“बिना ट्रीटमेंट सीवर और केमिकल युक्त पानी सीधे नदियों में, भूमिगत जल भी हो रहा प्रदूषित; नागरिकों ने जनप्रतिनिधियों और प्रशासन की जवाबदेही पर उठाए सवाल”
नोएडा :उत्तर प्रदेश को सबसे अधिक राजस्व देने वाले हाईटेक शहर नोएडा में विकास के दावों के बीच एक बेहद गंभीर पर्यावरणीय और सांस्कृतिक संकट गहराता जा रहा है। शहर की दो प्रमुख और जीवनदायिनी नदियां—यमुना और हिंडन—आज प्रदूषण की ऐसी मार झेल रही हैं कि उनका स्वरूप किसी पवित्र नदी से अधिक जहरीले नाले जैसा दिखाई देने लगा है। कभी आस्था, संस्कृति और जीवन का आधार रही ये नदियां आज काले, बदबूदार और रासायनिक अपशिष्ट से भरे जल के कारण अपनी पहचान खोती जा रही हैं।
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि शहर के बड़े नालों, सीवर लाइनों और औद्योगिक इकाइयों से निकलने वाला प्रदूषित व केमिकल युक्त पानी बिना समुचित शोधन के सीधे यमुना और हिंडन में छोड़ा जा रहा है। इसके चलते नदी का जल न केवल प्रदूषित हो चुका है, बल्कि किनारों पर फैली गंदगी और तीखी दुर्गंध के कारण वहां कुछ देर खड़ा रहना भी मुश्किल हो गया है।
सनातन आस्था की धरोहर पर बढ़ता संकट
भारतीय संस्कृति और सनातन परंपरा में यमुना और हिंडन जैसी नदियों को विशेष धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व प्राप्त है। श्रद्धालु इन्हें केवल जलधारा नहीं, बल्कि जीवन, आस्था और सभ्यता का प्रतीक मानते हैं। ऐसे में इन पवित्र नदियों की दुर्दशा लोगों की धार्मिक भावनाओं को भी गहरी ठेस पहुंचा रही है। नागरिकों का कहना है कि नदियों की रक्षा करना जनप्रतिनिधियों और प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी है, लेकिन वर्षों से इस दिशा में अपेक्षित गंभीरता दिखाई नहीं दे रही।
भूजल पर भी मंडरा रहा बड़ा खतरा
विशेषज्ञों के अनुसार नदियों में लगातार बह रहा दूषित और रासायनिक पानी धीरे-धीरे जमीन में रिसकर भूजल को भी प्रभावित कर सकता है। यदि समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो आने वाले वर्षों में नोएडा और आसपास के क्षेत्रों में पेयजल की गुणवत्ता गंभीर रूप से प्रभावित हो सकती है। इसका सीधा असर लाखों लोगों के स्वास्थ्य पर पड़ेगा और जलजनित व अन्य गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है।
‘जनप्रतिनिधियों की उदासीनता का परिणाम’
सेक्टर-105 आरडब्ल्यूए के अध्यक्ष दिव्य कृष्णात्रेय ने इस मुद्दे पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि आस्था के प्रतीक इन पवित्र जलधाराओं की वर्तमान स्थिति जनप्रतिनिधियों और प्रशासन की उदासीनता का स्पष्ट प्रमाण है। उनका कहना है कि यदि समय रहते ठोस कार्रवाई नहीं की गई तो पर्यावरणीय संकट और गंभीर रूप ले सकता है।
उन्होंने मांग की कि बिना ट्रीटमेंट सीवर और औद्योगिक अपशिष्ट को नदियों में गिराने पर तत्काल रोक लगाई जाए, सभी सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) की कार्यक्षमता की स्वतंत्र समीक्षा कराई जाए तथा यमुना और हिंडन के पुनर्जीवन के लिए पारदर्शी, समयबद्ध और जवाबदेह कार्ययोजना लागू की जाए।
नागरिकों की चेतावनी—अब नहीं तो कभी नहीं
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि आज भी प्रशासन और जनप्रतिनिधियों ने इस गंभीर संकट को नजरअंदाज किया तो आने वाले समय में इसकी कीमत पूरी पीढ़ी को चुकानी पड़ेगी। उनका मानना है कि यह केवल पर्यावरण संरक्षण का नहीं, बल्कि जनस्वास्थ्य, जल सुरक्षा और सनातन संस्कृति की अमूल्य धरोहरों को बचाने का प्रश्न है। अब जरूरत केवल आश्वासनों की नहीं, बल्कि धरातल पर प्रभावी और समयबद्ध कार्रवाई की है।














