इलाहाबाद हाईकोर्ट का आदेश, प्रशासकों की नियुक्ति को दी वैधता; चुनाव में 27 प्रतिशत आरक्षण का होगा पालन**
प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश में तीन महीने के अंदर पंचायत चुनाव कराने का आदेश दिया है। बुधवार को न्यायमूर्ति अजीत कुमार और न्यायमूर्ति गरिमा प्रसाद की खंडपीठ ने करीब तीन घंटे की सुनवाई के बाद यह फैसला सुनाया। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि पंचायत चुनाव होने तक निवर्तमान ग्राम प्रधान प्रशासक के रूप में बने रहेंगे।
मामला ग्राम पंचायतों का कार्यकाल समाप्त होने के बाद निवर्तमान प्रधानों को प्रशासक नियुक्त किए जाने के फैसले को चुनौती देने वाली याचिकाओं से जुड़ा था। कोर्ट ने प्रशासकों की नियुक्ति संबंधी शासनादेश को वैध माना और इसके खिलाफ दाखिल सभी याचिकाएं खारिज कर दीं।
हाईकोर्ट ने सरकार को तीन महीने के भीतर पंचायत निकायों के चुनाव संपन्न कराने का निर्देश दिया। साथ ही कहा कि अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) आयोग अपना काम जारी रखेगा, लेकिन चुनाव प्रक्रिया आयोग के काम पर निर्भर नहीं रहेगी। चुनाव मौजूदा नियमों और व्यवस्था के तहत कराए जाएंगे तथा 27 प्रतिशत आरक्षण के प्रावधान का पालन किया जाएगा।
पंचायतीराज मंत्री ओमप्रकाश राजभर ने हाईकोर्ट के फैसले का स्वागत किया। हालांकि, उन्होंने कहा कि सरकार के पास सुप्रीम कोर्ट जाने का विकल्प भी है।
मुख्य याचिकाकर्ता इम्तियाज हुसैन के मुताबिक, लखनऊ बेंच में दाखिल कुछ याचिकाओं को भी इलाहाबाद हाईकोर्ट में सुनवाई के लिए जोड़ दिया गया था, जिन्हें अदालत ने खारिज कर दिया।
वहीं, याचिकाकर्ता राय साहब यादव ने कहा कि सरकार ने आयोग की रिपोर्ट पूरी नहीं होने और आरक्षण व्यवस्था में सुधार की प्रक्रिया लंबित होने का हवाला दिया था। हाईकोर्ट के आदेश के बाद अब तीन महीने में चुनाव कराने की समयसीमा तय हो गई है। इससे प्रदेश में पंचायत चुनाव की तैयारियों में तेजी आने की उम्मीद है।















