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दवाओं के बिना स्वस्थ जीवन की ओर बढ़ें, फिजियोथेरेपी को बनाएं दिनचर्या का हिस्सा : केंद्रीय राज्य मंत्री बीएल वर्मा

“कमर, गर्दन और घुटनों के दर्द से लेकर स्ट्रोक व हृदय रोग के बाद पुनर्वास तक फिजियोथेरेपी बनी उम्मीद की किरण | नोएडा में आयोजित कार्यक्रम में स्वास्थ्य जागरूकता का संदेश”

नोएडा: बदलती जीवनशैली, घंटों कुर्सी पर बैठकर काम करने की आदत, शारीरिक गतिविधियों में कमी और गलत पोश्चर ने कम उम्र में ही कमर, गर्दन, कंधे और घुटनों के दर्द जैसी समस्याओं को आम बना दिया है। ऐसे दौर में फिजियोथेरेपी केवल दर्द से राहत देने की पद्धति नहीं, बल्कि शरीर की कार्यक्षमता को बेहतर बनाए रखने और कई बीमारियों से बचाव का प्रभावी माध्यम बनकर सामने आ रही है।

व्यायाम, एक्सरसाइज, मसाज और आधुनिक मशीनों की मदद से शारीरिक दर्द एवं विभिन्न स्वास्थ्य समस्याओं के प्रबंधन में फिजियोथेरेपी की भूमिका लगातार बढ़ रही है। कमर और गर्दन के दर्द से लेकर सर्वाइकल, स्पॉन्डिलाइटिस, लकवा यानी स्ट्रोक, हृदय रोग के बाद रिकवरी, चोट, फ्रैक्चर तथा ऑपरेशन के बाद पुनर्वास तक चिकित्सक कई परिस्थितियों में फिजियोथेरेपी की सलाह देते हैं।

यह बात केंद्रीय राज्य मंत्री बीएल वर्मा ने विश्व फिजियोथेरेपी दिवस के अवसर पर सेक्टर-70, नोएडा में फर्स्टवन रिहैब फाउंडेशन द्वारा आयोजित कार्यक्रम में कही।

‘फिजियोथेरेपी को केवल दिव्यांगजनों तक सीमित न समझें’

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि केंद्रीय राज्य मंत्री बीएल वर्मा ने कहा कि फिजियोथेरेपी को केवल दिव्यांगजनों के उपचार तक सीमित समझना सही नहीं है। उन्होंने कहा कि स्वस्थ जीवन जीने, शरीर की क्षमता बनाए रखने और कई रोगों की रोकथाम के लिए भी फिजियोथेरेपी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

उन्होंने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि नियमित व्यायाम और आवश्यकता के अनुसार समय पर फिजियोथेरेपी अपनाने से शरीर की मूवमेंट और ताकत को बनाए रखने में मदद मिलती है। गलत पोश्चर को ठीक करने और शारीरिक सक्रियता बढ़ाने में भी इसका महत्वपूर्ण योगदान है।

मंत्री ने लोगों से स्वास्थ्य के प्रति जागरूक रहने और बीमारी बढ़ने का इंतजार करने के बजाय समय रहते शरीर की समस्याओं पर ध्यान देने का आह्वान किया।

दर्द से राहत ही नहीं, शरीर को फिर से सक्रिय बनाने पर जोर

फिजियोथेरेपी का उद्देश्य केवल दर्द को कम करना नहीं है। इसका बड़ा लक्ष्य शरीर की मूवमेंट, मांसपेशियों की ताकत और दैनिक गतिविधियों को बेहतर बनाना है। चोट या फ्रैक्चर के बाद शरीर को सामान्य गतिविधियों में लौटाने से लेकर ऑपरेशन के बाद पुनर्वास तक फिजियोथेरेपी मरीज की रिकवरी प्रक्रिया का महत्वपूर्ण हिस्सा बन सकती है।

विशेषज्ञों के अनुसार, लंबे समय तक गलत तरीके से बैठने, लगातार कंप्यूटर या मोबाइल का इस्तेमाल करने और शारीरिक गतिविधि की कमी से पैदा होने वाली समस्याओं में व्यायाम एवं सही शारीरिक मुद्रा पर विशेष ध्यान आवश्यक है।

फाउंडेशन से जुड़े अनुभवी चिकित्सकों डॉ. महिपाल सिंह, डॉ. दीक्षा सिंह और डॉ. सुष्मिता भाटी ने भी कार्यक्रम में फिजियोथेरेपी के विभिन्न पहलुओं और मरीजों को जागरूक करने की आवश्यकता पर प्रकाश डाला।

चार शहरों में चला दो दिवसीय स्वास्थ्य जागरूकता अभियान

विश्व फिजियोथेरेपी दिवस के अवसर पर फर्स्टवन रिहैब फाउंडेशन ने इस वर्ष एक व्यापक पहल करते हुए चार शहरों में दो दिवसीय फिजियोथेरेपी एवं स्वास्थ्य जागरूकता शिविर आयोजित किया।

7 और 8 सितंबर तक चले ये शिविर फाउंडेशन के चार केंद्रों पर आयोजित किए गए। नोएडा के अलावा जौनपुर में स्नेह राजेश ट्रस्ट, देहरादून में विंसम स्टेप्स और प्रयागराज में गायत्री पुनर्वास केंद्र के सहयोग से शिविर लगाए गए।

आयोजकों के मुताबिक इन शिविरों में कुल 263 मरीजों को निःशुल्क जांच, परामर्श एवं उपचार उपलब्ध कराया गया। शिविर का उद्देश्य लोगों को फिजियोथेरेपी के प्रति जागरूक करने के साथ-साथ स्ट्रोक और हृदय रोगों से बचाव, प्रबंधन तथा पुनर्वास के प्रति जानकारी देना रहा।

इस वर्ष कार्यक्रम की थीम भी ‘स्ट्रोक एवं हृदय रोगों की रोकथाम, प्रबंधन एवं पुनर्वास’ रखी गई।

एरोबिक और स्ट्रेचिंग से लेकर सीपीआर तक प्रशिक्षण

शिविर के दौरान मरीजों और आम लोगों को केवल परामर्श ही नहीं दिया गया, बल्कि उन्हें व्यावहारिक प्रशिक्षण भी प्रदान किया गया। प्रतिभागियों को एरोबिक और स्ट्रेचिंग जैसे व्यायामों का अभ्यास कराया गया, ताकि वे इन्हें अपनी दैनिक दिनचर्या में शामिल कर सकें।

फाउंडेशन के फिजियोथेरेपिस्ट अभिनव प्रताप सिंह ने मरीजों को विभिन्न व्यायामों का अभ्यास कराया और उन्हें सही तरीके से शारीरिक गतिविधियां करने की जानकारी दी।

कार्यक्रम में विशेषज्ञों ने अलग-अलग स्वास्थ्य समस्याओं पर महत्वपूर्ण जानकारियां साझा कीं। डॉ. महिपाल सिंह ने वर्क रिलेटेड डिसऑर्डर्स यानी कामकाज और जीवनशैली से जुड़ी शारीरिक समस्याओं पर चर्चा की।

वहीं डॉ. दीक्षा सिंह ने न्यूरो एवं स्ट्रोक पुनर्वास से संबंधित महत्वपूर्ण पहलुओं की जानकारी दी। डॉ. सुष्मिता भाटी ने महिलाओं से जुड़ी स्वास्थ्य समस्याओं और उनके प्रबंधन में फिजियोथेरेपी की भूमिका पर प्रकाश डाला।

इसके अलावा डॉ. प्रीति ने सीपीआर के माध्यम से जीवन बचाने की महत्वपूर्ण तकनीक के बारे में लोगों को जानकारी दी।

बच्चों और महिलाओं के लिए भी उपयोगी

कार्यक्रम में विशेषज्ञों ने यह संदेश भी दिया कि फिजियोथेरेपी की उपयोगिता केवल बुजुर्गों या गंभीर बीमारी से जूझ रहे मरीजों तक सीमित नहीं है। बच्चों के विकास से जुड़ी कुछ शारीरिक समस्याओं और महिलाओं से संबंधित विभिन्न स्वास्थ्य समस्याओं में भी विशेषज्ञ की सलाह के अनुसार फिजियोथेरेपी उपयोगी हो सकती है।

इसी तरह स्ट्रोक के बाद मरीज के शरीर की गतिविधियों को दोबारा बेहतर बनाने, मांसपेशियों की ताकत बढ़ाने और दैनिक जीवन की गतिविधियों में वापस लाने की प्रक्रिया में पुनर्वास महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

हृदय रोगों के बाद भी चिकित्सकीय सलाह और निगरानी में शारीरिक सक्रियता तथा पुनर्वास को महत्व दिया जाता है।

दिव्यांग बच्चों के लिए किए जा रहे कार्यों की सराहना

कार्यक्रम के दौरान प्रसिद्ध कवि शंभू शिखर ने डॉ. महिपाल सिंह को सम्मानित किया। उन्होंने दिव्यांग बच्चों के लिए किए जा रहे कार्यों की सराहना करते हुए फाउंडेशन की पहल को समाज के लिए उपयोगी बताया।

सम्मान समारोह के दौरान मौजूद लोगों ने भी फिजियोथेरेपी को लेकर जागरूकता फैलाने और जरूरतमंद लोगों तक स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने के प्रयासों की प्रशंसा की।

बीमारी का इंतजार नहीं, शरीर की आवाज सुनने की जरूरत

आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में लोग अक्सर दर्द को सामान्य मानकर नजरअंदाज कर देते हैं। गर्दन या कमर का लगातार दर्द हो, कंधे में जकड़न हो, घुटनों में परेशानी हो या लंबे समय तक बैठे रहने के कारण शरीर में खिंचाव—इन समस्याओं को शुरुआती स्तर पर समझना जरूरी है।

विशेषज्ञों का संदेश स्पष्ट है कि फिजियोथेरेपी का इस्तेमाल चिकित्सकीय सलाह और सही आकलन के आधार पर किया जाना चाहिए। हर व्यक्ति के लिए एक जैसी एक्सरसाइज उपयुक्त नहीं होती। इसलिए प्रशिक्षित फिजियोथेरेपिस्ट से परामर्श के बाद ही व्यायाम और पुनर्वास कार्यक्रम अपनाना बेहतर है।

विश्व फिजियोथेरेपी दिवस पर आयोजित इस कार्यक्रम ने यही संदेश दिया कि स्वस्थ शरीर केवल दवाओं से नहीं, बल्कि सही व्यायाम, बेहतर पोश्चर, नियमित शारीरिक सक्रियता और समय पर पुनर्वास से भी मजबूत बनता है।

फर्स्टवन रिहैब फाउंडेशन की ओर से आयोजित चार शहरों के शिविर में 263 मरीजों तक पहुंच और विशेषज्ञों द्वारा दिए गए प्रशिक्षण ने इस दिशा में जागरूकता बढ़ाने की कोशिश की। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे।

 

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VIKAS TRIPATHI
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