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नैनीताल में दौड़ते-दौड़ते थम गई ज़िंदगी: 19 वर्षीय युवक की कार्डियक अरेस्ट से मौत

नैनीताल, उत्तराखंड —
पहाड़ों की ठंडी सुबह, सड़क पर दौड़ते कदम, और एक सपना — लेकिन बुधवार की सुबह नैनीताल में एक 19 वर्षीय युवक की ज़िंदगी अचानक थम गई। मैराथन की तैयारी कर रहे भूपेंद्र देवली की कार्डियक अरेस्ट से मौत हो गई। यह हादसा तब हुआ जब वह अपने दोस्त के साथ सुबह दौड़ लगा रहा था।

भूपेंद्र, जो हल्द्वानी के पाल कॉलेज में एमसीए का छात्र था, अपने उज्जवल भविष्य की तैयारी में जुटा था। लेकिन एक सामान्य-सी लगने वाली दौड़ उसकी आखिरी दौड़ साबित हुई।


तेज दौड़ के साथ थमा दिल, सड़क पर गिर पड़ा भूपेंद्र

प्रत्यक्षदर्शी और भूपेंद्र के दोस्त विवेक (20) के अनुसार, दोनों बुधवार सुबह करीब 5:30 बजे भुवाली रोड पर दौड़ की प्रैक्टिस कर रहे थे। जैसे ही भूपेंद्र ने कैलाखान क्षेत्र के पास अपनी गति बढ़ाई, वह अचानक ज़मीन पर मुंह के बल गिर पड़ा और बेहोश हो गया।

घबराए विवेक ने उसे तुरंत तल्लीताल तक बस से पहुंचाया और फिर एक कार की मदद से मल्लीताल स्थित बीडी पांडे अस्पताल ले गया। लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी — डॉक्टरों ने भूपेंद्र को मृत घोषित कर दिया।


इलाज में देरी बनी मौत की वजह

प्रारंभिक जांच और डॉक्टरों की राय के अनुसार, भूपेंद्र की मौत कार्डियक अरेस्ट के कारण हुई। यदि समय रहते उसे CPR या मेडिकल सहायता मिल जाती, तो शायद उसकी जान बचाई जा सकती थी।
“भूपेंद्र को अस्पताल लाने में जो देरी हुई, वह ही उसकी जान ले गई,” अस्पताल सूत्रों ने बताया।


पोस्टमार्टम के बाद परिजनों को सौंपा गया शव

तल्लीताल थाना प्रभारी रमेश बोरा ने पुष्टि की कि पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों को सौंप दिया गया है।
“परिवार सदमे में है। रो-रो कर उनका बुरा हाल है,” उन्होंने बताया।


हार्ट अटैक और कार्डियक अरेस्ट में क्या है फर्क?

भूपेंद्र की मौत कार्डियक अरेस्ट से हुई, जो अक्सर हार्ट अटैक से अलग होता है।

हार्ट अटैक में हृदय की धमनियों में ब्लॉकेज होने से रक्त प्रवाह बाधित होता है।

जबकि कार्डियक अरेस्ट में दिल की धड़कन अचानक रुक जाती है, और व्यक्ति बेहोश होकर सांस लेना बंद कर देता है।

कार्डियक अरेस्ट अधिक गंभीर होता है, और इसमें तुरंत CPR देने की आवश्यकता होती है। हर सेकंड की देरी जानलेवा साबित हो सकती है।


एक चेतावनी, एक सबक

भूपेंद्र की असमय मौत ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या हम फिटनेस की तैयारी के साथ-साथ आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं के प्रति सजग हैं? क्या युवाओं को हार्ट हेल्थ की पर्याप्त जानकारी दी जाती है?

मैराथन की तैयारी कर रहा यह होनहार छात्र अब हमारे बीच नहीं है — लेकिन उसकी यह घटना समाज को जागरूक कर सकती है, अगर हम चाहें।

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VIKAS TRIPATHI
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