नई दिल्ली: भारतीय क्रिकेट में प्रतिभाओं को तलाशने, उन्हें तराशने और राष्ट्रीय स्तर तक पहुंचाने की प्रक्रिया में जूनियर क्रिकेट व्यवस्था की भूमिका बेहद अहम है। इसी व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में क्रिकेट सलाहकार समिति (CAC) ने जूनियर क्रिकेट समिति के गठन को लेकर चयन प्रक्रिया पूरी करते हुए चार नामों की सिफारिश की है। पूर्व भारतीय तेज गेंदबाज परविंदर अवाना को समिति का अध्यक्ष बनाने की सिफारिश की गई है, जबकि कृष्णा दास, राकेश पटेल और एन. अर्जुन यादव को सदस्य के रूप में शामिल करने की अनुशंसा की गई है। समिति में पांचवें सदस्य की नियुक्ति अभी बाकी है, जिसे जल्द पूरा किए जाने की बात कही गई है।
यह नियुक्ति प्रक्रिया केवल कुछ पूर्व क्रिकेटरों को नई जिम्मेदारी सौंपने तक सीमित नहीं है। जूनियर क्रिकेट भारतीय क्रिकेट की उस बुनियाद से जुड़ा है, जहां खिलाड़ियों की तकनीक, अनुशासन, खेल की समझ और दबाव में प्रदर्शन करने की क्षमता विकसित होती है। इसी स्तर पर होने वाले चयन और प्रशिक्षण से भविष्य की राज्य स्तरीय तथा राष्ट्रीय टीमों के लिए प्रतिभाएं तैयार होती हैं। ऐसे में समिति के सदस्यों का अनुभव, उनकी क्रिकेट संबंधी समझ और युवा खिलाड़ियों के साथ काम करने की क्षमता महत्वपूर्ण मानी जाती है।
क्रिकेट सलाहकार समिति ने आवेदकों की स्क्रीनिंग और साक्षात्कार के बाद इन नामों की सिफारिश की है। घोषित जानकारी के अनुसार, चयन प्रक्रिया के बाद चार पदों के लिए नाम सामने आए हैं, जबकि पांचवें सदस्य के चयन की प्रक्रिया अभी पूरी होनी है। हालांकि, उपलब्ध जानकारी में चयन के लिए निर्धारित विस्तृत मानदंड, आवेदकों की कुल संख्या और प्रत्येक उम्मीदवार के मूल्यांकन का ब्योरा सार्वजनिक नहीं किया गया है। इसलिए इस नियुक्ति को लेकर अंतिम निष्कर्ष निकालने के बजाय समिति के घोषित फैसले और चुने गए उम्मीदवारों के क्रिकेट एवं कोचिंग अनुभव पर ध्यान देना अधिक उचित होगा।
परविंदर अवाना के हाथों में अध्यक्ष की जिम्मेदारी
जूनियर क्रिकेट समिति के अध्यक्ष पद के लिए परविंदर अवाना का नाम सबसे प्रमुख है। भारतीय टीम के लिए दो टी20 अंतरराष्ट्रीय मुकाबले खेल चुके अवाना के पास घरेलू क्रिकेट का व्यापक अनुभव है। उन्होंने प्रथम श्रेणी क्रिकेट के 62 मुकाबलों में 191 विकेट हासिल किए। दिल्ली, इंडिया ए और रेस्ट ऑफ इंडिया का प्रतिनिधित्व करने के साथ वह इंडियन प्रीमियर लीग में किंग्स इलेवन पंजाब, जिसे अब पंजाब किंग्स के नाम से जाना जाता है, की ओर से भी खेल चुके हैं।
तेज गेंदबाजी के अपने अनुभव के अलावा अवाना ने संन्यास के बाद कोचिंग के क्षेत्र में भी काम किया है। उन्होंने दिल्ली की अंडर-16, अंडर-19 और अंडर-23 टीमों के साथ काम किया। इसके अतिरिक्त, वह भारत की अंडर-19 टीम और भारतीय क्रिकेट नियंत्रण बोर्ड (BCCI) तथा सेंटर ऑफ एक्सीलेंस (COE) के विभिन्न उच्च प्रदर्शन कार्यक्रमों से भी जुड़े रहे हैं।
उनकी नियुक्ति की अहमियत इस बात में है कि उनके पास खिलाड़ी के रूप में प्रतिस्पर्धी क्रिकेट खेलने और बाद में युवा खिलाड़ियों के विकास की प्रक्रिया को करीब से देखने, दोनों तरह का अनुभव है। तेज गेंदबाज के तौर पर उन्होंने घरेलू क्रिकेट में लंबा सफर तय किया और कोचिंग के दौरान अलग-अलग आयु वर्ग के खिलाड़ियों के साथ काम किया। जूनियर स्तर पर चयन संबंधी जिम्मेदारियों में यह अनुभव उपयोगी हो सकता है।
हालांकि, किसी भी समिति की सफलता केवल उसके अध्यक्ष के व्यक्तिगत रिकॉर्ड से तय नहीं होती। असली कसौटी यह होगी कि समिति प्रतिभाशाली खिलाड़ियों की पहचान करने, चयन प्रक्रिया में निष्पक्षता बनाए रखने और अलग-अलग परिस्थितियों में प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ियों को उचित अवसर देने के लिए कितनी प्रभावी भूमिका निभाती है।
कृष्णा दास: तेज गेंदबाजी और युवा खिलाड़ियों के प्रशिक्षण का अनुभव
समिति के सदस्य के रूप में शामिल किए जाने की सिफारिश पाने वाले कृष्णा दास भी घरेलू क्रिकेट और कोचिंग का अनुभव रखते हैं। असम और गोवा की ओर से खेलने वाले पूर्व तेज गेंदबाज ने 49 प्रथम श्रेणी मुकाबलों में 166 विकेट लिए। वह भारत की अंडर-19 और इंडिया ए टीमों का हिस्सा भी रहे हैं।
खेल से जुड़े अपने करियर के बाद दास ने कोचिंग में जिम्मेदारी संभाली। वह भारत की अंडर-19 टीम के गेंदबाजी कोच के रूप में काम कर चुके हैं। इसके अलावा, उत्तराखंड की रणजी ट्रॉफी टीम के गेंदबाजी कोच के रूप में भी उनकी भूमिका रही है।
जूनियर क्रिकेट में गेंदबाजी प्रतिभाओं को पहचानना केवल तेज गति या विकेटों की संख्या देखने तक सीमित नहीं होता। खिलाड़ियों की तकनीक, नियंत्रण, फिटनेस, परिस्थितियों के अनुरूप गेंदबाजी करने की क्षमता और लगातार सुधार करने की योग्यता भी अहम होती है। दास का खेलने और कोचिंग का अनुभव इन पहलुओं को समझने में सहायक हो सकता है।
उनके सामने भी चुनौती यही होगी कि चयन संबंधी जिम्मेदारी निभाते समय व्यक्तिगत पसंद या किसी एक प्रदर्शन के बजाय खिलाड़ियों की समग्र क्षमता, निरंतरता और भविष्य की संभावनाओं को महत्व दिया जाए।
राकेश पटेल: घरेलू क्रिकेट से कोचिंग तक का सफर
राकेश पटेल को समिति में सदस्य के रूप में शामिल करने की सिफारिश की गई है। वह गुजरात और बड़ौदा का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं। उनके क्रिकेट करियर में इंडिया ए के अलावा दलीप ट्रॉफी, देवधर ट्रॉफी और ईरानी ट्रॉफी जैसे प्रमुख घरेलू टूर्नामेंट भी शामिल रहे हैं।
पटेल ने सक्रिय क्रिकेट से आगे बढ़ते हुए कोचिंग के क्षेत्र में काम किया। उन्होंने बड़ौदा और गुजरात की अंडर-19, अंडर-23 तथा सीनियर टीमों के साथ कोचिंग जिम्मेदारियां निभाईं। वर्ष 2025-26 के सत्र में वह बड़ौदा की अंडर-23 टीम के मुख्य कोच भी रहे।
उनका अनुभव जूनियर और सीनियर क्रिकेट के बीच के संक्रमण को समझने के लिहाज से महत्वपूर्ण हो सकता है। अंडर-19 और अंडर-23 स्तर पर खिलाड़ियों को केवल तत्काल नतीजों के लिए तैयार करना पर्याप्त नहीं होता। उन्हें उच्च स्तर की प्रतिस्पर्धा के लिए मानसिक, तकनीकी और रणनीतिक रूप से तैयार करना भी जरूरी है।
पटेल की पृष्ठभूमि में विभिन्न आयु वर्गों की टीमों के साथ काम करने का अनुभव शामिल है। अब समिति में उनकी संभावित भूमिका का महत्व इस बात से जुड़ा होगा कि वह इस अनुभव को प्रतिभा की पहचान और खिलाड़ियों के दीर्घकालिक विकास से संबंधित निर्णयों में किस तरह इस्तेमाल करते हैं।
एन. अर्जुन यादव: लंबे प्रथम श्रेणी करियर और मैच रेफरी का अनुभव
एन. अर्जुन यादव को भी जूनियर क्रिकेट समिति का सदस्य बनाने की सिफारिश की गई है। उन्होंने अपने खेल करियर में भारत ए का प्रतिनिधित्व किया और 83 प्रथम श्रेणी मुकाबले खेले। वह वर्ष 2000 में भारत की अंडर-19 विश्व कप विजेता टीम का हिस्सा भी रहे थे।
हैदराबाद के लिए खेलने के बाद यादव ने कोचिंग की राह अपनाई। वह हैदराबाद की सीनियर और अंडर-23 टीमों के मुख्य कोच के रूप में काम कर चुके हैं। इसके अलावा, वर्ष 2022 से वह बीसीसीआई के मैच रेफरी के रूप में भी सेवाएं दे रहे हैं।
उनका अनुभव कई स्तरों पर फैला हुआ है। खिलाड़ी के रूप में लंबे घरेलू करियर, विश्व कप विजेता जूनियर टीम का हिस्सा रहने, राज्य की टीमों को प्रशिक्षित करने और मैच रेफरी की जिम्मेदारी निभाने से उन्हें क्रिकेट की प्रतिस्पर्धी तथा प्रशासनिक प्रक्रियाओं को समझने का अवसर मिला है।
विशेष रूप से मैच रेफरी के रूप में काम करने का अनुभव खेल के नियमों, अनुशासन और मैदान पर होने वाली घटनाओं से जुड़े पहलुओं को समझने में उपयोगी हो सकता है। फिर भी, चयन समिति में किसी सदस्य की वास्तविक उपयोगिता का आकलन उसके पदनाम से नहीं, बल्कि फैसलों की गुणवत्ता, निष्पक्षता और खिलाड़ियों के हितों के प्रति प्रतिबद्धता से किया जाना चाहिए।
पांचवें सदस्य की नियुक्ति बाकी, अब कामकाज पर रहेंगी निगाहें
जूनियर क्रिकेट समिति में फिलहाल अध्यक्ष समेत चार नामों की सिफारिश की गई है। पांचवें सदस्य की नियुक्ति जल्द किए जाने की बात कही गई है। यह नियुक्ति पूरी होने के बाद समिति की घोषित संरचना पूरी होगी।
अब महत्वपूर्ण सवाल यह है कि नई समिति जूनियर क्रिकेट से जुड़े अपने दायित्वों को किस तरह निभाती है। प्रतिभाओं की पहचान, खिलाड़ियों के प्रदर्शन का समग्र मूल्यांकन, चयन में पारदर्शिता और विभिन्न आयु वर्गों के बीच मजबूत तालमेल जैसे मुद्दे इस व्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण हैं। देश के अलग-अलग क्षेत्रों में उपलब्ध प्रतिभाओं को समान अवसर देना भी ऐसी किसी व्यवस्था की बड़ी जिम्मेदारी है।
भारत में क्रिकेट प्रतिभा की कमी नहीं है, लेकिन हर प्रतिभा को सही समय पर पहचान मिलना और उसे आगे बढ़ने का उचित अवसर मिलना अपने आप में चुनौती है। किसी खिलाड़ी के एक खराब प्रदर्शन को उसकी पूरी क्षमता का पैमाना नहीं बनाया जा सकता। इसी तरह, केवल प्रतिष्ठित टूर्नामेंट में अच्छे प्रदर्शन के आधार पर किसी खिलाड़ी की दीर्घकालिक संभावनाओं का अंतिम आकलन करना भी पर्याप्त नहीं होगा। चयन प्रक्रिया में निरंतरता, तकनीकी क्षमता, फिटनेस, खेल की समझ और भविष्य में बेहतर प्रदर्शन की संभावना जैसे पहलुओं पर विचार करना आवश्यक है।
नई समिति में शामिल किए जाने की सिफारिश पाने वाले चारों नामों के पास खेलने और कोचिंग का अलग-अलग अनुभव है। यह विविधता कामकाज में उपयोगी साबित हो सकती है। लेकिन अनुभव की यह पूंजी तभी परिणाम देगी, जब निर्णय स्पष्ट मानदंडों, उचित मूल्यांकन और पेशेवर दृष्टिकोण पर आधारित हों।
फिलहाल, उपलब्ध घोषणा में समिति के विस्तृत कार्यक्षेत्र, चयन मानदंडों या भविष्य की कार्ययोजना का पूरा विवरण सामने नहीं आया है। इसलिए किसी बड़े बदलाव या निश्चित परिणाम का दावा करना जल्दबाजी होगी। आने वाले समय में समिति की कार्यप्रणाली और उसके फैसलों से ही यह स्पष्ट होगा कि वह जूनियर क्रिकेट की जरूरतों को कितनी प्रभावी ढंग से पूरा कर पाती है।
परविंदर अवाना की अध्यक्षता में जूनियर क्रिकेट समिति के लिए चार नामों की सिफारिश भारतीय क्रिकेट की प्रतिभा-विकास व्यवस्था में एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक कदम है। अब इस पहल की असली परीक्षा नियुक्तियों की घोषणा से आगे शुरू होती है। पांचवें सदस्य की नियुक्ति, चयन प्रक्रिया की पारदर्शिता और युवा खिलाड़ियों को मिलने वाले अवसर तय करेंगे कि यह समिति भारतीय क्रिकेट की अगली पीढ़ी तैयार करने में कितनी प्रभावी साबित होती है।















