“सेक्टर-105 RWA अध्यक्ष दिव्य कृष्णात्रेय की प्राधिकरण और शासन से दोटूक अपील—पुलिसकर्मियों को सम्मानजनक आवास, मध्यम वर्ग को अपनी छत और रेहड़ी-पटरी वालों को व्यवस्थित वेंडिंग जोन मिले; विकास की चमक के बीच आम आदमी की जरूरतों को नजरअंदाज करना बंद हो”
नोएडा, 9 अक्टूबर 2026।
नोएडा की पहचान आज आसमान छूती इमारतों, चौड़ी सड़कों, आधुनिक आवासीय परिसरों और औद्योगिक विकास से होती है। शहर की चमकती तस्वीर देश के सामने आधुनिक शहरी विकास का आकर्षक उदाहरण प्रस्तुत करती है। लेकिन इस चमकदार तस्वीर के बीच एक बुनियादी सवाल भी खड़ा है—क्या विकास का लाभ शहर के हर वर्ग तक समान रूप से पहुंच रहा है? क्या उस पुलिसकर्मी को सम्मानजनक आवास उपलब्ध है, जो दिन-रात नागरिकों की सुरक्षा में जुटा रहता है? क्या वर्षों से नौकरी करके शहर की अर्थव्यवस्था को गति देने वाला मध्यमवर्गीय परिवार अपने घर का सपना पूरा कर पा रहा है? और क्या मेहनत-मजदूरी से जीवन चलाने वाले छोटे दुकानदारों तथा रेहड़ी-पटरी संचालकों को व्यवस्थित स्थान पर सम्मानपूर्वक कारोबार करने का अवसर मिल रहा है?
ये सवाल किसी शहर की सुंदरता पर सवाल उठाने के लिए नहीं, बल्कि उसकी तरक्की को अधिक समावेशी, संवेदनशील और टिकाऊ बनाने के लिए जरूरी हैं। सेक्टर-105 आरडब्ल्यूए अध्यक्ष दिव्य कृष्णात्रेय ने इन्हीं मुद्दों को केंद्र में रखते हुए नोएडा प्राधिकरण और शासन-प्रशासन से एक ऐसी व्यवस्था विकसित करने की अपील की है, जिसमें विकास का पैमाना केवल ऊंची इमारतें और चौड़ी सड़कें न हों, बल्कि आम नागरिक का जीवन, सरकारी कर्मचारियों की गरिमा और मेहनतकश लोगों का सम्मान भी हो।
उनका संदेश साफ है—नोएडा को केवल आर्थिक गतिविधियों का केंद्र नहीं, बल्कि हर वर्ग के लिए रहने योग्य, सुरक्षित और अवसरों से भरपूर शहर बनना चाहिए।
विकास की ऊंचाई बड़ी, लेकिन आम आदमी की उम्मीदें भी कम नहीं
नोएडा ने बीते वर्षों में शहरीकरण, उद्योग, रोजगार और आवास के क्षेत्र में अपनी अलग पहचान बनाई है। यहां देश के विभिन्न हिस्सों से लोग बेहतर भविष्य की उम्मीद लेकर आते हैं। कोई नौकरी के लिए, कोई कारोबार के लिए, कोई अपने परिवार को बेहतर सुविधाएं देने के लिए तो कोई अपने बच्चों के भविष्य को संवारने के लिए इस शहर को चुनता है।
लेकिन तेजी से विकसित होते शहरों के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह होती है कि आर्थिक प्रगति के साथ सामाजिक संतुलन भी बना रहे। यदि शहर में निवेश बढ़े, लेकिन सामान्य नौकरीपेशा परिवार के लिए घर खरीदना लगातार कठिन बना रहे; यदि सड़कों और बाजारों का विस्तार हो, लेकिन छोटे कारोबारियों के लिए व्यवस्थित स्थान की कमी बनी रहे; यदि सुरक्षा व्यवस्था मजबूत हो, लेकिन सुरक्षा में तैनात कर्मचारियों की आवासीय जरूरतें पर्याप्त रूप से पूरी न हों, तो विकास की तस्वीर में कुछ महत्वपूर्ण पहलुओं पर ध्यान देने की जरूरत बनी रहती है।
दिव्य कृष्णात्रेय की अपील इसी बुनियादी चिंता को सामने रखती है। उनका आग्रह है कि नोएडा की विकास योजनाओं में नागरिक सुविधाओं और सामाजिक जरूरतों को केवल सहायक विषय न माना जाए, बल्कि उन्हें प्राथमिकता के साथ स्थान दिया जाए।
शहर के रक्षक ही आवासीय चुनौतियों से जूझें, तो व्यवस्था पर सवाल उठेंगे
पुलिसकर्मी और विभिन्न सरकारी विभागों के कर्मचारी शहर की व्यवस्था को सुचारु बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। कानून-व्यवस्था बनाए रखने से लेकर यातायात प्रबंधन, नागरिक शिकायतों के निस्तारण और आपात परिस्थितियों में सहायता पहुंचाने तक, उनकी जिम्मेदारियां व्यापक हैं। कई कर्मचारियों को अनियमित ड्यूटी, लंबे कार्यकाल और दिन-रात की सेवाओं के बीच अपने परिवार की जरूरतों का भी ध्यान रखना पड़ता है।
ऐसे में सम्मानजनक और कार्यस्थल के अनुकूल आवास की उपलब्धता केवल व्यक्तिगत सुविधा का मामला नहीं है। इसका संबंध कर्मचारियों के जीवन की गुणवत्ता, कार्यक्षमता और परिवार की सुरक्षा से भी जुड़ा है।
दिव्य कृष्णात्रेय ने शासन और नोएडा प्राधिकरण से मांग की है कि पुलिसकर्मियों, अधिकारियों और अन्य पात्र सरकारी कर्मचारियों के लिए एक आधुनिक, सुव्यवस्थित तथा सर्वसुविधायुक्त आवासीय परिसर विकसित करने की संभावनाओं पर गंभीरता से विचार किया जाए। इसमें परिवारों की जरूरतों के अनुरूप आवास, जरूरी नागरिक सुविधाएं और सुरक्षित वातावरण सुनिश्चित करने की योजना बनाई जाए।
यह मांग केवल भवन निर्माण तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। इसके साथ आवास की वास्तविक जरूरत का आकलन, उपलब्ध सरकारी भूमि की समीक्षा, पात्रता के स्पष्ट मानदंड और चरणबद्ध क्रियान्वयन की रूपरेखा भी तैयार की जा सकती है।
सवाल यह है कि शहर की सुरक्षा और व्यवस्था में योगदान देने वाले कर्मचारियों को बेहतर आवासीय सुविधा उपलब्ध कराने के लिए ठोस, समयबद्ध योजना कब बनेगी? इसका जवाब संबंधित विभागों की प्राथमिकताओं और कार्ययोजना में दिखाई देना चाहिए।
मध्यम वर्ग: शहर की अर्थव्यवस्था का आधार, अपने घर के लिए अब भी इंतजार
नोएडा के विकास में नौकरीपेशा मध्यम वर्ग की भूमिका को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। निजी कंपनियों के कर्मचारी, शिक्षक, तकनीकी पेशेवर, छोटे कारोबारी और विभिन्न क्षेत्रों में काम करने वाले परिवार शहर की आर्थिक गतिविधियों को गति देते हैं। वे अपनी आय का बड़ा हिस्सा आवास, परिवहन, शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजमर्रा की जरूरतों पर खर्च करते हैं।
इनमें से अनेक परिवारों के लिए अपना घर खरीदना आसान नहीं होता। मकानों और भूखंडों की कीमत, शुरुआती भुगतान की जरूरत, बैंक ऋण की किस्तें और घरेलू खर्च के बीच संतुलन बनाना बड़ी चुनौती बन सकता है। किराये के मकान में रहने वाले परिवारों के लिए हर महीने का किराया उनकी बचत और भविष्य की योजनाओं को प्रभावित कर सकता है।
हालांकि, आवास की कठिनाई हर परिवार के लिए एक जैसी नहीं है और किसी भी नई योजना की सफलता उसके मूल्य, पात्रता, स्थान तथा वास्तविक मांग पर निर्भर करेगी। इसलिए जरूरी है कि प्राधिकरण केवल आवासीय विकास के आंकड़ों तक सीमित न रहे, बल्कि यह भी आकलन करे कि उसकी योजनाएं आर्थिक रूप से मध्यम वर्ग की पहुंच में कितनी हैं।
दिव्य कृष्णात्रेय ने किफायती आवास और भूखंड योजनाओं को प्राथमिकता देने की अपील की है। उनका सुझाव है कि पात्र नौकरीपेशा परिवारों और सामान्य आय वर्ग के लोगों के लिए ऐसी योजनाएं तैयार की जाएं, जिनकी कीमतें पारदर्शी हों और आवंटन प्रक्रिया निष्पक्ष हो।
प्राधिकरण चाहे तो आय-वर्ग के आधार पर आवासीय जरूरतों का सर्वेक्षण, उपलब्ध भूमि का मूल्यांकन और चरणबद्ध आवास योजनाओं की व्यवहार्यता की समीक्षा कर सकता है। इससे मांग और उपलब्धता के बीच अंतर को बेहतर ढंग से समझने में मदद मिलेगी।
आखिर शहर में मेहनत करने वाला परिवार यदि जीवनभर किराये और किस्तों के दबाव में ही उलझा रहे, तो समावेशी विकास का सपना कैसे पूरा होगा? यह प्रश्न किसी एक वर्ग का नहीं, बल्कि उस शहरी मॉडल का है जिसमें आर्थिक अवसरों के साथ रहने की वास्तविक क्षमता भी महत्वपूर्ण होनी चाहिए।
रेहड़ी-पटरी कारोबार: अतिक्रमण का सवाल भी, रोजी-रोटी का अधिकार भी
नोएडा के बाजारों, व्यावसायिक क्षेत्रों और आवासीय सेक्टरों के आसपास छोटे दुकानदारों, चाय-पान विक्रेताओं और रेहड़ी-पटरी संचालकों की मौजूदगी शहर की रोजमर्रा की जरूरतों से जुड़ी है। वे कम कीमत पर सामान और सेवाएं उपलब्ध कराते हैं तथा अपने परिवारों का भरण-पोषण करते हैं। लेकिन जब कारोबार के लिए निर्धारित स्थान पर्याप्त न हों या उपलब्ध व्यवस्थाएं व्यावहारिक न हों, तो सड़क, फुटपाथ और सार्वजनिक स्थानों के इस्तेमाल को लेकर विवाद उत्पन्न हो सकते हैं।
इस समस्या का समाधान न तो सभी छोटे कारोबारियों को एक ही नजर से देखने में है और न ही सार्वजनिक स्थानों पर अनियंत्रित कब्जे को उचित ठहराने में। फुटपाथ पैदल चलने वालों के लिए हैं, सड़कें यातायात के लिए और सार्वजनिक स्थान सभी नागरिकों के साझा उपयोग के लिए हैं। इनके अवरुद्ध होने से आम लोगों, बुजुर्गों, दिव्यांगजनों और स्कूली बच्चों को परेशानी हो सकती है। दूसरी ओर, आजीविका चलाने वाले छोटे कारोबारियों के लिए भी ऐसी व्यवस्था जरूरी है, जिसमें उन्हें नियमों के अनुरूप काम करने का अवसर मिले।
दिव्य कृष्णात्रेय ने प्रत्येक सेक्टर और प्रमुख व्यावसायिक क्षेत्र के आसपास उपयुक्त स्थानों पर ‘मॉडल वेंडिंग जोन’ विकसित करने का सुझाव दिया है। इन क्षेत्रों में स्वच्छता, कचरा निस्तारण, सुरक्षित आवागमन, निर्धारित दुकानों या ठेलों की जगह और स्पष्ट संचालन नियमों जैसी सुविधाएं सुनिश्चित की जा सकती हैं।
इसके लिए संबंधित कानूनों और नियमों के अनुरूप सर्वेक्षण, पात्र विक्रेताओं की पहचान, स्थान निर्धारण और पारदर्शी आवंटन व्यवस्था आवश्यक होगी। साथ ही यह भी सुनिश्चित करना होगा कि वेंडिंग जोन ऐसी जगह बनाए जाएं, जहां ग्राहकों की पहुंच बनी रहे और कारोबारियों की आजीविका पर अनावश्यक प्रतिकूल असर न पड़े।
प्राधिकरण, स्थानीय निकाय और संबंधित विभाग आपसी समन्वय से ऐसी व्यवस्था तैयार कर सकते हैं, जिसमें सार्वजनिक रास्ते अतिक्रमण से मुक्त रहें और मेहनतकश लोगों को सम्मानजनक विकल्प भी मिले।
व्यवस्था का उद्देश्य केवल हटाना नहीं, बल्कि समस्या का स्थायी समाधान निकालना होना चाहिए। नियोजित वेंडिंग जोन शहर की सुंदरता, यातायात और आजीविका—तीनों के बीच संतुलन बनाने का व्यावहारिक रास्ता बन सकते हैं।
सिर्फ इमारतों से नहीं, नीतियों की संवेदनशीलता से बनती है शहर की पहचान
किसी शहर की वास्तविक सफलता का आकलन केवल उसकी ऊंची इमारतों, चमकदार सड़कों और निवेश के आंकड़ों से नहीं किया जा सकता। यह भी देखना पड़ता है कि वहां रहने वाले लोगों को बुनियादी सुविधाएं कितनी आसानी से मिलती हैं, कामगारों को कितनी सुरक्षा मिलती है और आम परिवारों के लिए आगे बढ़ने के अवसर कितने उपलब्ध हैं।
शहरी विकास की योजनाओं में आवास, यातायात, रोजगार, स्वच्छता और सार्वजनिक स्थानों का संतुलित नियोजन महत्वपूर्ण है। इसी तरह योजनाओं के क्रियान्वयन में पारदर्शिता, पात्रता के स्पष्ट नियम और नागरिकों की भागीदारी भरोसा मजबूत कर सकते हैं।
दिव्य कृष्णात्रेय का प्रस्ताव इसी सोच को आगे बढ़ाता है। उनका मानना है कि पुलिस और सरकारी कर्मचारियों के लिए आवास, मध्यम वर्ग के लिए किफायती घर और छोटे कारोबारियों के लिए व्यवस्थित वेंडिंग जोन—इन तीनों विषयों को एक व्यापक शहरी विकास दृष्टिकोण के हिस्से के रूप में देखा जाना चाहिए।
यह किसी एक विभाग की जिम्मेदारी भर नहीं है। आवासीय नीति, भूमि प्रबंधन, शहरी नियोजन, यातायात व्यवस्था और स्थानीय आजीविका से जुड़े विभागों के बीच तालमेल जरूरी होगा। साथ ही, प्रस्तावों की व्यवहार्यता, वित्तीय संसाधनों और उपलब्ध भूमि की वास्तविक स्थिति का अध्ययन करके ही प्रभावी कार्ययोजना बनाई जा सकती है।
अब अपील से आगे बढ़कर कार्ययोजना की जरूरत
दिव्य कृष्णात्रेय ने नोएडा प्राधिकरण और शासन-प्रशासन से संवेदनशीलता के साथ इन मुद्दों पर विचार करने का आग्रह किया है। उनके संदेश का मूल भाव है कि शहर का विकास तभी सार्थक होगा, जब उसमें हर वर्ग के लिए सम्मानजनक जीवन की संभावनाएं हों।
अब इस अपील को ठोस नीतिगत पहल में बदलने के लिए कुछ स्पष्ट कदम उठाए जा सकते हैं। सरकारी कर्मचारियों की आवासीय जरूरतों का आकलन किया जाए। मध्यम वर्ग के लिए प्रस्तावित आवासीय योजनाओं की मांग, लागत और उपलब्धता की समीक्षा की जाए। छोटे कारोबारियों के लिए उपयुक्त वेंडिंग स्थलों की पहचान कर नियमबद्ध व्यवस्था तैयार की जाए। प्रत्येक प्रस्ताव के लिए जिम्मेदार विभाग, समयसीमा और प्रगति की जानकारी सार्वजनिक करने पर भी विचार किया जा सकता है।
ऐसी पहल से नागरिकों को केवल आश्वासन नहीं, बल्कि निर्णय प्रक्रिया और उसके परिणामों को समझने का अवसर मिलेगा। साथ ही, योजनाओं के चयन और क्रियान्वयन में नागरिकों तथा आरडब्ल्यूए की रचनात्मक भागीदारी सुनिश्चित की जा सकेगी।
यह स्पष्ट करना भी जरूरी है कि ये मांगें और सुझाव हैं; इनके आधार पर यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि प्राधिकरण या शासन ने संबंधित वर्गों की जरूरतों की अनदेखी की है। वास्तविक स्थिति का आकलन मौजूदा योजनाओं, उपलब्ध आंकड़ों और विभागीय कार्ययोजनाओं की समीक्षा के बाद ही किया जाना चाहिए।
‘सबका नोएडा, समृद्ध नोएडा’—नारा नहीं, जवाबदेही का संकल्प बने
नोएडा को और सुंदर, सुरक्षित तथा व्यवस्थित बनाने की आकांक्षा तभी पूरी होगी, जब विकास की योजनाओं में उन लोगों की जरूरतें भी शामिल होंगी, जो शहर को रोजाना चलाते हैं। सुरक्षा में तैनात कर्मचारी, अपने घर के लिए संघर्षरत नौकरीपेशा परिवार और मेहनत से रोजी कमाने वाले छोटे कारोबारी—ये सभी शहर की सामाजिक और आर्थिक संरचना का हिस्सा हैं।
सेक्टर-105 आरडब्ल्यूए अध्यक्ष दिव्य कृष्णात्रेय की अपील इसी व्यापक सोच को सामने रखती है। उनका आग्रह है कि नोएडा की अगली विकास यात्रा में आवासीय सुविधा, आजीविका और मानवीय गरिमा को भी उतनी ही अहमियत मिले, जितनी आधुनिक बुनियादी ढांचे को दी जाती है।
अब निगाहें शासन और प्राधिकरण पर हैं कि इन प्रस्तावों पर किस स्तर पर विचार किया जाता है और क्या इन्हें व्यावहारिक योजनाओं में बदलने की दिशा में कदम उठाए जाते हैं।
क्योंकि शहर की असली ऊंचाई उसकी इमारतों से नहीं, बल्कि अपने नागरिकों को दिए गए सम्मान, अवसर और सुरक्षा से मापी जाती है।
‘सबका नोएडा, समृद्ध नोएडा’ का संकल्प तभी सार्थक होगा, जब विकास की चमक हर उस परिवार तक पहुंचे, जो इस शहर को अपना घर मानता है और इसे बेहतर बनाने में अपना योगदान देता है।















