उत्तर प्रदेश – देवरिया जिले की निलंबित बेसिक शिक्षा अधिकारी (बीएसए) शालिनी श्रीवास्तव को गोरखपुर पुलिस ने दिल्ली से गिरफ्तार कर लिया है। शिक्षक आत्महत्या और कथित 48 लाख रुपये की रिश्वतखोरी के चर्चित मामले में मुकदमा दर्ज होने के बाद वह पिछले चार महीनों से फरार चल रही थीं। उनकी गिरफ्तारी की पुष्टि गोरखपुर के एसपी सिटी निमिष पाटिल ने की है। लंबे समय से फरार रहने के कारण उन पर पहले 10 हजार और बाद में 25 हजार रुपये का इनाम घोषित किया गया था। अदालत उनके खिलाफ गैर-जमानती वारंट भी जारी कर चुकी थी।
यह मामला कुशीनगर निवासी एवं देवरिया में तैनात सहायक अध्यापक कृष्ण मोहन सिंह की आत्महत्या से जुड़ा है। 20 फरवरी 2026 को उन्होंने गोरखपुर में फांसी लगाकर जान दे दी थी। घटना के बाद पुलिस को चार पन्नों का सुसाइड नोट, वीडियो और ऑडियो क्लिप मिले थे। सुसाइड नोट में आरोप लगाया गया था कि हाईकोर्ट के आदेश को लागू करने के बदले बीएसए शालिनी श्रीवास्तव और कार्यालय के बाबू संजीव सिंह ने उनसे तथा दो अन्य शिक्षकों से 16-16 लाख रुपये, यानी कुल 48 लाख रुपये की रिश्वत मांगी थी।
मृतक शिक्षक ने अपने नोट में लिखा था कि उन्होंने गहने गिरवी रखकर और कर्ज लेकर रुपये की व्यवस्था की थी, लेकिन इसके बावजूद उन्हें लगातार मानसिक रूप से प्रताड़ित किया गया। आरोप है कि आत्महत्या से पहले उन्हें दोबारा कार्यालय बुलाकर पैसों के लिए दबाव बनाया गया था।
गिरफ्तारी से बचने के लिए शालिनी श्रीवास्तव ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में अग्रिम जमानत याचिका दायर की थी, जिसे मई 2026 में खारिज कर दिया गया। कोर्ट ने टिप्पणी की थी कि सरकारी कार्यालयों को आदेश बेचने की खुली दुकान नहीं बनने दिया जा सकता। मामले में नामजद बाबू संजीव सिंह अभी भी फरार बताए जा रहे हैं। शासन पहले ही शालिनी श्रीवास्तव को निलंबित कर चुका है।














