Thursday, October 1, 2026
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सत्य निकेतन बिल्डिंग हादसा: मलबे का भारी बोझ और दीवार हटाने से कमजोर हुई इमारत, मजदूर ठेकेदार गिरफ्तार

“बेसमेंट में डाले गए थे तीन ट्रक मलबे, ग्राउंड फ्लोर पर दुकान के लिए हटाई गई दीवार; पुलिस ने कासगंज से सानोज कुमार को दबोचा, PG संचालक समेत तीन आरोपी दो दिन की पुलिस कस्टडी में”

Satya Niketan Building Collapsed: दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में बिल्डिंग गिरने के मामले की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, हादसे से जुड़े कई अहम तथ्य सामने आ रहे हैं। पुलिस ने मजदूर ठेकेदार सानोज कुमार को उत्तर प्रदेश के कासगंज से गिरफ्तार किया है। पूछताछ में सामने आया है कि हादसे से करीब 10 दिन पहले ही बिल्डिंग में मरम्मत और निर्माण का काम शुरू हुआ था। इसी दौरान बेसमेंट में बड़ी मात्रा में मलबा डाला गया और ग्राउंड फ्लोर पर दुकान के लिए एक दीवार भी हटा दी गई।

पुलिस के मुताबिक, बिल्डिंग की संरचना पहले से ही कमजोर थी और उस पर निर्माण कार्य के दौरान अतिरिक्त भार पड़ने से स्थिति और गंभीर हो गई। हादसे वाले दिन ग्राउंड फ्लोर की एक दीवार हटाए जाने के बाद अचानक पूरी संरचना ढह गई। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि निर्माण और मरम्मत के लिए किस तरह की अनुमति ली गई थी और क्या सुरक्षा नियमों का पालन किया गया था।

10 दिन पहले शुरू हुआ था निर्माण और मरम्मत का काम

पुलिस की पूछताछ में मजदूर ठेकेदार सानोज कुमार ने बताया कि करीब 10 दिन पहले महेश गुप्ता ने उसे बिल्डिंग में मरम्मत और निर्माण का काम सौंपा था। इस काम के बदले उसे रोजाना 2,800 रुपये मजदूरी दी जा रही थी।

जांच के मुताबिक, बिल्डिंग के बेसमेंट को ग्राउंड फ्लोर के बराबर करने की तैयारी चल रही थी। इसी उद्देश्य से बेसमेंट में बड़ी मात्रा में मलबा डाला गया। पुलिस का कहना है कि वहां करीब तीन ट्रक मलबा डाला गया था। यह मलबा किस अनुमति के तहत डाला गया और निर्माण कार्य के दौरान किसी इंजीनियर या विशेषज्ञ की निगरानी थी या नहीं, इसकी जांच की जा रही है।

पुलिस के लिए यह सवाल भी अहम है कि जिस इमारत में पहले से संरचनात्मक कमजोरी की आशंका थी, उसमें बेसमेंट के भीतर इतना अतिरिक्त भार डालने का फैसला किसके निर्देश पर लिया गया था।

दुकान के लिए हटाई गई थी ग्राउंड फ्लोर की दीवार

जांच में सामने आया है कि हादसे वाले दिन ग्राउंड फ्लोर पर एक दुकान के लिए जगह बनाने के उद्देश्य से एक दीवार हटा दी गई थी। पुलिस का दावा है कि उस समय तक बेसमेंट में पहले से ही भारी मात्रा में मलबा मौजूद था।

जांच एजेंसियों के अनुसार, बेसमेंट में मलबे का अतिरिक्त भार और ग्राउंड फ्लोर की दीवार हटाए जाने से इमारत की संरचनात्मक मजबूती प्रभावित हो सकती है। पुलिस इसी एंगल से हादसे की कड़ियों को जोड़ रही है।

हालांकि, हादसे की अंतिम तकनीकी वजह अभी जांच का विषय है। पुलिस निर्माण कार्य में शामिल सभी लोगों की भूमिका की पड़ताल कर रही है। यह भी देखा जा रहा है कि दीवार हटाने से पहले किसी विशेषज्ञ से संरचना की जांच कराई गई थी या नहीं।

हादसे से पहले क्या-क्या हुआ, पुलिस जोड़ रही एक-एक कड़ी

सत्य निकेतन की इस बिल्डिंग में हुए हादसे के बाद पुलिस अब घटनाक्रम को क्रमवार तरीके से खंगाल रही है। जांच में सबसे पहले यह पता लगाया जा रहा है कि निर्माण कार्य कब शुरू हुआ, किसने शुरू कराया, मजदूरों और ठेकेदार को किसने काम सौंपा और निर्माण के दौरान कौन-कौन से बदलाव किए गए।

पुलिस के सामने सबसे अहम बिंदु बेसमेंट में मलबा डालने और ग्राउंड फ्लोर की दीवार हटाने का है। दोनों घटनाओं को हादसे से पहले की परिस्थितियों के रूप में देखा जा रहा है।

जांच अधिकारी यह भी पता लगाने में जुटे हैं कि निर्माण कार्य के दौरान बिल्डिंग की हालत का कोई निरीक्षण हुआ था या नहीं। यदि इमारत पहले से जर्जर थी तो उसमें बदलाव और निर्माण की अनुमति किस आधार पर दी गई, यह भी जांच का महत्वपूर्ण हिस्सा है।

PG संचालक शुधांशु लवनीश भी गिरफ्तार

मामले में पुलिस ने PG संचालक शुधांशु लवनीश को भी गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार, शुधांशु ने वर्ष 2019 में दिल्ली विश्वविद्यालय से ग्रेजुएशन किया था। इसके बाद वर्ष 2022 से वह अपने दोस्त शुभम त्यागी के साथ सत्य निकेतन में ‘Hostel Daze’ नाम से PG चला रहा था।

पुलिस का कहना है कि शुधांशु वर्तमान में इलाके में करीब सात PG संचालित कर रहा था। जिस बिल्डिंग में हादसा हुआ, उसकी चार मंजिलें उसने अगस्त 2025 में किराये पर ली थीं। इसके लिए वह कथित तौर पर 1.05 लाख रुपये प्रति माह किराया देता था।

जांच एजेंसी अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि बिल्डिंग की वास्तविक स्थिति के बारे में PG संचालक को कितनी जानकारी थी और वहां रहने वाले लोगों की सुरक्षा को लेकर क्या कदम उठाए गए थे।

जर्जर हालत की जानकारी के बावजूद निर्माण का आरोप

पुलिस के मुताबिक, शुधांशु को बिल्डिंग की जर्जर हालत की जानकारी थी। इसके बावजूद वहां निर्माण और मरम्मत का काम जारी रहा। पुलिस इस बात की जांच कर रही है कि बिल्डिंग की स्थिति को देखते हुए उसमें लोगों का रहना और निर्माण गतिविधियां जारी रखना कितना सुरक्षित था।

जांच में यह भी देखा जा रहा है कि निर्माण कार्य से जुड़े लोगों को इमारत की संरचनात्मक स्थिति के बारे में जानकारी थी या नहीं। यदि किसी स्तर पर खतरे की जानकारी पहले से थी, तो उसे नजरअंदाज क्यों किया गया—यह सवाल भी जांच के केंद्र में है।

पहले महेश गुप्ता की हुई थी गिरफ्तारी

इस मामले में पुलिस पहले ही महेश गुप्ता को गिरफ्तार कर चुकी है। अब मजदूर ठेकेदार सानोज कुमार और PG संचालक शुधांशु लवनीश की गिरफ्तारी के बाद मामले में आरोपियों की भूमिका का दायरा और स्पष्ट होने की उम्मीद है।

पुलिस इन तीनों आरोपियों से अलग-अलग पहलुओं पर पूछताछ कर रही है। खासतौर पर निर्माण कार्य शुरू कराने, मलबा डलवाने, दीवार हटाने और बिल्डिंग की हालत की जानकारी से जुड़े सवाल पूछे जा रहे हैं।

कोर्ट ने तीनों आरोपियों को दो दिन की पुलिस कस्टडी में भेजा

महेश गुप्ता, सानोज कुमार और शुधांशु लवनीश को कोर्ट में पेश किया गया, जहां से तीनों आरोपियों को दो दिन की पुलिस कस्टडी में भेज दिया गया। पुलिस अब हिरासत के दौरान आरोपियों से निर्माण कार्य और हादसे से जुड़े अन्य महत्वपूर्ण सवालों के जवाब हासिल करने की कोशिश करेगी।

पुलिस के लिए यह जानना जरूरी है कि निर्माण कार्य की योजना किसने बनाई थी, बेसमेंट में मलबा डालने का फैसला किसका था और ग्राउंड फ्लोर की दीवार हटाने के निर्देश किसने दिए थे। इसके साथ ही निर्माण कार्य के दौरान सुरक्षा मानकों का पालन हुआ था या नहीं, इसकी भी जांच की जा रही है।

अनुमति और सुरक्षा नियमों की भी होगी जांच

हादसे के बाद पुलिस की जांच सिर्फ गिरफ्तार आरोपियों की भूमिका तक सीमित नहीं है। निर्माण और मरम्मत कार्य के लिए आवश्यक अनुमति, बिल्डिंग की स्थिति और सुरक्षा मानकों से जुड़े पहलुओं की भी जांच की जा रही है।

पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि बेसमेंट में मलबा डालने और ग्राउंड फ्लोर की दीवार हटाने के लिए संबंधित विभाग से किसी तरह की अनुमति ली गई थी या नहीं। साथ ही यह भी जांचा जाएगा कि काम शुरू करने से पहले बिल्डिंग की संरचनात्मक सुरक्षा का आकलन कराया गया था या नहीं।

हादसे की असली वजह का खुलासा जांच पूरी होने के बाद

फिलहाल पुलिस की जांच जारी है और हादसे की अंतिम वजह पर आधिकारिक निष्कर्ष सामने आना बाकी है। हालांकि, शुरुआती पूछताछ में बेसमेंट में भारी मात्रा में मलबा डाले जाने और ग्राउंड फ्लोर की दीवार हटाए जाने की जानकारी सामने आई है।

पुलिस अब इन दोनों घटनाओं को बिल्डिंग की संरचनात्मक कमजोरी और उसके बाद हुए हादसे से जोड़कर जांच कर रही है। साथ ही निर्माण कार्य से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका भी खंगाली जा रही है।

सत्य निकेतन बिल्डिंग हादसे ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि जर्जर इमारतों में बिना पर्याप्त सुरक्षा जांच के निर्माण और बदलाव की अनुमति कैसे मिलती है। फिलहाल पुलिस की नजर इस बात पर है कि हादसे से पहले बिल्डिंग में क्या-क्या बदलाव किए गए और उन बदलावों के लिए जिम्मेदार कौन था। आने वाले दिनों में जांच और पूछताछ के आधार पर हादसे की पूरी तस्वीर सामने आने की उम्मीद है।

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VIKAS TRIPATHI
VIKAS TRIPATHIhttp://www.pardaphaas.com
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