वाराणसी के फूलपुर थाना क्षेत्र के भरथरा/घमहापुर गांव से इंसानियत को शर्मसार कर देने वाली दर्दनाक घटना सामने आई है, जहां मामूली सड़क हादसा देखते ही देखते खूनी भीड़तंत्र में बदल गया। दोना-पत्तल का कारोबार करने वाले युवा व्यवसायी मनीष सिंह की गुस्साई भीड़ ने बेरहमी से पीट-पीटकर हत्या कर दी। पुलिस के मुताबिक घटना रविवार देर रात की है, जब मनीष सिंह अपनी फैक्ट्री से घर लौट रहे थे. इसी दौरान उनकी कार की चपेट में सड़क किनारे बर्तन धो रही एक महिला आ गई, जिसके बाद विवाद इतना बढ़ा कि दर्जनों लोगों ने मनीष को कार से खींचकर लाठी-डंडों और लात-घूंसों से हमला कर दिया. गंभीर चोटों के चलते उनकी मौके पर ही मौत हो गई.
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार मनीष सिंह रहम की भीख मांगते रहे, लेकिन उग्र भीड़ पर जैसे कानून और इंसानियत दोनों का असर खत्म हो चुका था। करीब 15 से अधिक हमलावरों ने उन्हें लंबे समय तक पीटा. जब तक परिवार और पुलिस पहुंचती, तब तक बहुत देर हो चुकी थी. इस बर्बर हत्या ने पूरे इलाके को दहला दिया है और गांव में मातम पसरा हुआ है.
परिवार का बड़ा आरोप — यह सिर्फ हादसा नहीं, रंजिशन हत्या
मृतक के परिजनों ने इस मामले को केवल सड़क हादसे के बाद उपजा गुस्सा मानने से इनकार किया है। परिवार का आरोप है कि मनीष सिंह को पहले से निशाना बनाया गया था और मामूली टक्कर को बहाना बनाकर सुनियोजित तरीके से उनकी हत्या की गई। परिजनों का कहना है कि मनीष को बचाने की बजाय भीड़ सीधे जान लेने पर उतारू थी, जिससे रंजिश की आशंका और गहरी हो गई है.
परिवार ने दोषियों के खिलाफ हत्या की साजिश, भीड़ हिंसा और सुनियोजित हमला करने की धाराओं में कड़ी कार्रवाई की मांग की है. इस घटना के बाद सोशल मीडिया पर भी “Justice For Manish Singh” की मांग तेज हो गई है.
4 आरोपी गिरफ्तार, 8 नामजद समेत कई पर FIR
पुलिस ने मनीष सिंह के परिवार की तहरीर पर 8 नामजद और 7 अज्ञात लोगों के खिलाफ हत्या, दंगा और सामूहिक हिंसा की गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज किया है। अब तक चार आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है, जबकि बाकी की तलाश में लगातार दबिश दी जा रही है. इतना ही नहीं, आरोपियों को पकड़ने गई SOG टीम पर भी करीब 60 लोगों की भीड़ ने हमला कर दिया, जिससे गांव में हालात की गंभीरता का अंदाजा लगाया जा सकता है.
गांव छावनी में तब्दील, भारी पुलिस बल तैनात
हत्या के बाद भरथरा गांव में जबरदस्त तनाव है। किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए भारी पुलिस फोर्स, PAC और आला अधिकारियों की तैनाती कर दी गई है. पुलिस लगातार फ्लैग मार्च कर रही है और माहौल को शांत रखने की कोशिश की जा रही है. परिजनों और ग्रामीणों में गुस्सा इतना ज्यादा है कि शव पहुंचते ही विरोध प्रदर्शन शुरू हो गया था, जिसे अधिकारियों ने समझाकर शांत कराया.
सबसे बड़ा सवाल — क्या अब कानून से ऊपर हो गई भीड़?
एक मामूली दुर्घटना… और उसके बदले किसी की जान!
क्या सड़क हादसे का फैसला अब अदालत नहीं, भीड़ करेगी?
क्या गुस्से में इंसानियत इतनी सस्ती हो गई है कि किसी को पीट-पीटकर मार देना सामान्य बात बन जाए?
वाराणसी की यह घटना सिर्फ एक हत्या नहीं, बल्कि भीड़तंत्र के बढ़ते दुस्साहस का भयावह चेहरा है। अगर दोषियों को जल्द और सख्त सजा नहीं मिली, तो यह संदेश जाएगा कि कानून से बड़ा अब भीड़ का फैसला है.
“मनीष सिंह को न्याय मिले… दोषियों को कठोरतम सजा हो।”














