Monday, August 31, 2026
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जगदीशपुर में भीषण हादसा: 16 बच्चे घायल, टक्कर के बाद घर में जा घुसी स्कूल बस; डीएम ने दिए एफआईआर और जांच के आदेश

अमेठी: भारी बारिश और मौसम विभाग की चेतावनी के बीच जिलाधिकारी के आदेश पर 31 अगस्त को कक्षा आठ तक के सभी विद्यालयों में अवकाश घोषित किया गया था। इसके बावजूद जगदीशपुर क्षेत्र के अलीनगर स्थित आरपीएस पब्लिक स्कूल का संचालन किए जाने का मामला सामने आया। छुट्टी के दिन बच्चों को स्कूल लेकर जा रही बस सोमवार को जगदीशपुर-अयोध्या मार्ग पर थौरी के पास एक दूध टैंकर से टकरा गई। टक्कर इतनी जोरदार थी कि स्कूल बस अनियंत्रित होकर सड़क किनारे बने एक घर में जा घुसी। हादसे में बस में सवार करीब 16 बच्चे घायल हो गए। गनीमत रही कि किसी बच्चे की हालत गंभीर नहीं हुई। एक बच्चे को मामूली फ्रैक्चर की शिकायत के बाद बेहतर उपचार के लिए जिला अस्पताल भेजा गया।

हादसे की सूचना मिलते ही घटनास्थल पर अफरा-तफरी मच गई। आसपास के ग्रामीण तत्काल मौके पर पहुंचे और बस में फंसे बच्चों को बाहर निकालने में मदद की। इसके बाद घायल बच्चों को उपचार के लिए नजदीकी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाया गया। घटना की जानकारी मिलते ही बच्चों के परिजन भी अस्पताल पहुंचने लगे। अस्पताल परिसर में कुछ देर तक चिंतित अभिभावकों की भीड़ जुटी रही।

छुट्टी के आदेश के बावजूद क्यों खुला स्कूल?

सबसे गंभीर सवाल यह है कि जब जिले में भारी बारिश और मौसम विभाग की चेतावनी को देखते हुए प्रशासन ने कक्षा आठ तक के सभी विद्यालयों में अवकाश घोषित किया था, तो आरपीएस पब्लिक स्कूल में बच्चों को क्यों बुलाया गया? इसी सवाल ने पूरे मामले को और गंभीर बना दिया है।

जिला प्रशासन के मुताबिक, 31 अगस्त को बेसिक शिक्षा परिषद के नियंत्रणाधीन परिषदीय, सहायता प्राप्त और मान्यता प्राप्त विद्यालयों के साथ-साथ सीबीएसई, आईसीएसई तथा अन्य बोर्ड से संबद्ध नर्सरी से कक्षा आठ तक के विद्यालयों में भी अवकाश घोषित किया गया था। इसके बावजूद विद्यालय संचालित होने और बच्चों को बस से लाए-ले जाए जाने की जानकारी सामने आने के बाद प्रशासन ने मामले को गंभीरता से लिया है।

टक्कर के बाद घर में घुसी बस, मची चीख-पुकार

प्रत्यक्ष घटनाक्रम के अनुसार स्कूल बस बच्चों को लेकर जगदीशपुर-अयोध्या मार्ग से गुजर रही थी। इसी दौरान थाना भाले सुल्तान क्षेत्र के थौरी के पास बस की एक दूध टैंकर से जोरदार टक्कर हो गई। भिड़ंत के बाद बस का संतुलन बिगड़ गया और वह सड़क किनारे स्थित एक मकान में जा घुसी।

अचानक हुए हादसे से बस के अंदर बैठे बच्चों में चीख-पुकार मच गई। आसपास मौजूद लोग दौड़कर मौके पर पहुंचे। ग्रामीणों ने तत्परता दिखाते हुए बच्चों को बस से बाहर निकाला। हादसे की सूचना पुलिस और प्रशासन को दी गई। कुछ ही देर में घायल बच्चों को अस्पताल पहुंचाने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई।

दुर्घटना के बाद मौके पर बड़ी संख्या में लोगों की भीड़ जमा हो गई। हादसे की तस्वीर सामने आते ही अभिभावकों में भी चिंता फैल गई। कई परिजन अपने बच्चों की कुशलक्षेम जानने के लिए अस्पताल की ओर दौड़ पड़े।

अस्पताल में कराया गया चिकित्सकीय परीक्षण

जिलाधिकारी संजय चौहान ने घटना की जानकारी मिलते ही तत्काल संज्ञान लिया। उन्होंने घायल बच्चों को तत्काल निकटवर्ती सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में उपचार उपलब्ध कराने की व्यवस्था कराई। चिकित्सकों ने सभी बच्चों का परीक्षण किया। प्रारंभिक जांच के बाद बच्चों की स्थिति सामान्य बताई गई।

हालांकि एक बच्चे को मामूली फ्रैक्चर की शिकायत होने पर बेहतर उपचार के लिए जिला अस्पताल भेजा गया। प्रशासन की ओर से बच्चों की चिकित्सा व्यवस्था पर नजर रखी गई। हादसे में बच्चों के मामूली रूप से घायल होने के बाद प्रशासन और अभिभावकों ने राहत की सांस ली।

डीएम ने लिया कड़ा रुख, स्कूल प्रबंधन को नोटिस

छुट्टी के आदेश के बावजूद विद्यालय खोले जाने के मामले में जिलाधिकारी संजय चौहान ने सख्त रुख अपनाया है। उन्होंने जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी को आरपीएस पब्लिक स्कूल प्रबंधन के विरुद्ध कारण बताओ नोटिस जारी करने के निर्देश दिए हैं।

प्रशासन यह पता लगाने में जुटा है कि अवकाश के स्पष्ट आदेश के बावजूद विद्यालय का संचालन किस स्तर पर और किसके निर्देश पर किया गया। साथ ही यह भी जांच का विषय बनाया गया है कि बच्चों को खराब मौसम के बीच स्कूल लाने-ले जाने का निर्णय क्यों लिया गया।

जिलाधिकारी ने अधिकारियों को पूरे मामले की गंभीरता से जांच करने के निर्देश दिए हैं, ताकि जिम्मेदारी तय की जा सके और भविष्य में इस तरह की घटना की पुनरावृत्ति न हो।

एआरटीओ को दुर्घटना की विस्तृत जांच के निर्देश

स्कूल बस दुर्घटना को लेकर जिलाधिकारी ने सहायक संभागीय परिवहन अधिकारी (एआरटीओ) को भी जांच के निर्देश दिए हैं। एआरटीओ को दुर्घटना के सभी पहलुओं की विस्तृत जांच करने को कहा गया है।

जांच में बस की स्थिति, आवश्यक दस्तावेज, फिटनेस, चालक से संबंधित पहलुओं, दुर्घटना के कारणों तथा परिवहन नियमों के अनुपालन समेत अन्य बिंदुओं की पड़ताल की जाएगी। प्रशासन यह भी सुनिश्चित करना चाहता है कि स्कूल वाहन बच्चों के परिवहन से जुड़े निर्धारित सुरक्षा मानकों के अनुरूप था या नहीं।

जिलाधिकारी ने अधिकारियों को दोषियों के विरुद्ध आवश्यक विधिक कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। मामले में एफआईआर दर्ज कराने के भी निर्देश दिए गए हैं।

‘बच्चों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता’

जिलाधिकारी संजय चौहान ने स्पष्ट किया कि विद्यार्थियों की सुरक्षा प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि शासन और प्रशासन द्वारा जारी निर्देशों की अवहेलना किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं की जाएगी।

उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि पूरे प्रकरण की निष्पक्ष और विस्तृत जांच कराई जाए। जांच में जो भी व्यक्ति या संस्था दोषी पाया जाएगा, उसके विरुद्ध नियमानुसार कठोर कार्रवाई की जाएगी।

डीएम के इस रुख के बाद शिक्षा विभाग और स्कूल प्रबंधन में भी हड़कंप की स्थिति है। प्रशासन अब यह सुनिश्चित करने में जुटा है कि जिले में अवकाश के आदेश का पालन सभी विद्यालयों में प्रभावी रूप से कराया जाए।

भारी बारिश के बीच स्कूल संचालन पर उठे सवाल

इस घटना ने खराब मौसम के दौरान स्कूल संचालन को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जब प्रशासन ने मौसम विभाग की चेतावनी और लगातार हो रही भारी वर्षा को देखते हुए छोटे बच्चों के लिए विद्यालय बंद रखने का निर्णय लिया था, तब स्कूल संचालन का फैसला कितना उचित था—यह जांच का अहम हिस्सा होगा।

खासकर प्राथमिक और जूनियर कक्षाओं के बच्चों को बारिश के दौरान स्कूल बुलाने और उन्हें वाहनों से लाने-ले जाने में अतिरिक्त सावधानी की जरूरत होती है। ऐसे में प्रशासनिक अवकाश की अनदेखी के कारण यदि बच्चों की सुरक्षा खतरे में पड़ती है तो इसकी जवाबदेही तय होना भी जरूरी है।

प्रशासन ने पहले ही जारी कर दिया था अवकाश आदेश

जिला सूचना अधिकारी शिव दर्शन यादव ने बताया कि जिलाधिकारी द्वारा भारी वर्षा एवं मौसम विभाग की चेतावनी के मद्देनजर 31 अगस्त को कक्षा आठ तक के विद्यालयों में अवकाश घोषित किया गया था।

उन्होंने बताया कि अवकाश का आदेश केवल बेसिक शिक्षा परिषद के परिषदीय विद्यालयों तक सीमित नहीं था। इसमें सहायता प्राप्त और मान्यता प्राप्त विद्यालयों के साथ-साथ सीबीएसई, आईसीएसई तथा अन्य बोर्ड से संबद्ध विद्यालय भी शामिल थे। नर्सरी से लेकर कक्षा आठ तक के विद्यार्थियों के लिए विद्यालय बंद रखने का निर्णय लिया गया था।

ऐसे में आरपीएस पब्लिक स्कूल में विद्यालय संचालन और बच्चों को बस से ले जाए जाने का मामला प्रशासन की नजर में गंभीर है।

अब जांच से तय होगी जिम्मेदारी

जगदीशपुर में हुए इस हादसे ने एक ओर जहां बच्चों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ाई है, वहीं दूसरी ओर प्रशासनिक आदेशों के अनुपालन पर भी सवाल खड़े किए हैं। फिलहाल घायल सभी बच्चों की स्थिति सामान्य बताई जा रही है, जो इस हादसे की सबसे बड़ी राहत है।

लेकिन दुर्घटना के बाद अब निगाहें प्रशासनिक जांच पर टिकी हैं। एआरटीओ की जांच, शिक्षा विभाग की कार्रवाई और एफआईआर के बाद यह स्पष्ट होगा कि दुर्घटना के लिए किन परिस्थितियों को जिम्मेदार माना जाता है और अवकाश के बावजूद स्कूल संचालित करने के मामले में किसकी जवाबदेही तय होती है।

प्रशासन ने साफ कर दिया है कि बच्चों की सुरक्षा से किसी भी स्तर पर समझौता नहीं किया जाएगा। ऐसे में इस हादसे को महज एक सड़क दुर्घटना मानने के बजाय अवकाश के आदेश, स्कूल संचालन, छात्र सुरक्षा और स्कूल वाहनों की जवाबदेही—इन सभी पहलुओं से जोड़कर देखा जा रहा है।

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VIKAS TRIPATHI
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