“सतीश पूनिया की बैठक में बनी रणनीति, 18 से 30 सितंबर तक चार अलग-अलग स्थानों से निकलेगी यात्रा; राघव चड्ढा बोले—‘पंजाब में नशे के हालात बेहद गंभीर”
चंडीगढ़: पंजाब में नशीली दवाओं का मुद्दा एक बार फिर सियासत के केंद्र में आ गया है। पंजाब बीजेपी प्रभारी सतीश पूनिया ने गुरुवार को चंडीगढ़ में पंजाब के राज्यसभा सांसदों और पार्टी के अन्य वरिष्ठ नेताओं के साथ अहम बैठक की। बैठक में आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा भी पहुंचे। बैठक के बाद नशे के मुद्दे को लेकर पंजाब सरकार पर तीखा हमला बोला गया और प्रदेश को नशामुक्त बनाने के लिए बीजेपी ने बड़े अभियान की घोषणा की।
बैठक के बाद राघव चड्ढा ने पंजाब में नशे की स्थिति को लेकर गंभीर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि राज्य में हालात ऐसे हो गए हैं जैसे राशन लेने के लिए लोगों को लाइन में लगना पड़ता है, उसी तरह नशे को लेकर भी हालात बेहद गंभीर हैं। उन्होंने पंजाब सरकार से सवाल किया कि जब सरकार नशा खत्म होने की बात कह रही है, तो गुलजार सिंह की ओर से सरकार से यह पूछना क्या गलती थी कि पंजाब में नशा बहुत ज्यादा है।
गुलजार सिंह के मामले को लेकर सरकार पर सवाल
राघव चड्ढा ने गुलजार सिंह के मामले का जिक्र करते हुए पंजाब सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि जब कोई सरकार से यह सवाल करता है कि प्रदेश में नशा इतना अधिक क्यों है, तो उसे दबाव और टॉर्चर का सामना करना पड़ रहा है। चड्ढा ने दावा किया कि गुलजार सिंह को इतना परेशान और प्रताड़ित किया गया कि उन्हें आत्महत्या करनी पड़ी।
हालांकि, इन आरोपों को लेकर अंतिम निष्कर्ष संबंधित जांच और आधिकारिक तथ्यों के आधार पर ही निकाला जा सकता है। राजनीतिक बयानबाजी के बीच गुलजार सिंह का मामला अब पंजाब में नशे और सरकार की कथित कार्रवाई को लेकर बड़ा मुद्दा बनता दिखाई दे रहा है।
चड्ढा ने यह भी आरोप लगाया कि बीजेपी के प्रतिनिधिमंडल को परिवार से मिलने और संवेदना व्यक्त करने से रोक दिया गया। उनके मुताबिक, जब बीजेपी का शिष्टमंडल गया तो उसे रोक दिया गया, जबकि परिवार को संवेदना देने जा रहे नेताओं को भी वहां जाने की अनुमति नहीं दी गई।
‘AAP सरकार में होम डिलीवरी चल रही है’
राघव चड्ढा ने पंजाब में नशे की स्थिति को लेकर आम आदमी पार्टी सरकार पर तीखा तंज भी कसा। उन्होंने कहा कि सरकार की ओर से यह कहा जा रहा है कि पंजाब में पिछले 15 साल से नशा चरम पर था, लेकिन उनके अनुसार मौजूदा AAP सरकार के दौरान स्थिति और गंभीर है।
चड्ढा ने आरोप लगाया कि पंजाब में नशे की ‘होम डिलीवरी’ तक चल रही है। उनके इस बयान ने राज्य की राजनीति में आरोप-प्रत्यारोप को और तेज कर दिया है। बीजेपी का कहना है कि पंजाब सरकार को केवल नशा खत्म करने के दावे करने के बजाय यह बताना चाहिए कि जमीन पर नशे की उपलब्धता को रोकने के लिए क्या प्रभावी कदम उठाए जा रहे हैं।
18 सितंबर से शुरू होगी ‘नशा मुक्त पंजाब यात्रा’
बैठक में बीजेपी ने पंजाब को नशामुक्त बनाने के लिए एक बड़े राजनीतिक अभियान की घोषणा की। पार्टी के अनुसार ‘नशा मुक्त पंजाब यात्रा’ 18 सितंबर से 30 सितंबर तक निकाली जाएगी। यह यात्रा पंजाब में चार अलग-अलग स्थानों से शुरू होगी और प्रदेश के विभिन्न हिस्सों तक पहुंचेगी।
बीजेपी नेताओं के मुताबिक, इस यात्रा का उद्देश्य केवल नशे के खिलाफ जनजागरूकता पैदा करना नहीं, बल्कि पंजाब को नशामुक्त करने के लिए पार्टी की ओर से तैयार की गई कार्ययोजना को भी जनता के सामने रखना है। यात्रा के दौरान बीजेपी यह बताएगी कि यदि पंजाब में नशे की समस्या को खत्म करने का मौका मिलता है तो पार्टी की रणनीति क्या होगी और इसके लिए किस तरह की योजना लागू की जाएगी।
बीजेपी की यह पहल ऐसे समय में सामने आई है, जब प्रदेश की राजनीति में नशीली दवाओं का मुद्दा तेजी से बड़ा चुनावी मुद्दा बनता जा रहा है। पार्टी इसे आम आदमी पार्टी सरकार के खिलाफ एक प्रमुख राजनीतिक हथियार के तौर पर इस्तेमाल करने की तैयारी में दिखाई दे रही है।
विधानसभा चुनाव से पहले नशा बना बड़ा मुद्दा
पंजाब में आगामी विधानसभा चुनावों से पहले राजनीतिक दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज होने की संभावना है। राज्य में नशे की समस्या लंबे समय से राजनीतिक बहस का हिस्सा रही है। बीजेपी अब इस मुद्दे को लेकर सरकार को घेरने की रणनीति पर आगे बढ़ रही है।
पार्टी का मानना है कि नशे की समस्या केवल कानून-व्यवस्था से जुड़ा विषय नहीं है, बल्कि यह पंजाब के युवाओं, परिवारों और सामाजिक ढांचे से भी सीधे जुड़ी हुई है। ऐसे में बीजेपी की यात्रा के जरिए नशे के खिलाफ माहौल बनाने के साथ-साथ सरकार की नीतियों पर भी सवाल उठाए जाएंगे।
दूसरी ओर, पंजाब सरकार और आम आदमी पार्टी इस तरह के राजनीतिक आरोपों का अपने स्तर पर जवाब दे सकती है। आने वाले दिनों में नशे के मुद्दे पर बीजेपी और AAP के बीच राजनीतिक टकराव और तेज होने के संकेत हैं।
राघव चड्ढा का AAP पर पलटवार
बैठक के बाद राघव चड्ढा ने अपनी राजनीतिक भूमिका और आम आदमी पार्टी पर भी टिप्पणी की। उन्होंने अपने वोट कटने को लेकर AAP पर तंज कसते हुए कहा कि वह उनके सपने में भूत बनकर आते हैं। चड्ढा ने आम आदमी पार्टी की स्थिति की तुलना ऐसे व्यक्ति से की, जिसे उसकी गर्लफ्रेंड छोड़कर चली गई हो और वह दिलजले आशिक की तरह परेशान हो।
राघव चड्ढा की इस टिप्पणी को पंजाब की राजनीति में उनके और AAP के बीच बढ़ती तल्खी के तौर पर देखा जा रहा है। नशे के मुद्दे पर बीजेपी के साथ मंच साझा करने और सरकार के खिलाफ सवाल उठाने के बाद उनके इस बयान ने राजनीतिक चर्चाओं को और हवा दे दी है।
बीजेपी की रणनीति पर टिकी नजरें
चंडीगढ़ में हुई बैठक और ‘नशा मुक्त पंजाब यात्रा’ की घोषणा से साफ है कि बीजेपी पंजाब में नशे के मुद्दे को लेकर आक्रामक रणनीति अपनाने जा रही है। 18 से 30 सितंबर तक चलने वाली यात्रा के जरिए पार्टी गांवों, कस्बों और शहरों तक पहुंच बनाने की कोशिश करेगी।
बीजेपी का दावा है कि यात्रा के दौरान जनता के बीच नशे के खिलाफ जागरूकता अभियान चलाने के साथ-साथ प्रदेश को नशामुक्त करने के लिए पार्टी की विस्तृत योजना भी रखी जाएगी। अब देखना यह होगा कि इस यात्रा के जरिए बीजेपी पंजाब के मतदाताओं के बीच नशे के मुद्दे को कितना बड़ा राजनीतिक मुद्दा बनाने में सफल होती है।
फिलहाल, पंजाब में नशा एक बार फिर सत्ता और विपक्ष के बीच राजनीतिक संघर्ष का केंद्र बन चुका है। गुलजार सिंह के मामले को लेकर उठे सवाल, बीजेपी नेताओं को कथित तौर पर रोके जाने का आरोप और ‘नशा मुक्त पंजाब यात्रा’ की घोषणा ने इस मुद्दे को और गरमा दिया है। विधानसभा चुनावों की ओर बढ़ते पंजाब में आने वाले दिनों में नशे के खिलाफ राजनीतिक अभियान किस दिशा में जाता है, इस पर सभी की नजरें रहेंगी।














