‘राम मंदिर में महापाप हुआ, सनातनी दुखी हैं’, निष्पक्ष जांच, ट्रस्ट पुनर्गठन और गौ संरक्षण पर उठे तीखे सवाल
लखनऊ: समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने बुधवार को ज्योतिर्मठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती से मुलाकात कर राम मंदिर से जुड़े कथित चढ़ावा गड़बड़ी प्रकरण, गौ संरक्षण, सनातन धर्म और प्रदेश की कानून-व्यवस्था जैसे मुद्दों पर भारतीय जनता पार्टी सरकार को कठघरे में खड़ा किया। करीब एक घंटे चली इस मुलाकात के बाद दोनों नेताओं के बयान राजनीतिक और धार्मिक हलकों में चर्चा का विषय बन गए। अखिलेश यादव ने आरोप लगाया कि राम मंदिर से जुड़े प्रकरण में “महापाप” हुआ है, जिससे करोड़ों सनातनी आहत हैं, जबकि शंकराचार्य ने ट्रस्ट की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाते हुए उसमें व्यापक बदलाव की आवश्यकता बताई।
मुलाकात के बाद मीडिया से बातचीत में अखिलेश यादव ने कहा कि उन्हें पूज्य शंकराचार्य का आशीर्वाद प्राप्त हुआ और इस दौरान सनातन धर्म के समक्ष उत्पन्न चुनौतियों, गौमाता की दुर्दशा तथा राम मंदिर से जुड़े घटनाक्रम पर विस्तार से चर्चा हुई। उन्होंने कहा कि धर्म और आस्था से जुड़े विषयों पर राजनीति नहीं होनी चाहिए, लेकिन जिस प्रकार की घटनाएं सामने आ रही हैं, उससे समाज में गहरी चिंता का माहौल है।
‘राम मंदिर में महापाप हुआ, निष्पक्ष जांच जरूरी’
राम मंदिर में कथित चढ़ावा गड़बड़ी के मुद्दे को उठाते हुए अखिलेश यादव ने भाजपा सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि यह केवल आर्थिक अनियमितता का मामला नहीं, बल्कि करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़ा विषय है। उन्होंने कहा कि इस पूरे प्रकरण की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच होनी चाहिए ताकि सच्चाई देश के सामने आ सके।
अखिलेश ने आरोप लगाया कि सरकार द्वारा गठित विशेष जांच दल (एसआईटी) पर भी सवाल उठ रहे हैं। उनके अनुसार, जिस एजेंसी की निष्पक्षता पर ही संदेह हो, उससे न्याय की उम्मीद करना कठिन है। उन्होंने कहा कि जांच के नाम पर केवल लीपापोती की जा रही है और वास्तविक दोषियों तक पहुंचने की कोई गंभीर कोशिश दिखाई नहीं दे रही।
उन्होंने यह भी कहा कि मंदिर परिसर में कार्यरत जिन कर्मचारियों को कम भुगतान किया गया था, उनके कॉल डिटेल रिकॉर्ड (सीडीआर) की जांच कराई जानी चाहिए। उनका दावा था कि यदि निष्पक्ष जांच हुई तो कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आएंगे।
‘भाजपा के लिए धर्म नहीं, धन प्राथमिकता’
अखिलेश यादव ने भाजपा पर हमला तेज करते हुए कहा कि पार्टी धर्म की राजनीति तो करती है, लेकिन व्यवहार में उसकी प्राथमिकता केवल धन और सत्ता है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा अपने राजनीतिक हितों के अनुसार मुद्दों और विचारों को बदलती रहती है।
उन्होंने कहा कि यदि विपक्ष कोई शिकायत करता है तो उस पर कार्रवाई नहीं होती, जबकि विपक्षी नेताओं के खिलाफ तुरंत मुकदमे दर्ज कर दिए जाते हैं। यह लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए उचित संकेत नहीं है। उन्होंने कहा कि सत्ता स्थायी नहीं होती और भविष्य में भाजपा को भी विपक्ष में बैठना पड़ सकता है।
‘सिर्फ सांचा नहीं, पूरा ढांचा बदलना होगा’
अपने बयान में अखिलेश यादव ने कहा कि केवल व्यवस्था का “सांचा” बदलने से काम नहीं चलेगा, बल्कि पूरे “ढांचे” में बदलाव की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि देश का सनातन समाज मौजूदा परिस्थितियों से दुखी है। महंगाई, बेरोजगारी और धार्मिक संस्थाओं से जुड़े विवादों ने जनता के विश्वास को प्रभावित किया है।
उन्होंने कहा कि सरकार को धार्मिक संस्थाओं की गरिमा बनाए रखने के लिए ईमानदार प्रयास करने चाहिए। यदि किसी भी स्तर पर अनियमितता हुई है तो दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।
गौ संरक्षण को लेकर जताई चिंता
मुलाकात के दौरान गौ संरक्षण का मुद्दा भी प्रमुखता से उठा। अखिलेश यादव ने कहा कि शंकराचार्य गौमाता की स्थिति को लेकर अत्यंत चिंतित हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेश में बड़ी संख्या में निराश्रित गोवंश सड़कों पर घूम रहा है, जिससे किसानों और आम लोगों दोनों को परेशानी हो रही है।
उन्होंने सरकार से प्रभावी गौ संरक्षण नीति लागू करने की मांग करते हुए कहा कि केवल घोषणाओं से समस्या का समाधान नहीं होगा। गोशालाओं की स्थिति सुधारने और पशुओं के रखरखाव के लिए ठोस व्यवस्था करनी होगी।
“जो सनातन है, वही समाजवाद है!” pic.twitter.com/UDiscW42yl
— Akhilesh Yadav (@yadavakhilesh) July 9, 2026
शंकराचार्य ने ट्रस्ट पर उठाए सवाल
ज्योतिर्मठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने भी राम मंदिर से जुड़े घटनाक्रम पर गंभीर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि यदि मंदिर से जुड़े मामलों में गड़बड़ी के आरोप सामने आए हैं तो इसकी पूरी सच्चाई सामने आनी चाहिए।
उन्होंने सुझाव दिया कि वर्तमान ट्रस्ट की व्यवस्था पर पुनर्विचार किया जाए। उनके अनुसार, ट्रस्ट में धर्माचार्यों की अधिक भागीदारी होनी चाहिए ताकि धार्मिक संस्थानों का संचालन धार्मिक परंपराओं और मूल्यों के अनुरूप हो सके।
शंकराचार्य ने कहा कि चारों पीठों के शंकराचार्यों के साथ अयोध्या के प्रमुख संतों को भी ट्रस्ट में शामिल किया जाना चाहिए। उनका मानना है कि प्रशासनिक अधिकारियों के बजाय धर्माचार्यों की भूमिका अधिक महत्वपूर्ण होनी चाहिए।
कोषाध्यक्ष और ट्रस्ट पदाधिकारियों पर कार्रवाई की मांग
शंकराचार्य ने ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष गोविंद देव गिरी पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि यदि वित्तीय अनियमितता हुई है तो सबसे पहले जवाबदेही कोषाध्यक्ष की बनती है, क्योंकि ट्रस्ट के आय-व्यय और लेखा-जोखा की जिम्मेदारी उसी के पास होती है।
उन्होंने ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय पर भी निशाना साधते हुए कहा कि पूरे मामले की जिम्मेदारी तय होनी चाहिए और यदि किसी स्तर पर लापरवाही या अनियमितता हुई है तो संबंधित लोगों के खिलाफ कार्रवाई आवश्यक है।
राजनीतिक और धार्मिक हलकों में बढ़ी चर्चा
अखिलेश यादव और शंकराचार्य की यह मुलाकात ऐसे समय हुई है जब उत्तर प्रदेश की राजनीति में धर्म, मंदिर और गौ संरक्षण जैसे मुद्दे लगातार चर्चा में हैं। इस मुलाकात के बाद सियासी बयानबाजी और तेज होने की संभावना जताई जा रही है। विपक्ष जहां इस मुद्दे को सरकार की जवाबदेही से जोड़ रहा है, वहीं भाजपा की ओर से इन आरोपों का जवाब आने की भी उम्मीद है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि राम मंदिर जैसे संवेदनशील विषय पर शंकराचार्य और अखिलेश यादव के साझा स्वर आने से इस पूरे विवाद की राजनीतिक और सामाजिक गंभीरता बढ़ सकती है। अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि सरकार इन आरोपों और ट्रस्ट से जुड़े सवालों पर क्या रुख अपनाती है तथा जांच प्रक्रिया आगे किस दिशा में बढ़ती है।














