नौएडा: उत्तरप्रदेश की आर्थिक राजधानी, उत्तर प्रदेश का “शो विंडो” और वर्षों से “नो पावर कट ज़ोन” के रूप में प्रचारित किए जाने वाले नोएडा की तस्वीर इन दिनों इन दावों से बिल्कुल उलट दिखाई दे रही है। शहर के अधिकांश सेक्टर, बहुमंजिला सोसायटियां, औद्योगिक क्षेत्र, गांव और यहां तक कि डूब क्षेत्र में रहने वाले लोग भी लगातार अघोषित बिजली कटौती, बार-बार होने वाले फॉल्ट, जर्जर बिजली लाइनों, खुले ट्रांसफॉर्मरों और लचर विद्युत व्यवस्था से परेशान हैं। हालात ऐसे हैं कि करोड़ों रुपये का राजस्व देने वाला यह शहर अब बिजली जैसी मूलभूत सुविधा के लिए भी संघर्ष करता नजर आ रहा है।
इन्हीं समस्याओं को लेकर सामाजिक संस्था नोएडा सिटीजन फोरम (एनसीएफ) की कार्यकारी अध्यक्ष शालिनी सिंह ने शुक्रवार को यूपीपीसीएल/पीवीवीएनएल के मुख्य अभियंता संजय कुमार जैन के साथ विस्तृत बैठक की। बैठक के दौरान उन्होंने शहर की बिजली व्यवस्था से जुड़ी गंभीर समस्याओं को बिंदुवार रखा और एक विस्तृत ज्ञापन सौंपते हुए तत्काल सुधारात्मक कार्रवाई की मांग की। संस्था ने स्पष्ट किया कि यदि जल्द प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो नागरिकों के हित में आगे की रणनीति बनाई जाएगी।
“नो पावर कट ज़ोन” का दावा, लेकिन हकीकत में रोज बिजली संकट
एनसीएफ द्वारा सौंपे गए ज्ञापन में कहा गया कि जिस नोएडा को वर्षों से “नो पावर कट ज़ोन” कहकर प्रस्तुत किया जाता रहा है, उसी शहर में लोग रोजाना घंटों बिजली कटौती झेलने को मजबूर हैं। कई इलाकों में बिना किसी पूर्व सूचना के बिजली चली जाती है और कई-कई घंटे तक आपूर्ति बहाल नहीं हो पाती।
शहर के सेक्टरों, औद्योगिक इकाइयों, ग्रुप हाउसिंग सोसायटियों और ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले लोग लगातार शिकायत कर रहे हैं कि बिजली का कोई निश्चित समय नहीं रह गया है। दिन हो या रात, किसी भी समय फॉल्ट होने से पूरा इलाका अंधेरे में डूब जाता है। सबसे अधिक परेशानी छोटे बच्चों, बुजुर्गों, मरीजों और कामकाजी लोगों को उठानी पड़ रही है।
संस्था का कहना है कि यदि “नो पावर कट ज़ोन” की घोषणा केवल कागजों तक सीमित रह गई है, तो संबंधित विभागों को जनता के सामने इसकी वास्तविक स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।
जर्जर तार, खुले ट्रांसफॉर्मर और करंट वाले पोल बने जान का खतरा
बैठक के दौरान शालिनी सिंह ने केवल बिजली कटौती ही नहीं बल्कि विद्युत सुरक्षा से जुड़े गंभीर मुद्दों को भी प्रमुखता से उठाया। उन्होंने कहा कि शहर के अनेक हिस्सों में बिजली के तार नीचे लटक रहे हैं। कई ट्रांसफॉर्मर बिना सुरक्षा घेरे के खुले पड़े हैं और बरसात के दिनों में कई बिजली के पोलों में करंट उतरने की शिकायतें लगातार सामने आती रहती हैं।
उन्होंने कहा कि हर वर्ष बरसात के दौरान करंट लगने से हादसों की खबरें आती हैं, लेकिन उसके बावजूद स्थायी समाधान की दिशा में गंभीर प्रयास दिखाई नहीं देते। यदि समय रहते इन खतरनाक स्थानों की पहचान कर सुधार नहीं किया गया तो कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है।
एनसीएफ ने मांग की कि पूरे शहर में विद्युत सुरक्षा का विशेष ऑडिट कराया जाए और सभी जोखिम वाले स्थानों को प्राथमिकता के आधार पर सुरक्षित बनाया जाए।
डूब क्षेत्र के लोगों को बिजली से वंचित रखना अमानवीय
बैठक में सबसे संवेदनशील मुद्दों में डूब क्षेत्र में रहने वाले लोगों की समस्या भी रही। शालिनी सिंह ने कहा कि इन क्षेत्रों में हजारों परिवार वर्षों से रह रहे हैं। इनमें छोटे बच्चे, महिलाएं, बुजुर्ग और मजदूर वर्ग के लोग बड़ी संख्या में शामिल हैं, लेकिन आज भी उन्हें नियमित बिजली जैसी मूलभूत सुविधा उपलब्ध नहीं हो पा रही।
उन्होंने कहा कि यदि इन क्षेत्रों में लोगों को बसने दिया गया तो सरकार और स्थानीय प्रशासन की भी जिम्मेदारी बनती है कि उन्हें आवश्यक नागरिक सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं।
उन्होंने सवाल उठाया कि यदि अब इन बस्तियों को अवैध बताकर बिजली नहीं दी जा रही है तो जब ये बस्तियां विकसित हो रही थीं तब संबंधित विभाग क्या कर रहे थे? कोई भी कॉलोनी या बस्ती एक दिन में नहीं बसती। वर्षों तक प्रशासन की आंखों के सामने आबादी बढ़ती रही और अब लोगों को मूलभूत सुविधाओं से वंचित रखना किसी भी दृष्टि से उचित नहीं कहा जा सकता।
बारिश और जलभराव ने बढ़ाया बिजली संकट
बैठक के दौरान मुख्य अभियंता संजय कुमार जैन ने भी वर्तमान परिस्थितियों पर विभाग का पक्ष रखा। उन्होंने बताया कि लगातार हो रही बारिश के कारण कई स्थानों पर ट्रांसफॉर्मर और बिजलीघर पानी में डूब गए हैं। ऐसे में तत्काल बिजली चालू करना तकनीकी और सुरक्षा की दृष्टि से संभव नहीं होता।
उन्होंने कहा कि जब तक पूरी तरह सुरक्षा जांच नहीं हो जाती, तब तक विद्युत आपूर्ति बहाल नहीं की जा सकती, क्योंकि ऐसा करना नागरिकों की जान जोखिम में डालने जैसा होगा।
मुख्य अभियंता ने यह भी जानकारी दी कि जलभराव की समस्या को लेकर नोएडा प्राधिकरण को अलग से पत्र भेजा गया है। विभाग ने मांग की है कि विद्युत प्रतिष्ठानों के आसपास स्थायी जलनिकासी व्यवस्था विकसित की जाए, ताकि भविष्य में बारिश के समय इस प्रकार की समस्या दोबारा न आए।
हर उपकेंद्र पर 24 घंटे वरिष्ठ अधिकारी की तैनाती की मांग
एनसीएफ ने ज्ञापन में कहा कि बिजली संकट के दौरान सबसे बड़ी समस्या यह होती है कि रात में जिम्मेदार अधिकारी उपलब्ध नहीं रहते। कई बार उपभोक्ता घंटों तक शिकायत दर्ज कराते रहते हैं, लेकिन मौके पर कोई जिम्मेदार अधिकारी नहीं पहुंचता।
इसी को देखते हुए संस्था ने मांग की कि प्रत्येक विद्युत उपकेंद्र पर चौबीसों घंटे एक वरिष्ठ अधिकारी की क्रमवार ड्यूटी लगाई जाए, ताकि किसी भी आपात स्थिति में तुरंत निर्णय लेकर बिजली आपूर्ति बहाल कराई जा सके।
संस्था का कहना है कि इससे शिकायतों के समाधान की गति भी बढ़ेगी और लोगों का विभाग पर विश्वास भी मजबूत होगा।
दीर्घकालिक विद्युत मास्टर प्लान की जरूरत
बैठक में एनसीएफ ने केवल तत्काल राहत की बात नहीं की बल्कि भविष्य की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए व्यापक विद्युत मास्टर प्लान तैयार करने की मांग भी रखी।
संस्था का कहना है कि पिछले कुछ वर्षों में नोएडा की आबादी और औद्योगिक गतिविधियां तेजी से बढ़ी हैं, लेकिन उसी अनुपात में बिजली ढांचे का विस्तार नहीं हुआ। कई उपकेंद्र अपनी क्षमता से अधिक लोड उठा रहे हैं, जिसके कारण बार-बार ट्रिपिंग और फॉल्ट की समस्या सामने आती है।
ज्ञापन में मांग की गई कि शहर की भविष्य की आबादी और औद्योगिक विस्तार को ध्यान में रखते हुए नए विद्युत उपकेंद्र बनाए जाएं, जर्जर लाइनों को बदला जाए, भूमिगत केबलिंग का विस्तार किया जाए और आधुनिक तकनीक आधारित विद्युत प्रबंधन प्रणाली विकसित की जाए।
बिजली माफियाओं पर भी सख्त कार्रवाई की मांग
एनसीएफ ने अवैध बिजली आपूर्ति करने वाले तथाकथित “बिजली माफियाओं” के खिलाफ भी कठोर कार्रवाई की मांग उठाई। संस्था का कहना है कि अवैध कनेक्शन पूरे विद्युत नेटवर्क पर अतिरिक्त दबाव डालते हैं, जिससे ट्रांसफॉर्मर ओवरलोड होते हैं और आम उपभोक्ताओं को बिजली संकट झेलना पड़ता है।
संस्था ने मांग की कि ऐसे लोगों की पहचान कर उनके खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई की जाए ताकि वैध उपभोक्ताओं को निर्बाध बिजली मिल सके।
हेल्पलाइन पर शिकायत दर्ज कराने की अपील
मुख्य अभियंता संजय कुमार जैन ने बैठक के दौरान सभी मांगों पर प्राथमिकता के आधार पर कार्रवाई का आश्वासन दिया। उन्होंने नागरिकों से अपील की कि बिजली संबंधी किसी भी शिकायत के लिए विभाग की हेल्पलाइन 9193301659 का अधिक से अधिक उपयोग करें, ताकि शिकायतों का समयबद्ध समाधान किया जा सके।
उन्होंने कहा कि विभाग लगातार व्यवस्था सुधारने की दिशा में कार्य कर रहा है और नागरिकों का सहयोग मिलने पर समस्याओं का समाधान और अधिक प्रभावी ढंग से किया जा सकेगा।
“करोड़ों का राजस्व, फिर भी बिजली के लिए संघर्ष”
बैठक के बाद शालिनी सिंह ने कहा कि नोएडा प्रदेश के सबसे अधिक राजस्व देने वाले शहरों में शामिल है। यहां से सरकार को हर वर्ष हजारों करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त होता है, लेकिन इसके बावजूद शहर के लोग बिजली जैसी मूलभूत सुविधा के लिए परेशान हैं।
उन्होंने कहा कि कुछ अधिकारियों की लापरवाही, विभागों के बीच समन्वय की कमी और दूरदर्शी योजना के अभाव ने स्थिति को और गंभीर बना दिया है। यदि प्रभावी विद्युत मास्टर प्लान, जवाबदेही और नियमित निगरानी लागू नहीं की गई तो आने वाले समय में समस्या और विकराल हो सकती है।
उन्होंने कहा कि नागरिक केवल आश्वासन नहीं बल्कि धरातल पर परिणाम चाहते हैं। यदि “नो पावर कट ज़ोन” का दावा किया जाता है तो उसकी झलक भी लोगों को दिखाई देनी चाहिए।
समयबद्ध समाधान नहीं हुआ तो तय होगी आगे की रणनीति
एनसीएफ ने स्पष्ट किया कि यह ज्ञापन केवल एक औपचारिक प्रक्रिया नहीं बल्कि शहर के लाखों नागरिकों की वास्तविक समस्याओं की आवाज है। संस्था ने चेतावनी दी कि यदि बिजली व्यवस्था में शीघ्र सुधार नहीं हुआ, अघोषित कटौती बंद नहीं हुई और सुरक्षा संबंधी खामियों को दूर नहीं किया गया तो जनहित में व्यापक आंदोलन सहित आगे की रणनीति तय की जाएगी।
फिलहाल मुख्य अभियंता के आश्वासन के बाद शहरवासियों की निगाहें अब विभाग की कार्रवाई पर टिकी हैं। सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या “नो पावर कट ज़ोन” कहलाने वाला नोएडा वास्तव में निर्बाध बिजली वाला शहर बन पाएगा, या फिर दावों की रोशनी में हकीकत का अंधेरा यूं ही कायम रहेगा?














