“शाम होते ही दहला साउथ दिल्ली का इलाका, चीख-पुकार और अफरा-तफरी के बीच मलबे से लोगों को निकालने की जंग शुरू”
नई दिल्ली | विशेष रिपोर्ट
राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के साकेत इलाके में शुक्रवार शाम एक दर्दनाक हादसे ने पूरे इलाके को हिला कर रख दिया। एक बहुमंजिला इमारत अचानक भरभराकर गिर गई, जिसके बाद आसपास के क्षेत्र में अफरा-तफरी और दहशत का माहौल बन गया। शुरुआती जानकारी के अनुसार मलबे में कई लोगों के फंसे होने की आशंका है, जबकि राहत और बचाव दल लगातार लोगों को सुरक्षित बाहर निकालने में जुटा हुआ है।
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, हादसा इतना अचानक हुआ कि लोगों को संभलने तक का मौका नहीं मिला। कुछ ही सेकंड में पूरी संरचना धूल के गुबार में तब्दील हो गई। आसपास मौजूद लोगों ने तुरंत पुलिस, दमकल विभाग और प्रशासन को सूचना दी, जिसके बाद बड़े स्तर पर बचाव अभियान शुरू किया गया।
मलबे में कई लोगों के फंसे होने की आशंका
स्थानीय लोगों का कहना है कि हादसे के समय इमारत और आसपास के मकानों में कई लोग मौजूद थे। इसी वजह से आशंका जताई जा रही है कि कई लोग अभी भी मलबे के नीचे फंसे हो सकते हैं।
अब तक चार से पांच लोगों को सुरक्षित बाहर निकालकर अस्पताल भेजे जाने की जानकारी सामने आई है। राहत दल लगातार मलबा हटाकर अंदर फंसे लोगों तक पहुंचने की कोशिश कर रहे हैं।
रेस्क्यू ऑपरेशन में जुटीं कई एजेंसियां
घटना की सूचना मिलते ही दिल्ली पुलिस, दमकल विभाग, स्थानीय प्रशासन और मेडिकल टीमें मौके पर पहुंच गईं।
बचावकर्मी भारी मशीनों और विशेष उपकरणों की मदद से मलबा हटाने का काम कर रहे हैं। घायलों को तत्काल अस्पताल पहुंचाने के लिए एंबुलेंस भी मौके पर तैनात की गई हैं।
पुलिस अधिकारियों के अनुसार प्राथमिकता मलबे में फंसे लोगों को जल्द से जल्द सुरक्षित बाहर निकालना है।
शाम 7:45 बजे मिली थी सूचना
दमकल विभाग के अनुसार घटना की सूचना शाम लगभग 7:45 बजे प्राप्त हुई थी, जिसके तुरंत बाद कई फायर टेंडर और राहत दल मौके पर रवाना किए गए।
अधिकारियों ने पूरे इलाके को घेरकर आम लोगों की आवाजाही सीमित कर दी है ताकि बचाव कार्य में किसी तरह की बाधा न आए।
क्या जर्जर संरचना बनी हादसे की वजह?
हालांकि हादसे के वास्तविक कारणों का अभी आधिकारिक खुलासा नहीं हुआ है, लेकिन प्रारंभिक स्तर पर भवन की संरचनात्मक मजबूती और सुरक्षा मानकों को लेकर सवाल उठने लगे हैं।
दिल्ली में पिछले कुछ वर्षों के दौरान इमारत गिरने की कई घटनाएं सामने आ चुकी हैं, जिसके बाद अवैध निर्माण, कमजोर ढांचागत गुणवत्ता और सुरक्षा नियमों के पालन को लेकर लगातार चिंता जताई जाती रही है।
सबसे बड़ा सवाल: आखिर कब रुकेंगे ऐसे हादसे?
दिल्ली जैसे महानगर में बार-बार इमारतों के गिरने की घटनाएं केवल दुर्घटनाएं नहीं मानी जा रहीं, बल्कि शहरी निर्माण व्यवस्था और निगरानी तंत्र पर भी गंभीर सवाल खड़े कर रही हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि घनी आबादी वाले इलाकों में पुराने और असुरक्षित भवनों का समय रहते ऑडिट न होना भविष्य में और बड़े हादसों का कारण बन सकता है।
फिलहाल पूरी नजर रेस्क्यू ऑपरेशन पर
प्रशासन की ओर से अभी तक हताहतों की अंतिम संख्या की पुष्टि नहीं की गई है। राहत एवं बचाव कार्य लगातार जारी है और आशंका है कि मलबे के भीतर अभी और लोग फंसे हो सकते हैं।
“कुछ सेकंड में ढह गई पूरी इमारत… धूल के गुबार, चीखों और मलबे के बीच जिंदगी बचाने की जंग अभी जारी है।”














