते हैं तो पार्टी इस कार्रवाई को अनुशासन की जीत बताएगी। लेकिन यदि परिणाम उम्मीद के विपरीत रहे तो विपक्ष इस फैसले को कांग्रेस की अंदरूनी कलह का बड़ा उदाहरण बताकर हमला तेज कर सकता है।
दतिया की लड़ाई बनी प्रदेश की प्रतिष्ठा का प्रश्न
दतिया उपचुनाव केवल एक विधानसभा सीट का चुनाव नहीं रह गया है। यह चुनाव कांग्रेस और बीजेपी दोनों के लिए प्रतिष्ठा का प्रश्न बन चुका है।
कांग्रेस के सामने अपनी जीती हुई सीट बचाने की चुनौती है, जबकि बीजेपी इस सीट पर दोबारा कब्जा जमाकर राजनीतिक संदेश देना चाहती है। यही वजह है कि चुनाव प्रचार से लेकर मतदान और अब परिणाम से पहले तक हर घटनाक्रम पर पूरे प्रदेश की नजर बनी हुई है।
नतीजों से पहले बढ़ी सियासी सरगर्मी
राजेंद्र भारती के निलंबन ने स्पष्ट कर दिया है कि दतिया की राजनीति आने वाले दिनों में और अधिक दिलचस्प होने वाली है। एक ओर कांग्रेस संगठनात्मक अनुशासन की बात कर रही है तो दूसरी ओर राजेंद्र भारती इसे राजनीतिक साजिश बता रहे हैं।
अब सबकी निगाहें उपचुनाव के परिणाम पर टिकी हैं। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि जनता किसके पक्ष में फैसला सुनाती है और क्या कांग्रेस का यह बड़ा कदम चुनावी समीकरणों को प्रभावित कर पाएगा या फिर राजेंद्र भारती का दावा सही साबित होगा कि जनता 2028 में इस कार्रवाई का जवाब देगी। परिणाम चाहे जो भी हो, इतना तय है कि दतिया उपचुनाव ने मध्य प्रदेश की राजनीति में एक नया अध्याय जोड़ दिया है।














