नई दिल्ली। देश की सबसे बड़ी और सबसे संवेदनशील प्रवेश परीक्षाओं में शामिल NEET-UG अब केवल एक परीक्षा नहीं, बल्कि करोड़ों परिवारों की उम्मीदों, युवाओं के सपनों और शिक्षा व्यवस्था की विश्वसनीयता की परीक्षा बन चुकी है। पिछले वर्ष सामने आई अनियमितताओं, पेपर लीक के आरोपों और उसके बाद देशभर में हुए विरोध-प्रदर्शनों से सबक लेते हुए केंद्र सरकार इस बार कोई जोखिम लेने के मूड में नहीं है।
इसी गंभीरता को देखते हुए गुरुवार को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के आवास पर एक उच्चस्तरीय बैठक आयोजित की गई, जिसमें शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान, केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया, राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) के महानिदेशक, शिक्षा मंत्रालय और प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए। करीब 40 मिनट चली इस बैठक में 21 जून को होने वाली NEET-UG परीक्षा की सुरक्षा, पारदर्शिता और संचालन व्यवस्था की विस्तृत समीक्षा की गई।
क्यों है यह परीक्षा राष्ट्रीय महत्व का विषय?
NEET-UG केवल मेडिकल कॉलेजों में प्रवेश की परीक्षा नहीं है। यह देश के लाखों छात्रों के वर्षों के परिश्रम, परिवारों के आर्थिक निवेश और उनके भविष्य की दिशा तय करने वाला सबसे महत्वपूर्ण शैक्षणिक मंच है।
इस वर्ष लगभग 22 से 23 लाख छात्र परीक्षा में शामिल होने जा रहे हैं। ऐसे में किसी भी प्रकार की तकनीकी, प्रशासनिक या सुरक्षा चूक सीधे तौर पर लाखों विद्यार्थियों के भविष्य को प्रभावित कर सकती है।
यही कारण है कि सरकार इस परीक्षा को केवल शिक्षा मंत्रालय का विषय न मानकर राष्ट्रीय प्राथमिकता के रूप में देख रही है।
पिछली गलतियों से सबक, अब ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति
3 मई को आयोजित परीक्षा को रद्द किए जाने के बाद सरकार को विपक्ष, अभिभावकों और छात्रों की तीखी आलोचना का सामना करना पड़ा था। पेपर लीक और परीक्षा की निष्पक्षता पर उठे सवालों ने NTA और पूरे परीक्षा तंत्र की साख को झटका पहुंचाया था।
सूत्रों के अनुसार, अनियमितताओं के शुरुआती संकेत मिलने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के निर्देश पर ही परीक्षा रद्द करने का निर्णय लिया गया। सरकार का मानना है कि लाखों छात्रों का भविष्य किसी भी प्रशासनिक गलती या आपराधिक साजिश की भेंट नहीं चढ़ सकता।
इस बार स्पष्ट संदेश दिया गया है कि परीक्षा प्रक्रिया में किसी भी स्तर पर लापरवाही या भ्रष्टाचार को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
PMO की सीधी निगरानी में पूरी परीक्षा प्रक्रिया
जानकारी के अनुसार, इस बार प्रश्नपत्र तैयार करने से लेकर उसकी प्रिंटिंग, सुरक्षित पैकेजिंग, परिवहन और परीक्षा केंद्रों तक पहुंचाने की पूरी प्रक्रिया पर प्रधानमंत्री कार्यालय की सीधी नजर है।
यह कदम इस बात का संकेत है कि सरकार परीक्षा की विश्वसनीयता बहाल करने के लिए हर स्तर पर जवाबदेही सुनिश्चित करना चाहती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि PMO की सक्रिय भागीदारी से न केवल प्रशासनिक सतर्कता बढ़ेगी बल्कि परीक्षा प्रणाली में जनता का विश्वास भी मजबूत होगा।
सुरक्षा के साथ छात्रों की सुविधा पर भी फोकस
परीक्षा सुरक्षा के अलावा छात्रों को परीक्षा केंद्रों तक पहुंचाने की व्यवस्था पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है। बिहार, पंजाब, हरियाणा सहित कई राज्यों ने परीक्षार्थियों के लिए सरकारी बसों में मुफ्त यात्रा की सुविधा देने का निर्णय लिया है।
यह पहल विशेष रूप से ग्रामीण और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के छात्रों के लिए राहतकारी साबित हो सकती है, जिन्हें परीक्षा केंद्र तक पहुंचने में अक्सर कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।
NTA के लिए भी प्रतिष्ठा की परीक्षा
इस बार की NEET परीक्षा केवल छात्रों के लिए ही नहीं बल्कि राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) के लिए भी एक बड़ी परीक्षा है। पिछले विवादों के बाद एजेंसी की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठे थे।
यदि 21 जून की परीक्षा बिना किसी विवाद, पेपर लीक या तकनीकी गड़बड़ी के सफलतापूर्वक संपन्न होती है, तो यह NTA के लिए विश्वास बहाली का अवसर साबित होगी। वहीं किसी भी नई चूक का असर केवल एजेंसी की साख पर नहीं, बल्कि पूरे परीक्षा तंत्र की विश्वसनीयता पर पड़ेगा।
देश की नजर 21 जून पर
21 जून अब केवल एक परीक्षा की तारीख नहीं रह गई है। यह दिन तय करेगा कि क्या भारत की परीक्षा प्रणाली पारदर्शिता, निष्पक्षता और सुरक्षा के नए मानक स्थापित कर सकती है।
लाखों छात्र अपनी मेहनत और सपनों के साथ परीक्षा कक्ष में प्रवेश करेंगे। उनके साथ-साथ देश भी यह देखेगा कि क्या सरकार, प्रशासन और परीक्षा एजेंसियां इस बार उन उम्मीदों पर पूरी तरह खरी उतरती हैं।
क्योंकि NEET में सफलता केवल अंकों की नहीं, बल्कि व्यवस्था में भरोसे की भी परीक्षा है।














