नई दिल्ली: अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो के पाकिस्तान की परमाणु क्षमता को लेकर दिए गए कथित बयान के बाद इस्लामाबाद ने अमेरिका के साथ अपने संबंधों पर सफाई दी है। पाकिस्तान ने दोनों देशों के रिश्तों को व्यापार और निवेश पर आधारित साझेदारी बताया। वहीं, सिंधु जल संधि के मुद्दे पर पाकिस्तान ने अपने हिस्से के पानी को दूसरी दिशा में मोड़ने का विरोध किया है।
परमाणु हथियारों पर बयान से बढ़ी चर्चा
रिपोर्ट के मुताबिक, मार्को रुबियो के बयान में पाकिस्तान के परमाणु हथियारों का जिक्र किया गया था। इसके जवाब में पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि अमेरिका के साथ उसके संबंध व्यापार और निवेश सहित विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग पर आधारित हैं।
यह मुद्दा ऐसे समय सामने आया है, जब दक्षिण एशिया में सुरक्षा, परमाणु क्षमता और भारत-पाकिस्तान संबंधों को लेकर रणनीतिक चर्चाएं जारी हैं।
सिंधु जल संधि पर पाकिस्तान का विरोध
सिंधु जल संधि को लेकर पाकिस्तान ने कहा है कि वह अपने हिस्से के पानी को दूसरी दिशा में मोड़ने के किसी भी प्रयास का विरोध करेगा। इस्लामाबाद का तर्क है कि पानी को दबाव बनाने के साधन के रूप में इस्तेमाल करना अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गंभीर मिसाल कायम कर सकता है।
दूसरी ओर, भारत ने पाकिस्तान के साथ संबंधों में सीमा पार आतंकवाद और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर सख्त रुख अपनाया है। सिंधु जल संधि भी दोनों देशों के बीच एक महत्वपूर्ण और संवेदनशील विषय बनी हुई है।
भारत-पाकिस्तान संबंधों में पानी का मुद्दा अहम
सिंधु जल संधि लंबे समय से भारत और पाकिस्तान के बीच जल बंटवारे का आधार रही है। हालांकि, आतंकवाद और सुरक्षा से जुड़े विवादों के बीच इस समझौते को लेकर तनाव बढ़ा है।
पाकिस्तान के ताजा बयान से स्पष्ट है कि जल संसाधनों का मुद्दा दोनों देशों के बीच कूटनीतिक बहस का अहम हिस्सा बना हुआ है। आने वाले समय में इस विषय पर दोनों देशों का रुख क्षेत्रीय संबंधों और जल प्रबंधन से जुड़ी चर्चाओं को प्रभावित कर सकता है।















