ढाका: बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री Sheikh Hasina की पार्टी Awami League को बड़ा राजनीतिक राहत संकेत मिला है। चुनाव आयोग ने आगामी स्थानीय निकाय और पंचायत चुनावों में आवामी लीग से जुड़े नेताओं को कुछ शर्तों के साथ चुनाव लड़ने की अनुमति देने का फैसला किया है।
2024 में हुए सत्ता परिवर्तन के बाद आवामी लीग पर प्रतिबंध लगा दिया गया था और पार्टी को राष्ट्रीय राजनीति से लगभग बाहर कर दिया गया था। इसके चलते फरवरी 2026 के आम चुनाव में भी पार्टी हिस्सा नहीं ले सकी।
शर्तों के साथ मिलेगी चुनाव लड़ने की अनुमति
रिपोर्टों के अनुसार, आवामी लीग से जुड़े नेताओं को चुनाव लड़ने के लिए एक हलफनामा देना होगा। इसमें उम्मीदवारों को यह घोषित करना होगा कि वे किसी प्रतिबंधित संगठन की गतिविधियों में शामिल नहीं हैं। शर्तों को पूरा करने के बाद उनके नामांकन स्वीकार किए जा सकेंगे।
राजनीतिक समीकरण बदलने की कोशिश
विश्लेषकों का मानना है कि यह फैसला बांग्लादेश की राजनीति में नए समीकरण पैदा कर सकता है। सत्तारूढ़ BNP के कुछ नेता चाहते हैं कि आवामी लीग के अपेक्षाकृत साफ छवि वाले नेता चुनावी प्रक्रिया में शामिल हों, जिससे राजनीतिक प्रतिस्पर्धा बनी रहे। वहीं, विरोधी खेमे को आशंका है कि इससे आवामी लीग दोबारा मजबूत हो सकती है।
2024 के बाद बदला था राजनीतिक परिदृश्य
अगस्त 2024 में छात्र आंदोलन के बाद शेख हसीना की सरकार सत्ता से बाहर हो गई थी। इसके बाद अंतरिम प्रशासन ने आवामी लीग की गतिविधियों पर प्रतिबंध लगा दिया था। बाद में पार्टी का पंजीकरण भी निलंबित कर दिया गया, जिससे उसके लिए चुनाव लड़ना मुश्किल हो गया।
क्या होगी शेख हसीना की वापसी?
स्थानीय चुनावों में आवामी लीग नेताओं की संभावित वापसी को बांग्लादेश की राजनीति में एक महत्वपूर्ण मोड़ माना जा रहा है। हालांकि पार्टी पर लगा प्रतिबंध अभी पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है, लेकिन स्थानीय स्तर पर चुनावी भागीदारी का रास्ता खुलना उसके लिए भविष्य की राजनीति में वापसी का संकेत माना जा रहा है।














