Tuesday, July 28, 2026
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गुरु पूर्णिमा 2026: तीन दुर्लभ शुभ योगों के महासंगम में मनेगा आस्था का महापर्व, गुरु कृपा पाने का दुर्लभ अवसर

“गजकेसरी, सर्वार्थ सिद्धि और रवि योग के शुभ संयोग से बढ़ेगा पूजा, स्नान, दान और गुरु सेवा का महत्व; 29 जुलाई की सुबह 5:41 से 9:05 बजे तक रहेगा विशेष पूजन मुहूर्त”

नई दिल्ली:भारतीय संस्कृति में गुरु को भगवान से भी ऊंचा स्थान दिया गया है। “गुरु ब्रह्मा, गुरु विष्णु, गुरु देवो महेश्वरः” की भावना को समर्पित गुरु पूर्णिमा का पावन पर्व इस वर्ष 29 जुलाई 2026, बुधवार को पूरे देश में श्रद्धा, भक्ति और उत्साह के साथ मनाया जाएगा। इस बार का गुरु पूर्णिमा पर्व धार्मिक और ज्योतिषीय दोनों दृष्टि से अत्यंत विशेष माना जा रहा है, क्योंकि इस दिन एक साथ तीन दुर्लभ एवं अत्यंत शुभ योग—गजकेसरी योग, सर्वार्थ सिद्धि योग और रवि योग का महासंगम बन रहा है।

ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, वर्षों बाद ऐसा संयोग बन रहा है जब गुरु पूर्णिमा के दिन तीनों शुभ योग एक साथ उपस्थित रहेंगे। मान्यता है कि इन योगों में किए गए गुरु पूजन, मंत्र जाप, स्नान, दान-पुण्य, यज्ञ, तप, ध्यान और धार्मिक कार्यों का कई गुना अधिक पुण्यफल प्राप्त होता है। यही कारण है कि इस बार गुरु पूर्णिमा को लेकर देशभर के मंदिरों, आश्रमों, मठों और धार्मिक संस्थानों में विशेष तैयारियां की गई हैं।


भारतीय संस्कृति का सबसे पवित्र गुरु पर्व

भारतीय सनातन परंपरा में गुरु केवल शिक्षा देने वाला व्यक्ति नहीं, बल्कि जीवन को दिशा देने वाला प्रकाश स्तंभ माना गया है। गुरु ही अज्ञान रूपी अंधकार को दूर कर ज्ञान का दीप जलाते हैं। वे व्यक्ति को धर्म, कर्म, सत्य, नैतिकता और जीवन के वास्तविक उद्देश्य का बोध कराते हैं।

इसी कारण गुरु पूर्णिमा केवल धार्मिक उत्सव नहीं बल्कि गुरु के प्रति कृतज्ञता, सम्मान और समर्पण व्यक्त करने का महापर्व माना जाता है। इस दिन विद्यार्थी, साधक और श्रद्धालु अपने गुरु के चरणों में प्रणाम कर उनका आशीर्वाद प्राप्त करते हैं तथा जीवनभर उनके बताए मार्ग पर चलने का संकल्प लेते हैं।


महर्षि वेदव्यास की जयंती के रूप में भी मनाया जाता है यह पर्व

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार आषाढ़ पूर्णिमा के दिन महर्षि वेदव्यास का जन्म हुआ था। उन्होंने चारों वेदों का विभाजन कर उन्हें व्यवस्थित रूप दिया तथा महाभारत, श्रीमद्भागवत और अठारह पुराणों जैसे अमूल्य ग्रंथों की रचना की।

ज्ञान की इस महान परंपरा के कारण उन्हें “आदि गुरु” की उपाधि प्राप्त हुई। यही वजह है कि गुरु पूर्णिमा को व्यास पूर्णिमा भी कहा जाता है। देशभर के अनेक आश्रमों में इस दिन वेदव्यास पूजन और विशेष सत्संग आयोजित किए जाते हैं।


इस बार क्यों है गुरु पूर्णिमा इतनी खास?

इस वर्ष गुरु पूर्णिमा पर बनने वाले तीन शुभ योग इसे अत्यंत दुर्लभ और फलदायी बना रहे हैं।

1. गजकेसरी योग देगा मान-सम्मान और सफलता

ज्योतिष शास्त्र में गजकेसरी योग को अत्यंत प्रभावशाली योग माना गया है। यह गुरु और चंद्रमा की विशेष स्थिति से बनता है।

मान्यता है कि इस योग में पूजा-अर्चना करने से व्यक्ति को समाज में प्रतिष्ठा, सम्मान, ज्ञान, यश और आर्थिक उन्नति प्राप्त होती है। विद्यार्थियों, शिक्षकों, अधिकारियों तथा आध्यात्मिक साधकों के लिए यह योग विशेष लाभकारी माना गया है।


2. सर्वार्थ सिद्धि योग बनाएगा हर शुभ कार्य सफल

गुरु पूर्णिमा के दिन बनने वाला सर्वार्थ सिद्धि योग शुभ कार्यों के लिए अत्यंत मंगलकारी माना जाता है।

धार्मिक मान्यता है कि इस योग में किए गए कार्यों में सफलता मिलने की संभावना कई गुना बढ़ जाती है। इसलिए इस दिन नए कार्यों की शुरुआत, धार्मिक अनुष्ठान, गुरु दीक्षा, मंत्र जाप, यज्ञ और दान-पुण्य करना विशेष शुभ माना गया है।


3. रवि योग दूर करेगा नकारात्मक ऊर्जा

रवि योग को अशुभ प्रभावों को समाप्त करने वाला शुभ योग माना जाता है।

ज्योतिषाचार्यों के अनुसार इस योग में सूर्य उपासना, स्नान, दान, पूजा-पाठ और आध्यात्मिक साधना करने से जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है तथा बाधाओं से मुक्ति मिलने की मान्यता है।


29 जुलाई को मनाई जाएगी गुरु पूर्णिमा

पंचांग के अनुसार इस वर्ष आषाढ़ पूर्णिमा तिथि 28 जुलाई 2026 की शाम 6 बजकर 18 मिनट से प्रारंभ होकर 29 जुलाई 2026 की रात 8 बजकर 5 मिनट तक रहेगी।

चूंकि हिंदू धर्म में पर्व-त्योहार उदयातिथि के अनुसार मनाए जाते हैं, इसलिए गुरु पूर्णिमा 29 जुलाई, बुधवार को मनाई जाएगी।


जानिए गुरु पूजन का शुभ मुहूर्त

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार 29 जुलाई को प्रातःकाल का समय गुरु पूजन के लिए अत्यंत शुभ रहेगा।

गुरु पूजन का शुभ समय :
सुबह 5:41 बजे से 9:05 बजे तक

इस अवधि में गुरु की पूजा, चरण वंदना, मंत्र जाप और दान करना विशेष फलदायी माना गया है।


गुरु पूर्णिमा पर स्नान और दान का विशेष महत्व

शास्त्रों में गुरु पूर्णिमा के दिन प्रातःकाल पवित्र नदी, सरोवर अथवा घर पर ही स्नान कर भगवान सूर्य को अर्घ्य देने का विधान बताया गया है।

इसके बाद गुरु का स्मरण करते हुए उनकी तस्वीर, चरण पादुका अथवा आसन पर पुष्प अर्पित किए जाते हैं। दीप प्रज्ज्वलित कर गुरु मंत्र का जाप किया जाता है तथा जीवन में सदैव सत्य और धर्म के मार्ग पर चलने का संकल्प लिया जाता है।

धार्मिक मान्यता है कि इस दिन अन्न, वस्त्र, फल, मिठाई, दक्षिणा, धार्मिक ग्रंथ और जरूरतमंदों को दान देने से विशेष पुण्य प्राप्त होता है।


गुरु सेवा को सबसे बड़ा पुण्य माना गया

सनातन परंपरा में गुरु सेवा को ईश्वर सेवा के समान बताया गया है।

यदि संभव हो तो इस दिन अपने गुरु से व्यक्तिगत रूप से मिलकर उनका आशीर्वाद लेना चाहिए। यदि गुरु दूर हों तो उनका स्मरण कर श्रद्धापूर्वक प्रणाम करना भी शुभ माना गया है।

विद्यार्थी अपने शिक्षकों का सम्मान कर सकते हैं, जबकि आध्यात्मिक साधक अपने गुरुदेव के चरणों में सेवा और समर्पण का भाव व्यक्त कर सकते हैं।


देशभर में होंगे विशेष धार्मिक आयोजन

गुरु पूर्णिमा को लेकर देशभर के प्रमुख मंदिरों, मठों और आश्रमों में व्यापक तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। कई स्थानों पर विशेष हवन, भजन-कीर्तन, सत्संग, वेदपाठ, प्रवचन और विशाल भंडारों का आयोजन किया जाएगा।

हरिद्वार, ऋषिकेश, वाराणसी, प्रयागराज, उज्जैन, नासिक और मथुरा सहित अनेक धार्मिक नगरों में लाखों श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना है। विभिन्न आध्यात्मिक संस्थाओं में गुरु वंदना समारोह आयोजित किए जाएंगे, जहां शिष्य अपने गुरु के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करेंगे।


गुरु पूर्णिमा का संदेश: ज्ञान ही सबसे बड़ा धन

आज के आधुनिक और प्रतिस्पर्धी दौर में गुरु पूर्णिमा केवल धार्मिक पर्व नहीं, बल्कि जीवन मूल्यों की याद दिलाने वाला अवसर भी है। यह पर्व सिखाता है कि सफलता केवल भौतिक उपलब्धियों से नहीं, बल्कि सही मार्गदर्शन, संस्कार, ज्ञान और चरित्र से प्राप्त होती है।

गुरु पूर्णिमा हमें अपने जीवन में उन सभी व्यक्तियों के प्रति सम्मान व्यक्त करने की प्रेरणा देती है जिन्होंने हमें ज्ञान दिया, जीवन की दिशा दिखाई और कठिन समय में सही निर्णय लेने की सीख दी।

इस वर्ष तीन दुर्लभ शुभ योगों के महासंगम में आने वाली गुरु पूर्णिमा श्रद्धालुओं के लिए आध्यात्मिक उन्नति, सकारात्मक ऊर्जा, ज्ञान, सफलता और गुरु कृपा प्राप्त करने का एक अत्यंत शुभ और दुर्लभ अवसर मानी जा रही है। श्रद्धा, सेवा और समर्पण के साथ किया गया गुरु पूजन जीवन में नई ऊर्जा, आत्मविश्वास और सफलता का मार्ग प्रशस्त करने वाला माना गया है।

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VIKAS TRIPATHI
VIKAS TRIPATHIhttp://www.pardaphaas.com
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