ग्रेटर नोएडा वेस्ट। महिलाओं के स्वास्थ्य और सम्मान को केंद्र में रखते हुए एथोमार्ट चैरिटेबल ट्रस्ट (EMCT) ने रविवार को ग्रेटर नोएडा वेस्ट में घरेलू सहायिकाओं एवं हाउसकीपिंग कर्मचारियों के लिए “मासिक धर्म स्वच्छता जागरूकता एवं सेनेटरी पैड वितरण कार्यक्रम” आयोजित किया। कार्यक्रम का उद्देश्य महिलाओं को मासिक धर्म के दौरान स्वच्छता, स्वास्थ्य और सुरक्षित आदतों के प्रति जागरूक करना, साथ ही इससे जुड़े सामाजिक संकोच और भ्रांतियों को दूर करना था।
कार्यक्रम में बड़ी संख्या में घरेलू सहायिकाओं और हाउसकीपिंग कर्मचारियों ने भाग लिया। विशेषज्ञों और संस्था के स्वयंसेवकों ने महिलाओं को मासिक धर्म के दौरान अपनाई जाने वाली स्वच्छ आदतों, संक्रमण से बचाव, सेनेटरी पैड के सही उपयोग तथा उनके सुरक्षित निस्तारण के बारे में विस्तार से जानकारी दी। इसके साथ ही सभी प्रतिभागी महिलाओं को निःशुल्क सेनेटरी पैड भी वितरित किए गए।
‘मासिक धर्म पर खुलकर बात करना समय की जरूरत’
कार्यक्रम के दौरान संस्था की संस्थापक रश्मि पांडेय ने कहा कि आज भी समाज के कई वर्गों में मासिक धर्म को लेकर झिझक और गलत धारणाएं मौजूद हैं। इन भ्रांतियों को समाप्त करने के लिए जागरूकता सबसे प्रभावी माध्यम है। उन्होंने कहा कि महिलाओं के स्वास्थ्य से जुड़ा यह विषय किसी भी प्रकार के संकोच का नहीं, बल्कि सम्मान और अधिकार का विषय है।
रश्मि पांडेय ने महिलाओं से अपील की कि वे मासिक धर्म के दौरान स्वच्छता का विशेष ध्यान रखें और किसी भी स्वास्थ्य संबंधी समस्या को नजरअंदाज न करें। उन्होंने कहा कि स्वस्थ महिला ही स्वस्थ परिवार और स्वस्थ समाज की आधारशिला होती है।
स्वच्छता से संक्रमण का खतरा होता है कम
कार्यक्रम में उपस्थित स्वयंसेवकों ने महिलाओं को बताया कि लंबे समय तक एक ही सेनेटरी पैड का उपयोग करने से संक्रमण का खतरा बढ़ सकता है। इसलिए समय-समय पर पैड बदलना, हाथों की स्वच्छता बनाए रखना और इस्तेमाल किए गए पैड का सुरक्षित निस्तारण करना अत्यंत आवश्यक है।
महिलाओं को यह भी समझाया गया कि मासिक धर्म कोई बीमारी नहीं बल्कि एक प्राकृतिक जैविक प्रक्रिया है। इसके प्रति जागरूकता और सही जानकारी महिलाओं के शारीरिक एवं मानसिक स्वास्थ्य के लिए बेहद जरूरी है।
महिलाओं ने खुलकर पूछे सवाल
कार्यक्रम की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता यह रही कि महिलाओं ने बिना किसी झिझक के मासिक धर्म से जुड़े अपने सवाल विशेषज्ञों और स्वयंसेवकों के सामने रखे। कई महिलाओं ने पहली बार इस विषय पर खुलकर चर्चा करने का अवसर मिलने पर खुशी जताई।
प्रतिभागियों ने कहा कि ऐसे कार्यक्रम समाज के उस वर्ग तक सही जानकारी पहुंचाने का काम करते हैं, जहां अक्सर स्वास्थ्य संबंधी जानकारी सीमित होती है। उन्होंने EMCT की इस पहल की सराहना करते हुए भविष्य में भी ऐसे कार्यक्रम आयोजित करने की मांग की।
हर महिला को सम्मान और सुरक्षित मासिक धर्म प्रबंधन का अधिकार
ईएमसीटी की एजुकेशन डायरेक्टर सरिता सिंह ने कहा कि प्रत्येक महिला को गरिमा, सम्मान और सुरक्षित मासिक धर्म प्रबंधन का अधिकार है। उन्होंने कहा कि जागरूकता के अभाव में कई महिलाएं स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का सामना करती हैं। यदि सही समय पर सही जानकारी और आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराए जाएं तो अनेक बीमारियों से बचा जा सकता है।
उन्होंने कहा कि संस्था का उद्देश्य केवल सेनेटरी पैड वितरित करना नहीं, बल्कि महिलाओं को आत्मविश्वास और सही जानकारी प्रदान करना भी है, ताकि वे अपने स्वास्थ्य के प्रति जागरूक बन सकें।
समाज के हर वर्ग तक पहुंचेगा जागरूकता अभियान
संस्था की सदस्य रुचि जैन ने कहा कि EMCT भविष्य में भी समाज के विभिन्न वर्गों की महिलाओं के लिए स्वास्थ्य एवं जागरूकता से जुड़े कार्यक्रम नियमित रूप से आयोजित करती रहेगी। उन्होंने कहा कि ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में कार्यरत महिलाओं तक इस प्रकार के अभियान पहुंचाना संस्था की प्राथमिकता है।
उन्होंने बताया कि महिलाओं के स्वास्थ्य, शिक्षा और आत्मनिर्भरता को लेकर संस्था लगातार विभिन्न सामाजिक कार्यक्रम संचालित कर रही है और आगे भी ऐसे प्रयास जारी रहेंगे।
स्थानीय लोगों और स्वयंसेवकों ने निभाई अहम भूमिका
कार्यक्रम को सफल बनाने में EMCT के स्वयंसेवकों के साथ-साथ स्थानीय निवासियों ने भी सक्रिय भूमिका निभाई। स्वयंसेवकों ने कार्यक्रम के संचालन, जागरूकता सत्र और सेनेटरी पैड वितरण में महत्वपूर्ण योगदान दिया।
कार्यक्रम के अंत में महिलाओं ने संस्था का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इस प्रकार की पहल समाज में सकारात्मक बदलाव लाने का माध्यम बन सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि मासिक धर्म स्वच्छता को लेकर लगातार जागरूकता अभियान चलाए जाएं तो महिलाओं के स्वास्थ्य में उल्लेखनीय सुधार के साथ-साथ सामाजिक सोच में भी सकारात्मक परिवर्तन संभव है।
ग्रेटर नोएडा वेस्ट में आयोजित यह कार्यक्रम केवल एक स्वास्थ्य जागरूकता अभियान नहीं, बल्कि महिलाओं के सम्मान, स्वास्थ्य और अधिकारों की दिशा में उठाया गया एक महत्वपूर्ण सामाजिक कदम साबित हुआ।














