“20.66 लाख मतदाताओं के नाम हटाए जाने के बीच राज्यसभा सांसद का नाम भी सूची से बाहर, चड्ढा ने लगाया राजनीतिक बदले का आरोप; AAP ने पलटवार कर चुनाव आयोग को बताया जिम्मेदार”
चंडीगढ़: पंजाब में चुनाव आयोग की ओर से चलाए जा रहे विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR (Special Intensive Revision) अभियान के बीच राज्य की राजनीति गरमा गई है। चुनाव आयोग की ओर से 13 अगस्त 2026 को जारी की गई ड्राफ्ट वोटर लिस्ट में राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा का नाम भी नहीं है। उनके नाम के आगे ‘Permanently Shifted’ यानी स्थायी रूप से स्थानांतरित होने का उल्लेख किया गया है। वोटर लिस्ट से अपना नाम हटाए जाने के बाद राघव चड्ढा ने इसे लेकर सवाल खड़े किए और पूरे मामले को राजनीतिक बदले की भावना से जोड़ दिया।
पंजाब में SIR अभियान के तहत अब तक करीब 20.66 लाख मतदाताओं के नाम वोटर लिस्ट से हटाए जाने की जानकारी सामने आई है। बड़ी संख्या में नाम हटाए जाने के बीच एक मौजूदा राज्यसभा सांसद का नाम ड्राफ्ट सूची में नहीं होना राजनीतिक रूप से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। हालांकि, यह अभी ड्राफ्ट वोटर लिस्ट है और दावे एवं आपत्तियों की प्रक्रिया जारी है। चुनाव आयोग के मुताबिक, इस प्रक्रिया के दौरान पात्र मतदाता अपना नाम दोबारा सूची में शामिल कराने के लिए आवेदन कर सकते हैं।
‘मैं पंजाब से राज्यसभा सांसद हूं, फिर मेरा नाम कैसे हट गया?’
ड्राफ्ट वोटर लिस्ट में अपना नाम नहीं होने पर राघव चड्ढा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर प्रतिक्रिया देते हुए चुनाव प्रक्रिया पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि वह पंजाब से राज्यसभा सांसद हैं और उनका वोटर आईडी मोहाली, पंजाब में पंजीकृत है। इसके बावजूद ड्राफ्ट वोटर लिस्ट में उनके नाम के सामने उन्हें दूसरी जगह स्थानांतरित व्यक्ति के तौर पर दर्ज किया गया है।
राघव चड्ढा ने कहा कि राहत की बात यह है कि यह अभी अंतिम मतदाता सूची नहीं बल्कि ड्राफ्ट लिस्ट है। उन्होंने यह भी कहा कि दावे और आपत्तियों की प्रक्रिया के दौरान मतदाता सूची में सुधार का अवसर मिलता है और यह प्रक्रिया फिलहाल जारी है।
उन्होंने बताया कि फाइनल वोटर लिस्ट अक्टूबर 2026 में प्रकाशित की जाएगी और वह SIR की गाइडलाइंस के तहत उपलब्ध प्रक्रिया का इस्तेमाल करते हुए अपना नाम दोबारा दर्ज कराने की कार्रवाई कर रहे हैं।
हालांकि, राघव चड्ढा ने इस मामले को महज प्रशासनिक या तकनीकी गलती मानने से इनकार किया। उन्होंने इसे राजनीतिक बदले की भावना से प्रेरित कार्रवाई बताया।
चड्ढा बोले- ‘यह मामूली क्लर्क की गलती नहीं’
राघव चड्ढा का आरोप है कि उनके नाम के आगे ‘Permanently Shifted’ दर्ज किया जाना सामान्य प्रशासनिक त्रुटि नहीं है। उनका कहना है कि वह पंजाब से राज्यसभा सांसद हैं और उनका वोटर रजिस्ट्रेशन मोहाली में है, ऐसे में उन्हें स्थायी रूप से दूसरी जगह स्थानांतरित दिखाया जाना गंभीर सवाल खड़े करता है।
उन्होंने अपने बयान में संकेत दिया कि इस कार्रवाई के पीछे राजनीतिक कारण हो सकते हैं। चड्ढा ने इसे ‘राजनीतिक बदले की भावना’ का मामला बताते हुए कहा कि वह निर्धारित कानूनी और चुनावी प्रक्रिया के माध्यम से अपने नाम को मतदाता सूची में दोबारा दर्ज कराने की कार्रवाई करेंगे।
उनके आरोपों के बाद पंजाब की सत्तारूढ़ आम आदमी पार्टी ने भी पलटवार किया और पूरे मामले में अपना कोई हस्तक्षेप होने से साफ इनकार कर दिया।
AAP का पलटवार- ‘SIR में सरकार का कोई रोल नहीं’
राघव चड्ढा के आरोपों पर आम आदमी पार्टी के नेताओं की ओर से तीखी प्रतिक्रिया सामने आई है। पंजाब के वित्त मंत्री हरपाल चीमा ने कहा कि राघव चड्ढा को अपने पुराने बयानों को याद करना चाहिए। चीमा के मुताबिक, जब राघव चड्ढा आम आदमी पार्टी में थे, तब उन्होंने SIR के तहत मतदाताओं के नाम काटे जाने के मामले में चुनाव आयोग को जिम्मेदार ठहराया था।
हरपाल चीमा ने सवाल उठाते हुए कहा कि यदि पंजाब में करीब 20 लाख नाम मतदाता सूची से हटाए गए हैं, तो क्या इसके लिए चुनाव आयोग जिम्मेदार है? उन्होंने कहा कि चुनाव आयुक्त की नियुक्ति केंद्र सरकार करती है और मतदाता सूची के पुनरीक्षण की प्रक्रिया चुनाव आयोग के दिशा-निर्देशों के अनुसार चलती है। ऐसे में राज्य सरकार की भूमिका पर सवाल उठाना उचित नहीं है।
AAP नेता ने राघव चड्ढा के आरोपों को राजनीतिक रूप से प्रेरित बताते हुए यह भी सवाल किया कि जब बड़े पैमाने पर मतदाताओं के नाम हटाए जा रहे हैं तो केवल अपने नाम को लेकर आम आदमी पार्टी और पंजाब सरकार पर आरोप क्यों लगाया जा रहा है।
अमन अरोड़ा बोले- ‘हमारा कोई लेना-देना नहीं’
पंजाब आम आदमी पार्टी के अध्यक्ष और कैबिनेट मंत्री अमन अरोड़ा ने भी राघव चड्ढा के आरोपों पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने स्पष्ट किया कि वोटर लिस्ट में नाम जोड़ने या हटाने की प्रक्रिया चुनाव आयोग की गाइडलाइंस के अनुसार चल रही है और आम आदमी पार्टी का इसमें कोई हस्तक्षेप नहीं है।
अमन अरोड़ा ने कहा कि पंजाब की तरह दूसरे राज्यों में भी SIR के दौरान बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम सूची से हटाए गए हैं। उन्होंने पश्चिम बंगाल और बिहार का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां भी लाखों नाम हटाए गए हैं।
AAP नेता ने राघव चड्ढा पर तंज कसते हुए कहा कि बड़ी संख्या में प्रवासियों के वोट हटाए गए हैं और ऐसे में एक और प्रवासी का वोट भी सूची से हट गया।
AAP का नया आरोप- ‘दिल्ली में बैकडेटेड रजिस्ट्रेशन की कोशिश’
मामला तब और गरमा गया जब आम आदमी पार्टी की ओर से राघव चड्ढा पर एक और गंभीर आरोप लगाया गया। पार्टी ने 3 अगस्त 2026 को अपने X अकाउंट पर पोस्ट करते हुए दावा किया कि एक राष्ट्रीय अंग्रेजी अखबार ने राघव चड्ढा को दिल्ली में पिछली तारीख यानी बैकडेटेड प्रक्रिया के जरिए अपना वोटर रजिस्ट्रेशन कराने की कोशिश करते हुए पकड़ा।
AAP ने आरोप लगाया कि अब राघव चड्ढा इस पूरे मामले का दोष आम आदमी पार्टी और पंजाब सरकार पर डालने की कोशिश कर रहे हैं। पार्टी का कहना है कि मतदाता सूची में नाम जोड़ने और हटाने की प्रक्रिया चुनाव आयोग के अधीन है और इसमें राज्य सरकार का प्रत्यक्ष हस्तक्षेप नहीं है।
इस आरोप ने पंजाब की राजनीति में एक नया विवाद खड़ा कर दिया है। एक तरफ राघव चड्ढा इसे राजनीतिक बदले की कार्रवाई बता रहे हैं, वहीं AAP उनके आरोपों को खारिज करते हुए चुनाव आयोग की प्रक्रिया का हवाला दे रही है।
20.66 लाख नाम हटे, अब दावे-आपत्तियों का दौर
पंजाब में SIR अभियान के तहत बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम ड्राफ्ट वोटर लिस्ट से हटाए जाने के बाद अब सबसे महत्वपूर्ण चरण दावे और आपत्तियां दर्ज कराने का है। चुनाव आयोग की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार, जिन मतदाताओं के नाम ड्राफ्ट सूची में नहीं हैं, उन्हें निर्धारित समयसीमा के भीतर अपना दावा पेश करने का अवसर दिया गया है।
नाम हटाए जाने वाले मतदाता 12 सितंबर 2026 तक दावे और आपत्तियां दर्ज करा सकते हैं। इसके लिए पात्र व्यक्ति फॉर्म-6 भरकर मतदाता सूची में अपना नाम दोबारा शामिल कराने के लिए आवेदन कर सकता है।
इस लिहाज से राघव चड्ढा के पास भी अपना नाम मतदाता सूची में फिर से दर्ज कराने के लिए 12 सितंबर तक का समय है। वह SIR के तहत निर्धारित प्रक्रिया का इस्तेमाल कर सकते हैं। इसके बाद प्राप्त दावों और आपत्तियों की जांच के आधार पर अंतिम सूची तैयार की जाएगी।
अक्टूबर में आएगी फाइनल वोटर लिस्ट, तब साफ होगी तस्वीर
फिलहाल राघव चड्ढा का नाम हटाया जाना अंतिम फैसला नहीं माना जा सकता, क्योंकि 13 अगस्त को जारी सूची ड्राफ्ट है। दावे और आपत्तियों की प्रक्रिया पूरी होने के बाद चुनाव आयोग संशोधन करेगा और उसके बाद अक्टूबर 2026 में अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित की जाएगी।
यही अंतिम सूची तय करेगी कि राघव चड्ढा समेत उन लाखों लोगों के नाम दोबारा शामिल किए गए हैं या नहीं, जिन्होंने ड्राफ्ट सूची से नाम हटाए जाने के खिलाफ दावा पेश किया है।
पंजाब में SIR के तहत 20.66 लाख नाम हटाए जाने का आंकड़ा पहले ही राजनीतिक बहस का बड़ा मुद्दा बन चुका है। अब राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा का नाम भी ड्राफ्ट सूची से हटने के बाद यह विवाद और गहरा गया है। चड्ढा इसे राजनीतिक बदले से जोड़ रहे हैं, जबकि आम आदमी पार्टी पूरे मामले से पल्ला झाड़ते हुए चुनाव आयोग की प्रक्रिया को जिम्मेदार बता रही है।
अब निगाहें 12 सितंबर की दावा-आपत्ति की समयसीमा और अक्टूबर में जारी होने वाली फाइनल वोटर लिस्ट पर टिकी हैं। अंतिम सूची सामने आने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि राघव चड्ढा समेत हटाए गए कितने मतदाताओं के नाम दोबारा मतदाता सूची में शामिल किए जाते हैं।














