नोएडा की राजनीति से राष्ट्रीय खेल प्रशासन तक पहुँची जिम्मेदारी; पंकज सिंह की अध्यक्षता वाली Cycling Federation of India की भूमिका में भारत ने रचा नया इतिहास, पुणे में पहली बार होगी UCI Road World Championships”
नोएडा: नोएडा क्षेत्र के विधायक पंकज सिंह को आमतौर पर उत्तर प्रदेश की राजनीति और भारतीय जनता पार्टी के प्रमुख नेताओं में गिना जाता है। लेकिन उनकी सार्वजनिक भूमिका का एक महत्वपूर्ण पक्ष ऐसा भी है, जिस पर नोएडा की राजनीतिक चर्चा में अपेक्षाकृत कम बात होती है। पंकज सिंह Cycling Federation of India (CFI) के अध्यक्ष हैं और इसी राष्ट्रीय खेल संस्था की जिम्मेदारी के साथ भारतीय साइक्लिंग को अंतरराष्ट्रीय मंच पर आगे ले जाने की कवायद में उनकी भूमिका सामने आई है।
अब इसी भूमिका से जुड़ी एक बड़ी उपलब्धि भारत के हिस्से आई है।
पुणे को वर्ष 2032 की UCI Road World Championships की मेजबानी मिल गई है। अंतरराष्ट्रीय साइक्लिंग की सर्वोच्च संस्था Union Cycliste Internationale (UCI) ने 23 सितंबर 2026 को अपने कांग्रेस में इसकी आधिकारिक घोषणा की। खास बात यह है कि भारत में पहली बार इस प्रतिष्ठित रोड साइक्लिंग विश्व चैंपियनशिप का आयोजन होगा। UCI के आधिकारिक बयान के मुताबिक 2032 का आयोजन पुणे में होगा।
यानी यह सिर्फ पुणे या महाराष्ट्र की उपलब्धि नहीं है। भारतीय साइक्लिंग के इतिहास में यह ऐसा पड़ाव है, जिसे आने वाले वर्षों में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की खेल क्षमता के विस्तार के संदर्भ में देखा जाएगा।
नोएडा से राष्ट्रीय खेल संस्था की कमान
नोएडा विधायक पंकज सिंह की पहचान भले ही मुख्य रूप से उत्तर प्रदेश की राजनीति से जुड़ी हो, लेकिन उनका दायरा खेल प्रशासन तक भी फैला हुआ है। वह Cycling Federation of India के अध्यक्ष हैं। CFI भारत में साइक्लिंग के राष्ट्रीय स्तर पर प्रशासन और अंतरराष्ट्रीय साइक्लिंग संस्थाओं के साथ समन्वय से जुड़ी प्रमुख संस्था है।
यही वह बिंदु है जहां नोएडा के एक विधायक की राजनीतिक पहचान और भारतीय साइक्लिंग के राष्ट्रीय प्रशासन की जिम्मेदारी एक-दूसरे से जुड़ती दिखाई देती है।
पुणे की 2032 विश्व चैंपियनशिप की बोली महाराष्ट्र सरकार और Cycling Federation of India के संयुक्त प्रयास के रूप में आगे बढ़ी, जबकि भारत सरकार का भी समर्थन था। UCI ने पुणे की उम्मीदवारी के लिए वहां की खेल सुविधाओं और आयोजन क्षमता का भी मूल्यांकन किया था।
इसलिए इस पूरी उपलब्धि को किसी एक व्यक्ति की व्यक्तिगत सफलता के रूप में प्रस्तुत करने के बजाय यह समझना जरूरी है कि इसमें CFI, महाराष्ट्र सरकार, केंद्र सरकार और आयोजन से जुड़े अन्य संस्थागत पक्षों की संयुक्त भूमिका रही।
लेकिन पंकज सिंह की भूमिका क्यों महत्वपूर्ण हो जाती है?
यहीं से कहानी का वह पहलू सामने आता है, जो नोएडा के पाठकों के लिए खास तौर पर महत्वपूर्ण है।
पंकज सिंह CFI के अध्यक्ष हैं और 2032 विश्व चैंपियनशिप की मेजबानी हासिल करने वाली भारतीय बोली में CFI प्रमुख संस्थागत भागीदारों में रही। CFI के महासचिव मनिंदर पाल सिंह ने भी इस उपलब्धि को पंकज सिंह के नेतृत्व से जोड़ा है। वहीं भारतीय ओलंपिक संघ की अध्यक्ष पी.टी. उषा के बयान में भी CFI और उसके अध्यक्ष पंकज सिंह को इस उपलब्धि के लिए बधाई दी गई है।
इसका अर्थ साफ है—नोएडा के विधायक की भूमिका केवल विधानसभा क्षेत्र तक सीमित नहीं है। वह राष्ट्रीय खेल संस्था की जिम्मेदारी संभालते हुए ऐसे अंतरराष्ट्रीय आयोजन की तैयारी में भी संस्थागत भूमिका निभा रहे हैं, जो पहली बार भारत में होने जा रहा है।
100 साल से ज्यादा पुराने आयोजन की पहली भारतीय मेजबानी
UCI Road World Championships साइक्लिंग की सबसे प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में शामिल है। UCI के अनुसार 2032 में पुणे को इसकी मेजबानी मिलना भारत के लिए पहली बार होगा। UCI ने यह भी कहा कि 2032 का आयोजन एशिया में इस प्रतियोगिता की केवल चौथी मेजबानी होगी।
यानी भारत अब उन चुनिंदा एशियाई देशों की कतार में शामिल होगा, जिन्हें इस स्तर की विश्व प्रतियोगिता आयोजित करने का अवसर मिला है।
यह उपलब्धि इसलिए भी बड़ी है क्योंकि किसी भी अंतरराष्ट्रीय खेल प्रतियोगिता की मेजबानी केवल घोषणा से पूरी नहीं होती। इसके लिए आयोजन स्थल, सड़क नेटवर्क, खिलाड़ियों की सुरक्षा, तकनीकी सुविधाएं, मीडिया व्यवस्था, प्रसारण, आवास, परिवहन, स्वयंसेवक व्यवस्था और अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप प्रतियोगिता संचालन जैसी कई तैयारियां करनी होती हैं।
पुणे ने 2026 में UCI 2.2 श्रेणी की Bajaj Pune Grand Tour का आयोजन भी किया था। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार इसी आयोजन और शहर की उपलब्ध सुविधाओं ने पुणे की अंतरराष्ट्रीय दावेदारी को मजबूत करने में भूमिका निभाई। UCI की निरीक्षण टीम ने भी प्रस्तावित आयोजन क्षेत्रों का जायजा लिया था।
असली परीक्षा अब शुरू होगी
मेजबानी हासिल करना बड़ी उपलब्धि है, लेकिन इसके साथ एक और बड़ा सवाल खड़ा होता है—क्या भारत 2032 तक इस आयोजन को विश्वस्तरीय मानकों पर सफलतापूर्वक आयोजित कर पाएगा?
यही वह सवाल है जिसे अब नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
मेजबानी मिलने के बाद असली चुनौती आयोजन की तैयारी की है। साइक्लिंग जैसे खेल में सड़क मार्ग, ट्रैफिक प्रबंधन, खिलाड़ियों की सुरक्षा और तकनीकी मानकों का पालन बेहद महत्वपूर्ण होता है। पुणे में होने वाली प्रतियोगिता में दुनिया के शीर्ष साइकिलिस्ट हिस्सा लेंगे। इसलिए आयोजन की सफलता का पैमाना सिर्फ उद्घाटन समारोह या भीड़ नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता के हर तकनीकी पहलू पर खरा उतरना होगा।
पुणे की बोली को UCI ने स्वीकार किया है, लेकिन आने वाले वर्षों में भारत को यह साबित करना होगा कि वह इस भरोसे को वास्तविक आयोजन क्षमता में बदल सकता है।
A landmark moment for Indian cycling.
Pleased to receive the allotment souvenir for the 2032 UCI Road World Championships in Delhi from CFI officials Shri Maninder Pal Singh Ji and Shri Onkar Singh Ji.
India will become only the fourth Asian nation to host this prestigious… https://t.co/y5aB7LRmMK
— Pankaj Singh (@PankajSinghBJP) October 2, 2026
भारतीय खिलाड़ियों के लिए भी खुलेगा नया रास्ता
इस आयोजन का असर केवल एक सप्ताह या प्रतियोगिता के आयोजन तक सीमित रहने की उम्मीद नहीं है। CFI के महासचिव मनिंदर पाल सिंह ने कहा है कि विश्व चैंपियनशिप भारत में खिलाड़ियों, प्रशिक्षकों और तकनीकी अधिकारियों के लिए अंतरराष्ट्रीय exposure और विकास के अवसर बढ़ा सकती है।
यही वह पहलू है जो इस आयोजन को भारत की खेल नीति के लिहाज से भी महत्वपूर्ण बनाता है।
अगर 2032 तक मजबूत प्रशिक्षण केंद्र, बेहतर साइक्लिंग ट्रैक, सुरक्षित रोड रेसिंग इंफ्रास्ट्रक्चर और प्रतिभा पहचान की व्यवस्था विकसित होती है, तो इसका लाभ भारतीय खिलाड़ियों को लंबे समय तक मिल सकता है।
नोएडा के विधायक की भूमिका पर क्यों होनी चाहिए नजर?
पंकज सिंह के लिए यह उपलब्धि राजनीतिक पद से अलग एक राष्ट्रीय खेल प्रशासनिक भूमिका को भी सामने लाती है।
नोएडा के विधायक के रूप में उनकी पहचान उत्तर प्रदेश की राजनीति से है, लेकिन CFI अध्यक्ष के रूप में उनकी जिम्मेदारी पूरे देश के साइक्लिंग प्रशासन से जुड़ी है। यही दोहरी सार्वजनिक भूमिका इस कहानी को नोएडा के लिए भी महत्वपूर्ण बनाती है।
हालांकि यह स्पष्ट रखना जरूरी है कि 2032 UCI Road World Championships की मेजबानी भारत को किसी एक व्यक्ति को श्रेय देकर नहीं समझी जा सकती। आधिकारिक और मीडिया रिकॉर्ड इसे पुणे/महाराष्ट्र सरकार और Cycling Federation of India की संयुक्त बोली तथा केंद्र सरकार के समर्थन से जुड़ी उपलब्धि बताते हैं।
लेकिन उसी संस्थागत ढांचे में CFI अध्यक्ष के रूप में पंकज सिंह की भूमिका को नजरअंदाज करना भी तथ्यात्मक रूप से उचित नहीं होगा।
अब नजर 2032 पर
पुणे की घोषणा हो चुकी है। भारत को दुनिया की सबसे बड़ी साइक्लिंग प्रतियोगिताओं में से एक की मेजबानी मिल चुकी है। अब अगले छह वर्षों में तैयारियां इस उपलब्धि की वास्तविक परीक्षा होंगी।
नोएडा के विधायक पंकज सिंह के लिए भी यह जिम्मेदारी केवल एक पद की उपलब्धि नहीं, बल्कि राष्ट्रीय खेल प्रशासन में उनके कार्य का बड़ा परीक्षण होगी।
पुणे में 2032 का विश्व मंच सजने वाला है। सवाल अब यह नहीं है कि भारत को मेजबानी मिली या नहीं—सवाल यह है कि भारत इस ऐतिहासिक मौके को कितनी मजबूती से आयोजन की सफलता और भारतीय साइक्लिंग के स्थायी विकास में बदल पाता है।
और इसी सवाल के बीच नोएडा के विधायक पंकज सिंह की CFI अध्यक्ष के रूप में भूमिका आने वाले वर्षों में लगातार निगाहों में रहेगी।















